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राजनीति

महिला आरक्षण संशोधन बिल गिरने के बाद सियासत गरम, संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, प्रियंका गांधी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

NTN NEWS REPORT//नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद देश की सियासत गरमा गई है। बिल गिरने के अगले दिन संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और प्रमुख विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस और विपक्षी इंडिया ब्लॉक को महिला विरोधी बताते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करने की मांग दोहराई।

फाइल फोटो

“यह महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन का बिल था” – प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी ने दावा किया कि सरकार जिस संशोधन बिल को महिला आरक्षण बता रही थी, वह वास्तव में परिसीमन (सीटों के पुनर्निर्धारण) से जुड़ा प्रस्ताव था। उन्होंने कहा कि इसमें सीधे तौर पर महिला आरक्षण लागू करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी।

उन्होंने सवाल उठाया कि बिल का मसौदा एक दिन पहले ही सार्वजनिक क्यों किया गया और इसे इतनी हड़बड़ी में क्यों लाया गया। उनके मुताबिक, पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और कुछ राज्यों में जारी मतदान के बीच यह कदम राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से उठाया गया।


“सरकार सत्ता के लिए महिलाओं के नाम का उपयोग कर रही”

प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार महिलाओं के नाम पर सत्ता में बने रहना चाहती है। उन्होंने मणिपुर, उन्नाव और महिला खिलाड़ियों से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि जिन मामलों में महिलाओं के साथ अन्याय हुआ, वहां सरकार संवेदनशीलता नहीं दिखा सकी।

उन्होंने कहा कि यदि यह बिल पारित हो जाता तो सरकार स्वयं को महिलाओं का मसीहा बताती और पारित न होने की स्थिति में विपक्ष को महिला विरोधी करार देती। उनके अनुसार, विपक्ष ने सरकार की “रणनीति” को विफल किया है।


2023 का कानून लागू करने की मांग

प्रियंका गांधी ने कहा कि वर्ष 2023 में सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण कानून को लागू किया जाए, ताकि 2029 के आम चुनाव से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उसमें आवश्यक संशोधन लाने हों तो विपक्ष उसका समर्थन करेगा।

उन्होंने इसे विपक्षी एकता और संविधान की जीत बताया और कहा कि सरकार को महिलाओं को उनका अधिकार देने में देरी नहीं करनी चाहिए।


बीजेपी का पलटवार

वहीं बीजेपी नेताओं ने बिल गिरने को “काला दिन” बताते हुए विपक्ष पर महिला सशक्तिकरण की राह रोकने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में सरकार प्रतिबद्ध है और विपक्ष राजनीतिक कारणों से बाधा डाल रहा है।


2029 चुनाव पर नजर

प्रियंका गांधी ने कहा कि देश की जनता महंगाई और अन्य मुद्दों से परेशान है और आगामी आम चुनाव (2029) में इसका असर दिखेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि राजनीतिक दल स्वेच्छा से भी अधिक महिलाओं को टिकट देंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन की तत्काल आवश्यकता नहीं है और सीटों के भूगोल में बदलाव सत्ता बचाने की रणनीति हो सकती है।

महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के लोकसभा में गिरने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। एक ओर सत्तापक्ष इसे महिला सशक्तिकरण के खिलाफ कदम बता रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष सरकार की नीयत और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या 2023 का पारित कानून लागू करने की दिशा में कोई ठोस पहल होती है या नहीं।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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