मड़वा पावर प्लांट से प्रभावित परिवार की कलेक्टर से गुहार: जमीन गई, रोजगार नहीं मिला; एसडीएम पर लगाए गंभीर आरोप, अधिकारी ने कहा- नियमों के अनुसार हुई कार्रवाई
NTN REPORT// जांजगीर-चांपा। मड़वा पावर प्लांट से प्रभावित एक परिवार ने जमीन अधिग्रहण के बाद नौकरी नहीं मिलने और कथित रूप से उचित राहत नहीं मिलने को लेकर कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर न्याय की मांग की है। ग्राम सरखों निवासी रामसनेही राठौर ने आरोप लगाया है कि भूमि अधिग्रहण के वर्षों बाद भी उन्हें रोजगार का लाभ नहीं दिया गया, जबकि अन्य प्रभावित लोगों को नौकरी दी गई है।
आवेदन में बताया गया है कि आवेदक की पत्नी सरिता राठौर के नाम दर्ज भूमि खसरा नंबर 1139/1 रकबा 0.06 एकड़ एवं 1072/2 रकबा 0.18 एकड़ सहित कुल 0.24 एकड़ भूमि मड़वा पावर प्लांट के लिए अधिग्रहित की गई थी। इसके एवज में वर्ष 2020 में मुआवजा प्रदान किया गया था। इसके अलावा आवेदन में अन्य अधिग्रहित भूमि का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें वर्ष 2011 और 2015 में मुआवजा मिलने की बात कही गई है।
रामसनेही राठौर का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के बाद परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया। वह पहले अधिग्रहित भूमि पर खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनका आरोप है कि प्रभावित परिवारों को रोजगार देने की बात कही गई थी, लेकिन उन्हें पात्र होने के बावजूद नौकरी से वंचित रखा जा रहा है।

आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि मड़वा पावर प्लांट द्वारा कई लोगों को नौकरी दी गई, लेकिन उनके परिवार के किसी सदस्य को रोजगार नहीं दिया गया। नौकरी के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने पर उन्हें पात्र नहीं होने की बात कही गई।
रामसनेही राठौर ने यह भी आरोप लगाया है कि मामले को लेकर एसडीएम जांजगीर सुब्रत प्रधान द्वारा उनसे पैसे की मांग की जा रही है। उन्होंने कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर न्याय दिलाने की मांग की है।
वहीं इस मामले में एसडीएम जांजगीर सुब्रत प्रधान से बात की गई तो उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि आवेदक नौकरी के लिए पात्र नहीं है और पूरे प्रकरण में शासन के निर्धारित नियमों का पालन किया गया है। एसडीएम ने कहा कि यदि लगाए गए आरोपों से संबंधित कोई प्रमाण है तो प्रस्तुत किया जाए।
आवेदक ने प्रशासन से मांग की है कि या तो परिवार के पात्र सदस्य को रोजगार दिया जाए या अधिग्रहण से हुए नुकसान की उचित भरपाई की जाए, ताकि परिवार का जीवन-यापन सुचारू रूप से चल सके।
