Advertisment
Advertisment
ट्रेंडिंग/सोशल

पाकिस्तान में खत्म होगा ‘पीरियड टैक्स’, सैनिटरी पैड होंगे सस्ते; करोड़ों महिलाओं को मिलेगी राहत

NTN REPORT// इस्लामाबाद। पाकिस्तान सरकार ने महिलाओं के स्वास्थ्य और मासिक धर्म से जुड़ी एक बड़ी समस्या को लेकर अहम फैसला लिया है। देश में सैनिटरी पैड और अन्य मेंस्ट्रुअल हेल्थ प्रोडक्ट्स पर लगने वाला ‘पीरियड टैक्स’ हटाने की घोषणा की गई है। सरकार के इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि सैनिटरी उत्पादों की कीमतों में कमी आएगी और लाखों महिलाओं के लिए इन्हें खरीदना आसान हो जाएगा।

प्रतीकात्मक एआई तस्वीर

क्या होता है पीरियड टैक्स?

पीरियड टैक्स वह टैक्स होता है, जो सैनिटरी पैड, टैम्पोन और मासिक धर्म से जुड़े अन्य जरूरी उत्पादों पर लगाया जाता है। महिला अधिकार संगठनों का कहना है कि पीरियड्स एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, इसलिए इससे जुड़े उत्पादों को लग्जरी सामान की तरह टैक्स के दायरे में रखना गलत है।

पाकिस्तान में स्थानीय स्तर पर बनने वाले सैनिटरी उत्पादों पर पहले 18 प्रतिशत सेल्स टैक्स लगाया जाता था। वहीं आयातित उत्पादों पर अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी भी लगती थी। इन टैक्स और शुल्कों के कारण सैनिटरी प्रोडक्ट्स की कीमत बाजार में काफी बढ़ जाती थी।

इसी वजह से इसे ‘पीरियड टैक्स’ या ‘पिंक टैक्स’ कहा जाने लगा।

पाकिस्तान में क्यों थी बड़ी समस्या?

महंगे सैनिटरी उत्पादों का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण इलाकों की महिलाओं पर पड़ता है। यूनिसेफ के अनुसार पाकिस्तान में केवल करीब 12 प्रतिशत महिलाएं ही बाजार में मिलने वाले सैनिटरी पैड का इस्तेमाल कर पाती हैं।

बाकी महिलाएं पुराने कपड़ों या घरेलू विकल्पों पर निर्भर रहती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कपड़ों को सही तरीके से साफ और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल न किया जाए तो संक्रमण, त्वचा संबंधी समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

पीरियड्स की वजह से शिक्षा पर भी असर

कई लड़कियों के लिए मासिक धर्म के दौरान पर्याप्त सुविधाओं की कमी शिक्षा में बाधा बन जाती है। स्कूलों में साफ शौचालय, पानी और जरूरी सुविधाओं की कमी के कारण कई छात्राएं पीरियड्स के दौरान स्कूल नहीं जा पातीं।

सिंध प्रांत की एक लड़की की कहानी इस समस्या की गंभीरता दिखाती है। 2022 की बाढ़ के दौरान बेघर हुए परिवार में एक किशोरी को पहली बार पीरियड्स आए। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण सैनिटरी पैड खरीदना संभव नहीं था और उसे कपड़े का इस्तेमाल करना पड़ा, जिससे उसे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

वित्त मंत्री ने किया ऐलान

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने घोषणा की कि सैनिटरी पैड और महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़े जरूरी उत्पादों को टैक्स के दायरे से बाहर किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि ये उत्पाद महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और सामाजिक भागीदारी के लिए जरूरी हैं, इसलिए इन्हें आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में देखा जाना चाहिए।

महिला संगठनों ने किया स्वागत

इस फैसले का महिला अधिकार संगठनों और पीरियड हेल्थ पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि टैक्स हटने से सैनिटरी उत्पादों की कीमतों में कमी आ सकती है और ज्यादा महिलाएं सुरक्षित विकल्प अपना पाएंगी।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल टैक्स हटाना पर्याप्त नहीं होगा। मासिक धर्म से जुड़े सुधारों के लिए साफ पानी, बेहतर स्वच्छता व्यवस्था, जागरूकता और सामाजिक झिझक को खत्म करना भी जरूरी है।

महनूर ओमर की कानूनी लड़ाई बनी बदलाव की वजह

इस फैसले के पीछे 25 वर्षीय पाकिस्तानी वकील महनूर ओमर की मुहिम को भी अहम माना जा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ अदालत में याचिका दायर कर सवाल उठाया था कि जब कई अन्य जरूरी वस्तुओं को टैक्स से राहत दी जाती है, तो महिलाओं की हर महीने की जरूरत वाले सैनिटरी पैड पर टैक्स क्यों लगाया जाता है।

उनका तर्क था कि महिलाओं की जैविक जरूरतों पर टैक्स लगाना लैंगिक असमानता को बढ़ावा देता है। उनकी मुहिम को सोशल मीडिया पर भी व्यापक समर्थन मिला।

क्या वास्तव में बदलेगी महिलाओं की जिंदगी?

पीरियड टैक्स हटाने से सैनिटरी उत्पाद सस्ते हो सकते हैं और महिलाओं की पहुंच बढ़ सकती है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार असली बदलाव तभी आएगा जब सस्ते उत्पादों के साथ स्वच्छता सुविधाएं, सही जानकारी और पीरियड्स को लेकर समाज में मौजूद झिझक भी खत्म होगी।

फिलहाल पाकिस्तान सरकार का यह फैसला महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
Back to top button
error: Content is protected !!