
छत्तीसगढ़ ने रचा नया इतिहास: अखिल भारतीय वन खेल प्रतियोगिता में फिर बना बादशाह
150 मेडल और 578 अंक के साथ पहला स्थान, लगातार 13वीं बार ओवरऑल चैंपियनशिप अपने नाम
NTN NEWS REPORT// देहरादून में आयोजित 28वीं अखिल भारतीय वन खेल प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर अपना परचम लहराते हुए इतिहास रचा है। शानदार प्रदर्शन के दम पर राज्य ने मेडल तालिका में पहला स्थान हासिल किया और 150 मेडल तथा 578 अंकों के साथ लगातार दूसरे वर्ष चैंपियनशिप पर कब्जा जमाया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वन मंत्री केदार कश्यप ने टीम के सभी खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई देते हुए भविष्य में भी इसी तरह राज्य का नाम रोशन करने की शुभकामनाएं दीं।
प्रतियोगिता का पूरा विवरण
देहरादून में 12 से 17 नवम्बर तक आयोजित 28वीं ऑल इंडिया फॉरेस्ट स्पोर्ट्स मीट में छत्तीसगढ़ की 253 सदस्यीय टीम ने भाग लिया। विभिन्न विधाओं में दमदार खेल दिखाते हुए राज्य ने— 74 स्वर्ण पदक , 34 रजत पदक , 42 कांस्य पदक प्राप्त किए।
इसके साथ ही छत्तीसगढ़ ने लगातार 13वीं बार ओवरऑल चैंपियनशिप ट्रॉफी जीतकर एक और स्वर्णिम उपलब्धि अपने नाम की। समापन समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह और वन मंत्री सुबोध उनियाल ने संयुक्त रूप से ओवरऑल चैंपियनशिप ट्रॉफी प्रदान की, जिसे छत्तीसगढ़ की ओर से शालिनी रैना ने ग्रहण किया। अतिरिक्त मुख्य सचिव ऋचा शर्मा और वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव ने भी सभी खिलाड़ियों को बधाई दी।
व्यक्तिगत प्रदर्शन भी रहे बेहतरीन
प्रतियोगिता में कई छत्तीसगढ़ी खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत स्तर पर भी शानदार उपलब्धियां हासिल कीं—
सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी: निखिल जाल्को — तैराकी में 5 स्वर्ण
सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी: संगीता राजगोपालन — बैडमिंटन व टेनिस में 4 स्वर्ण, 1 रजत
सर्वश्रेष्ठ एथलीट (महिला ओपन): थोटा संकीर्तन — 5 स्वर्ण, मिला “गोल्डन गर्ल” का खिताब
सर्वश्रेष्ठ एथलीट (पुरुष वेटरन): सुखनंदन लाल ध्रुव — 5 स्वर्ण
सर्वश्रेष्ठ एथलीट (महिला वेटरन): चारुलता गजपाल — 4 स्वर्ण
अन्य राज्यों का प्रदर्शन
केरल — 31 स्वर्ण, द्वितीय स्थान, कर्नाटक — 25 स्वर्ण, तृतीय स्थान, मेजबान उत्तराखंड — छठवाँ स्थान
“एक खेल-एक वन” पहल बनी आकर्षण
इस वर्ष प्रतियोगिता को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए “एक खेल-एक वन” की विशेष पहल की गई। इसके तहत प्रत्येक मेडल विजेता खिलाड़ी के नाम पर एक पेड़ लगाया गया, जिससे खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ प्रकृति संवर्धन का संदेश भी मिला।
छत्तीसगढ़ के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वन खेल प्रतियोगिताओं में राज्य की पहचान अब लगातार विजेता की बन चुकी है।