अजा एकादशी 2026: 7 सितंबर को रखा जाएगा व्रत, जानिए पूजा के शुभ मुहूर्त से लेकर पारण का समय
NTN REPORT// भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी को लेकर इस वर्ष व्रत की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 की शाम से शुरू होकर 7 सितंबर की शाम तक रहेगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अजा एकादशी का व्रत 6 सितंबर को रखा जाए या 7 सितंबर को।

पंचांग की उदया तिथि के अनुसार अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और उपवास किया जाएगा।
6 सितंबर की शाम शुरू हुई एकादशी तिथि
पंचांग गणना के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 को शाम करीब 7:29 बजे शुरू हुई। यह तिथि 7 सितंबर 2026 को शाम करीब 5:03 से 5:05 बजे के आसपास समाप्त होगी।
क्योंकि 7 सितंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उदया तिथि के सिद्धांत के अनुसार अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखना शास्त्रसम्मत माना गया है।
अजा एकादशी पर भद्रा और पंचक का क्या प्रभाव?
अजा एकादशी के दिन भद्रा और पंचक का प्रभाव नहीं रहेगा। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में पूजा-पाठ अथवा अन्य शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
7 सितंबर 2026 को राहुकाल:
सुबह 8:54 बजे से 10:32 बजे तक
इस अवधि को छोड़कर श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं।
अजा एकादशी 2026 पर पूजा के शुभ मुहूर्त
अजा एकादशी के दिन पूजा-पाठ के लिए विभिन्न शुभ समय बताए गए हैं। प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं—
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:49 बजे से 6:32 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 6:10 बजे से 7:16 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 12:29 बजे से 1:59 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 1:22 बजे से 2:14 बजे तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग: दोपहर 2:44 बजे से अगले दिन सुबह 7:17 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 3:59 बजे से शाम 4:51 बजे तक
श्रद्धालु राहुकाल की अवधि को ध्यान में रखते हुए इन शुभ समयों में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
8 सितंबर को होगा अजा एकादशी व्रत का पारण
अजा एकादशी का व्रत 8 सितंबर 2026, मंगलवार को द्वादशी तिथि में खोला जाएगा। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार पारण का समय सुबह 6:02 बजे से 8:33 बजे तक बताया गया है।
हालांकि, व्रत के पारण का वास्तविक समय स्थान के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग की गणना के आधार पर कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पारण का समय सुनिश्चित करना उचित रहेगा।
भगवान विष्णु को समर्पित है अजा एकादशी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
मान्यता है कि अजा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत को पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और कल्याण प्रदान करने वाला बताया गया है।
व्रत के दौरान श्रद्धालु भगवान विष्णु का स्मरण, पूजा-पाठ, भजन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हैं। एकादशी व्रत के नियमों और आहार संबंधी परंपराओं का पालन व्यक्ति अपनी धार्मिक परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार करता है।
अजा एकादशी की तिथि को लेकर बने भ्रम में 7 सितंबर 2026 को व्रत रखा जाना उदया तिथि के आधार पर उचित माना गया है, क्योंकि इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी। वहीं व्रत का पारण 8 सितंबर 2026 को द्वादशी तिथि में किया जाएगा।
ध्यान दें: पूजा, व्रत और पारण के समय में स्थान के अनुसार कुछ अंतर संभव है। इसलिए स्थानीय सूर्योदय तथा अपने क्षेत्र में मान्य पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
धार्मिक अस्वीकरण: यह समाचार धार्मिक मान्यताओं, पंचांग गणना एवं प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। पूजा-पाठ, व्रत, मुहूर्त एवं धार्मिक मान्यताओं के संबंध में अलग-अलग पंचांग और परंपराओं में अंतर संभव है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान या पुरोहित की सलाह लेना उचित है।