ट्विंकल खन्ना के मुगलों पर बयान से विवाद, शीमा खेर ने साधा निशाना
‘मिसेज फनीबोन्स’ कॉलम में खाने के व्यंजनों के जरिए मुगल इतिहास पर टिप्पणी, शीमा बोलीं- हिंसक इतिहास की तुलना खाने से करना न मजेदार है, न समझदारी
NTN REPORT// मुंबई। अभिनेत्री और लेखिका ट्विंकल खन्ना अपने हालिया ‘मिसेज फनीबोन्स’ कॉलम में मुगल इतिहास और खान-पान को लेकर की गई टिप्पणी के बाद विवादों में घिर गई हैं। ट्विंकल ने अपने कॉलम में देश में इतिहास की किताबों से मुगलों के उल्लेख को हटाने की चर्चा को मुगलई व्यंजनों से जोड़ते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने आपत्ति जताई है।

ट्विंकल खन्ना ने अपने कॉलम में लिखा कि जो लोग इतिहास की किताबों से मुगलों को हटाना चाहते हैं, उन्हें इसकी शुरुआत अपने खाने की थाली से करनी चाहिए। उन्होंने कोफ्ता, कोरमा और कबाब जैसे व्यंजनों का जिक्र करते हुए कहा कि मुगलई पनीर जैसी चीजों को भी फिर नहीं रखा जा सकता। ट्विंकल की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।
शीमा खेर ने ट्विंकल खन्ना की टिप्पणी पर जताई आपत्ति
ट्विंकल खन्ना की टिप्पणी पर कंटेंट क्रिएटर शीमा खेर ने एक लंबी पोस्ट के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि इतिहास से जुड़े हिंसा और संघर्ष की तुलना खान-पान से करना किस तरह उचित या हास्यपूर्ण माना जा सकता है।
शीमा खेर का कहना है कि किसी ऐतिहासिक दौर को केवल उसके खान-पान के माध्यम से देखना इतिहास की जटिलताओं को बेहद सीमित नजरिए से देखने जैसा है। उन्होंने अपने पोस्ट में ट्विंकल खन्ना की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि हिंसक इतिहास की तुलना खाने से करना न तो मजेदार है और न ही समझदारी भरा तर्क।
‘केसरी’ फिल्म का दिया उदाहरण
शीमा खेर ने अपनी बात रखते हुए अक्षय कुमार की फिल्म ‘केसरी’ का भी उदाहरण दिया। उन्होंने सरागढ़ी की लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं को व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाने के लिए फिल्मों का सहारा लिया गया।
शीमा ने सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति ने ‘केसरी’ जैसी फिल्म देखकर उस दौर की हिंसा और संघर्ष को समझा तथा फिल्म को पसंद किया, तो इसका यह अर्थ तो नहीं कि इसके बाद उसने चिकन या दूसरे व्यंजन खाना छोड़ दिया होगा।
उनके मुताबिक, जब लोग इतिहास की हिंसक घटनाओं पर बनी फिल्में देख सकते हैं, शहीदों की बहादुरी को स्वीकार कर सकते हैं और उसके बाद सामान्य जीवन में भोजन भी कर सकते हैं, तो फिर इतिहास की चर्चा में खान-पान को तर्क के रूप में इस्तेमाल करना कितना उचित है, इस पर सवाल उठता है।
‘मुगल सिर्फ कबाब और कोरमा देने नहीं आए थे’
शीमा खेर ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि मुगल काल को केवल कबाब, कोरमा या अन्य व्यंजनों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार उस दौर में राजनीतिक संघर्ष, युद्ध, विजय और रक्तपात जैसी ऐतिहासिक घटनाएं भी हुईं।
उन्होंने इसी आधार पर इतिहास को उसके व्यापक संदर्भ में देखने की बात कही और ट्विंकल खन्ना की टिप्पणी पर सवाल उठाया।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
ट्विंकल खन्ना की टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनकी टिप्पणी को व्यंग्य और हास्य के तौर पर देख रहे हैं, जबकि कई यूजर्स ने इसे इतिहास के गंभीर विषय को खान-पान से जोड़ने वाला बयान बताते हुए आलोचना की है।
फिलहाल विवाद का केंद्र ट्विंकल खन्ना की वह टिप्पणी है, जिसमें उन्होंने मुगल इतिहास से जुड़े विमर्श को मुगलई खान-पान के संदर्भ से जोड़कर अपनी बात रखी। वहीं, शीमा खेर ने इसे इतिहास को देखने का उचित तरीका नहीं मानते हुए सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।