मोदी कैबिनेट विस्तार की तैयारी तेज: चुनावी राज्यों पर रहेगा फोकस, यूपी-पंजाब से बढ़ सकता है प्रतिनिधित्व!
NTN REPORT// नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में जल्द बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार का रोडमैप तैयार किया जा रहा है और इसमें नए चेहरों को शामिल करने के साथ कुछ पुराने मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस विस्तार में राज्यों के राजनीतिक समीकरणों को खास महत्व दिया जाएगा।

मॉनसून सत्र से पहले हो सकता है मंत्रिमंडल विस्तार
केंद्र सरकार के सामने संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना है। इससे पहले मंत्रिमंडल विस्तार किए जाने की चर्चा चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 जुलाई तक कई कार्यक्रम और दौरे तय हैं, जिसके बाद किसी भी समय नए मंत्रियों के नामों का ऐलान किया जा सकता है।
बीजेपी और केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल करने पर मंथन जारी है। क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए मंत्रिपरिषद में बदलाव की रणनीति बनाई जा रही है।
कई मंत्रियों की जगह खाली, नए चेहरों को मिल सकती है एंट्री
वर्तमान में मोदी सरकार में कुल 72 मंत्री हैं, जिनमें 31 कैबिनेट मंत्री, 5 स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री और 36 राज्यमंत्री शामिल हैं। केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं, ऐसे में करीब 9 पद पहले से खाली हैं।
इसके अलावा कुछ और जगहें भी खाली हो सकती हैं। केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी के उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बनने और हर्ष मल्होत्रा के दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के “एक व्यक्ति, एक पद” नियम के तहत दोनों के मंत्रिमंडल से हटने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और रवनीत सिंह बिट्टू के राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद नए चेहरों के लिए जगह बन सकती है।
चुनावी राज्यों को मिलेगी प्राथमिकता
मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे ज्यादा ध्यान उन राज्यों पर रहने की संभावना है जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात शामिल हैं।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चुनावी राज्यों से नेताओं को केंद्र में जगह देकर बीजेपी संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश कर सकती है।
उत्तर प्रदेश को मिल सकता है बड़ा प्रतिनिधित्व
उत्तर प्रदेश से फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत करीब 10 मंत्री केंद्र सरकार में शामिल हैं। 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए यूपी कोटे में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई थी, ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल के जरिए राज्य में राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की जा सकती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को विशेष महत्व मिलने की संभावना है। इसके अलावा ओबीसी और दलित समुदायों को साधने के लिए नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है।
उत्तराखंड में बढ़ सकता है कद
उत्तराखंड से फिलहाल अजय टम्टा केंद्र सरकार में परिवहन राज्य मंत्री हैं। बीजेपी के दलित चेहरे के तौर पर उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। संभावना है कि नई टीम में उनका कद बढ़ाया जा सकता है या फिर राज्य से किसी नए चेहरे को मौका मिल सकता है।
पंजाब से बढ़ सकती है हिस्सेदारी
पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए मोदी कैबिनेट में पंजाब का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की चर्चा है। फिलहाल रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब से केंद्र में मंत्री हैं।
बीजेपी पंजाब में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में सिख समुदाय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए पंजाब से दो से तीन नए चेहरों को जगह मिल सकती है।
आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए कुछ राज्यसभा सांसदों में से किसी को भी मौका मिलने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
बिहार और महाराष्ट्र में भी बदलाव के संकेत
बिहार की राजनीति में हुए बदलाव के बाद यहां से भी मंत्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनके केंद्र में मंत्री बनने की चर्चा फिर तेज हो गई है।
महाराष्ट्र में शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसदों की संख्या बढ़ने के बाद केंद्र सरकार में इस कोटे से नए चेहरे शामिल किए जाने की संभावना है। फिलहाल शिवसेना से केंद्र में एक ही मंत्री है।
क्या बागी सांसदों को मिलेगा मौका?
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की राजनीतिक स्थिति मजबूत होने के बाद वहां से भी कुछ सांसदों को केंद्र में जगह मिल सकती है। तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए नेताओं को लेकर भी सियासी चर्चाएं तेज हैं।
महाराष्ट्र और बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद एनडीए के सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल विस्तार में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है।
नए समीकरणों के साथ तैयार होगी मोदी सरकार की नई टीम
कुल मिलाकर मोदी मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। नए चेहरों की एंट्री और पुराने चेहरों की जिम्मेदारियों में बदलाव के जरिए बीजेपी क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।