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भारत

सूखे के बीच राहत की उम्मीद! 18 से 25 जुलाई के बीच फिर जोर पकड़ सकता है मॉनसून, प्रशांत महासागर के सिस्टम पर टिकी नजर

NTN REPORT// नई दिल्ली। देश के अधिकांश हिस्सों में इन दिनों मॉनसून की रफ्तार थम गई है। पूर्वी भारत को छोड़कर उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के बड़े हिस्से बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। खेतों में नमी घटने लगी है, जलाशयों का जलस्तर नीचे जा रहा है और किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों के लिए राहत की एक बड़ी उम्मीद पश्चिमी प्रशांत महासागर में बन रहे मौसमी सिस्टम हैं। विभिन्न मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि यदि ये सिस्टम बंगाल की खाड़ी तक पहुंचते हैं तो 18 से 25 जुलाई के बीच मॉनसून एक बार फिर सक्रिय होकर देश के बड़े हिस्से में अच्छी बारिश करा सकता है।

प्रतीकात्मक एआई तस्वीर

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस वर्ष मॉनसून की शुरुआत सामान्य रही थी, लेकिन बाद में इसकी गति कमजोर पड़ गई। वर्तमान में मॉनसून की ट्रफ लाइन अपनी सामान्य स्थिति से हट गई है, जिसके कारण बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली हवाएं देश के अधिकांश हिस्सों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रही हैं। यही वजह है कि पूर्वी भारत में बारिश जारी रहने के बावजूद मध्य, पश्चिम और उत्तर भारत के कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है।

बारिश की कमी का सबसे अधिक असर खरीफ फसलों पर दिखाई देने लगा है। धान, मक्का और दलहन जैसी प्रमुख फसलें पर्याप्त वर्षा पर निर्भर रहती हैं। लगातार कम बारिश से बुआई और फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। वहीं जलाशयों में पानी कम होने से सिंचाई के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।

इसी बीच मौसम वैज्ञानिकों की निगाह पश्चिमी प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे ट्रॉपिकल सिस्टम और निम्न दबाव के क्षेत्रों पर टिकी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडल ईसीएमडब्ल्यूएफ (ECMWF), जीएफएस (GFS) तथा भारतीय मौसम विभाग के मॉडल इस संभावना की ओर संकेत कर रहे हैं कि यदि ये सिस्टम पश्चिम की ओर बढ़ते हुए बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करते हैं, तो वे मॉनसून की निचले स्तर की हवाओं को मजबूती देंगे। इससे मॉनसून ट्रफ फिर सामान्य स्थिति में लौट सकती है और देश के सूखाग्रस्त हिस्सों में व्यापक वर्षा का दौर शुरू हो सकता है।

इस बीच उत्तर भारत के लिए भी राहत की खबर है। एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय हो रहा है, जिसके प्रभाव से पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा तथा पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्सों में अगले दो से तीन दिनों के दौरान गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। बादल छाए रहने से तापमान में भी कुछ गिरावट दर्ज हो सकती है। यद्यपि यह प्रभाव सीमित क्षेत्रों तक रहेगा, फिर भी इससे स्थानीय स्तर पर किसानों और जल स्रोतों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि 18 से 25 जुलाई का समय इस वर्ष के मॉनसून के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे सिस्टम अपेक्षित दिशा में आगे बढ़े, तो मध्य भारत, उत्तर भारत, राजस्थान, गुजरात और अन्य सूखे क्षेत्रों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। वहीं यदि ये प्रणालियां कमजोर पड़ गईं या दिशा बदल गई, तो बारिश की कमी और अधिक बढ़ सकती है। इसी कारण भारतीय मौसम विभाग और अन्य मौसम एजेंसियां लगातार इन सिस्टम की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्थिति जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों की भी ओर संकेत करती है। पिछले कुछ वर्षों में मॉनसून का स्वरूप लगातार अनियमित होता जा रहा है। कभी समय से पहले सक्रियता, कभी लंबे ब्रेक और कभी अत्यधिक वर्षा जैसी घटनाएं अब सामान्य होती जा रही हैं। बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव आ रहा है, जिससे मौसम का सटीक पूर्वानुमान पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

फिलहाल देशभर की नजर आने वाले एक सप्ताह पर टिकी हुई है। यदि मौसम मॉडल के संकेत सही साबित होते हैं, तो जुलाई के तीसरे सप्ताह में मॉनसून दोबारा पूरे जोर के साथ सक्रिय होकर किसानों, जलाशयों और आम लोगों को बड़ी राहत दे सकता है।

अस्वीकरण: यह समाचार मौसम मॉडलों, विशेषज्ञों के विश्लेषण एवं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। मौसम की वास्तविक स्थिति समय के साथ बदल सकती है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी ताज़ा पूर्वानुमान को ही अंतिम और आधिकारिक माना जाए।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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