
नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को सांप काटने से हुई मृत्यु के देने पड़ेंगे 30 लाख रुपए, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जांजगीर का आदेश… जानिए आखिर क्या है मामला
जांजगीर चाम्पा 26 मई 2025 // जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जांजगीर ने आज सांप काटने से हुई मृत्यु के मामले में अपना फैसला सुनाते हुए पेश परिवाद को स्वीकार करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय पारित किया। शिकायत कर्ता बुद्धेश्वर पटेल की पत्नी की मृत्यु बीमा अवधि होने पर नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने बीमा राशि देने से इनकार कर दिया था। जिस पर आयोग के निर्णय अनुसार अब बीमा की राशि 30,00,000/- ( तीस लाख लाख रुपये ) तथा मानसिक कष्ट के लिए 30,000/- (तीस हजार रुपये ) व वाद व्यय 5000/- सहित बीमा कंपनी को देना होगा।
मामला यह था कि उपभोक्ता/ शिकायतकर्ता बुद्धेश्वर पटेल निवासी मरकामगोढी थाना व जिला सक्ती ने अपनी पत्नी सुकरीता पटेल का नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में दिनांक 10/11/22 को हेल्थ बीमा करवाया था। जो एक वर्ष की अवधि के लिए वैध था , जिसमें दुर्घटना मृत्यु होने पर बीमा तीस लाख रुपये का था।
बीमा अवधि में ही दिनांक 01/09/23 उपभोक्ता की पत्नी सुकरीता पटेल की मृत्यु साँप काटने से हो गई है । उपभोक्ता के द्वारा इंश्योरेंस कंपनी से बीमा राशि की माँग की गई लेकिन बीमा कंपनी ने बीमा राशि इस आधार पर देने से मना कर दिया कि आपने ग़लत बयान दिया है तथा आपके दस्तावेजों में विसंगतियों हैं , बीमा दावा अस्वीकार कर दिया गया।
तब उपभोक्ता/शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर के समक्ष परिवाद पेश कर अपनी पत्नी की मृत्यु होने पर बीमा राशि दिलाए जाने की माँग की । जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू , सदस्य विशाल तिवारी , सदस्य श्रीमती महिमा सिंह ने पेश दस्तावेजों, बीमा पॉलिसी व किए गए तर्कों का सूक्ष्मता से अध्ययन कर यह पाया कि बीमा पॉलिसी में दुर्घटना मृत्यु होने पर बीमा तीस लाख रुपये था। और उपभोक्ता की पत्नी की मृत्यु साँप काटने से हुई थी जो की आसामयिक मृत्यु है और दुर्घटना की श्रेणी में आती है।
बीमा कंपनी द्वारा बीमा राशि न दे कर उपभोक्ता के प्रति सेवा में कमी की गई है । जिला उपभोक्ता आयोग ने नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता/ शिकायतकर्ता को उसकी पत्नी की दुर्घटना मृत्यु होने बीमा राशि 30,00,000/- ( तीस लाख लाख रुपये ) तथा मानसिक कष्ट के लिए 30,000/- (तीस हजार रुपये ) व वाद व्यय 5000/- देने का आदेश , आदेश दिनांक 45 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया।
नियत अवधि में आदेशित राशि नहीं देने पर आदेश दिनांक से भुगतान दिनांक तक 6% वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया गया । जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जांजगीर ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के अंतर्गत पेश परिवाद को स्वीकार कर उक्त आदेश पारित किया गया।