“300 करोड़ दो और बीना को जिला बनाओ, तो कांग्रेस में रहूंगी” बयान पर गरमाई मध्य प्रदेश की राजनीति
कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के बयान से मचा सियासी घमासान
NTN REPORT// सागर। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे का बयान चर्चा का विषय बन गया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के सामने खुलकर शर्त रखते हुए कहा कि यदि बीना के विकास कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपये दिए जाएं और बीना को जिला बनाया जाए, तो वह कांग्रेस के साथ बनी रहेंगी। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

भाजपा के करीब मानी जा रही हैं निर्मला सप्रे
निर्मला सप्रे कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बनी थीं, लेकिन चुनाव के बाद से ही उन्हें लगातार भाजपा नेताओं और मंचों के साथ देखा जाता रहा है। कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी भाजपा नेताओं के साथ मौजूदगी ने उनके दल बदलने की अटकलों को लगातार हवा दी है। हालांकि अब तक उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता नहीं ली है।
राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि निर्मला सप्रे भाजपा के संपर्क में हैं और भविष्य में वे पार्टी बदल सकती हैं। ऐसे में उनका ताजा बयान कांग्रेस के लिए नई असहज स्थिति पैदा करता नजर आ रहा है।
दल-बदल कानून के तहत हाईकोर्ट में मामला लंबित
निर्मला सप्रे के खिलाफ कांग्रेस पहले ही दल-बदल कानून के तहत जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुकी है। कांग्रेस का आरोप है कि विधायक बनने के बाद उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर भाजपा का समर्थन किया और लगातार भाजपा की गतिविधियों में सक्रिय रहीं। यह मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

कांग्रेस ने कहा- यह खुली सौदेबाजी
निर्मला सप्रे के बयान पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बयान साफ तौर पर राजनीतिक दबाव और सौदेबाजी को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर विपक्षी विधायकों को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को विकास के मुद्दों को राजनीतिक सौदेबाजी का माध्यम नहीं बनाना चाहिए।
भाजपा की ओर से नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया
वहीं, भाजपा की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निर्मला सप्रे का यह बयान आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति को और अधिक गर्मा सकता है।
बीना को जिला बनाने की मांग फिर चर्चा में
बीना को जिला बनाने की मांग लंबे समय से स्थानीय स्तर पर उठती रही है। क्षेत्र के लोग लगातार प्रशासनिक सुविधाओं और विकास कार्यों के मद्देनजर बीना को जिला घोषित करने की मांग करते रहे हैं। निर्मला सप्रे ने भी अपने बयान में इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता बीना का विकास और क्षेत्र की जनता की मांगों को पूरा कराना है।
प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निर्मला सप्रे का बयान केवल विकास की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और संभावित नए समीकरणों की ओर भी संकेत करता है। आने वाले समय में यह मामला कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।