केरल में मुख्यमंत्री को लेकर कांग्रेस में मंथन तेज, वेणुगोपाल-सतीशन समर्थकों के बीच बढ़ी खींचतान
चार दिन बाद भी सीएम फेस तय नहीं, कांग्रेस हाईकमान पर टिकी निगाहें
NTN REPORT// पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस अभी भी बरकरार है। राज्य में यूडीएफ यानी कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी का रास्ता साफ कर लिया है, लेकिन मुख्यमंत्री के नाम पर अब तक अंतिम फैसला नहीं हो सका है। चुनाव परिणाम आने के चार दिन बाद भी कांग्रेस नेतृत्व किसी एक नाम पर सहमति बनाने में जुटा हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर गुटबाजी और खींचतान तेज हो गई है। खासतौर पर केसी वेणुगोपाल और वीडी सतीशन समर्थकों के बीच बढ़ती तनातनी ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को गर्मा दिया है। पार्टी हाईकमान अब सभी पक्षों को साधने की कोशिश में लगा हुआ है।
तीन बड़े फैक्टर्स पर होगा मुख्यमंत्री का फैसला
कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री के चयन में तीन प्रमुख बातों को आधार बनाया जाएगा। इनमें पहला फैक्टर कांग्रेस विधायकों की राय, दूसरा सहयोगी दलों की सहमति और तीसरा जनता के बीच नेताओं की लोकप्रियता यानी पब्लिक ओपिनियन होगा।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान पहले सभी प्रमुख दावेदारों से फोन पर बातचीत कर सहमति बनाने की कोशिश करेगा। यदि सहमति बन जाती है तो जल्द ही मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। हालांकि यदि विवाद बरकरार रहता है तो तीनों प्रमुख नेताओं को दिल्ली बुलाकर अंतिम दौर की चर्चा की जाएगी।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे केसी वेणुगोपाल
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे केसी वेणुगोपाल का नाम चल रहा है। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और केंद्रीय नेतृत्व से करीबी रिश्तों को उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वे लगातार विधायकों से संपर्क कर समर्थन जुटाने में लगे हैं ताकि उनका दावा और मजबूत हो सके। खबर यह भी है कि वे दिल्ली में पार्टी आलाकमान से मुलाकात कर चुके हैं।
वीडी सतीशन को जमीनी कार्यकर्ताओं का मजबूत समर्थन
वीडी सतीशन भी मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने एलडीएफ सरकार पर लगातार आक्रामक हमले किए और कार्यकर्ताओं में जोश भरने में बड़ी भूमिका निभाई। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि यूडीएफ की बड़ी जीत के पीछे सतीशन की आक्रामक रणनीति का अहम योगदान रहा है।
यही वजह है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और युवा नेताओं के बीच उनका समर्थन काफी मजबूत दिखाई दे रहा है। सूत्रों का कहना है कि सतीशन भी दिल्ली नेतृत्व के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी में हैं।
अनुभवी चेहरे के रूप में उभरे रमेश चेन्निथला
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रमेश चेन्निथला का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है। उन्हें तीनों दावेदारों में सबसे अनुभवी नेता माना जा रहा है। कांग्रेस और सहयोगी दलों में उनकी अच्छी स्वीकार्यता है। उनके समर्थकों का कहना है कि राज्य को इस समय स्थिर और संतुलित नेतृत्व की जरूरत है और चेन्निथला इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प हो सकते हैं।
पोस्टर फाड़े जाने से बढ़ा राजनीतिक तनाव
राज्य की राजनीति में तनाव उस समय और बढ़ गया जब सचिवालय के बाहर लगाए गए केसी वेणुगोपाल के पोस्टर कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा फाड़ दिए गए। बताया जा रहा है कि यह घटना वीडी सतीशन समर्थकों से जुड़ी हुई थी। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई।
हालांकि विवाद बढ़ने के बाद वीडी सतीशन ने तुरंत बयान जारी कर कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि पार्टी और गठबंधन ने 102 सीटें जीतकर ऐतिहासिक सफलता हासिल की है और ऐसे समय में किसी भी तरह का शक्ति प्रदर्शन या गुटीय गतिविधि पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है।
सतीशन ने कार्यकर्ताओं से की एकजुट रहने की अपील
वीडी सतीशन ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल के नेता के चुनाव की प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो चुका है और अब एआईसीसी दूसरे चरण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। उन्होंने इसे कांग्रेस और यूडीएफ के लिए गर्व और खुशी का क्षण बताया।
सतीशन ने कार्यकर्ताओं से फ्लेक्स बोर्ड लगाने, प्रदर्शन करने और किसी भी प्रकार की गुटबाजी से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि सभी नेता और कार्यकर्ता पार्टी की एकजुटता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है और इसी के बल पर पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
हाईकमान के फैसले पर टिकी पूरी नजर
फिलहाल केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज बनी हुई है। कांग्रेस हाईकमान सभी दावेदारों और सहयोगी दलों के बीच संतुलन बनाकर ऐसा फैसला लेना चाहता है जिससे पार्टी की एकजुटता बनी रहे और नई सरकार मजबूत तरीके से काम कर सके। अब सबकी नजर दिल्ली में होने वाले अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।