
रियाांशी की मौत ने झकझोरा, जिला अस्पताल में अत्याधुनिक बर्न यूनिट की मांग को लेकर कृष्ण टंडन की पहल
जिला अस्पताल जांजगीर-चांपा के सामने शुरू किया जनजागरूकता एवं सहयोग अभियान, लोगों से स्वैच्छिक सहयोग की अपील
NTN REPORT// जांजगीर-चांपा। जिला अस्पताल जांजगीर-चांपा में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के उपचार के लिए बेहतर एवं समुचित सुविधाओं की आवश्यकता को लेकर समाजसेवी एवं पत्रकार कृष्ण टंडन ने एक पहल शुरू की है। जिला अस्पताल के सामने टेंट लगाकर उन्होंने सर्वसुविधायुक्त बर्न यूनिट स्थापित किए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया है।
इस पहल के माध्यम से लोगों का ध्यान जिले में झुलसने अथवा आग से गंभीर रूप से घायल होने वाले मरीजों के उपचार की उपलब्ध सुविधाओं की ओर आकर्षित किया जा रहा है। मौके पर लगाए गए बैनर में 5 वर्षीय मासूम रियांशी की तस्वीर के साथ श्रद्धांजलि देते हुए बर्न यूनिट की आवश्यकता का संदेश दिया गया है।
मासूम रियांशी की मौत के बाद उठाया मुद्दा
अभियान में लगाए गए बैनर के अनुसार, 5 साल की मासूम रियांशी गर्म खीर से झुलस गई थी और इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई। इसी घटना को आधार बनाते हुए कृष्ण टंडन ने जिला अस्पताल जांजगीर-चांपा में सर्वसुविधायुक्त बर्न यूनिट स्थापित करने की मांग को जनहित का मुद्दा बनाया है।
बैनर पर लिखा गया है कि “इलाज के अभाव में आज एक बच्ची की जान गई है, कल कोई और भी हो सकता है?” इसके जरिए लोगों से यह सवाल भी उठाया गया है कि जिले में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को तत्काल और समुचित उपचार उपलब्ध कराने के लिए क्या पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है।

स्वैच्छिक सहयोग की भी अपील
कृष्ण टंडन द्वारा लगाए गए बैनर में बर्न यूनिट की स्थापना के लिए लोगों से स्वेच्छानुसार सहयोग राशि प्रदान करने की अपील की गई है। इसके जरिए इस मुद्दे को केवल प्रशासनिक मांग तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों को भी इससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में बर्न यूनिट क्यों जरूरी?
आग, गर्म पानी, गर्म तेल अथवा अन्य कारणों से झुलसने वाले मरीजों को तत्काल चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है। गंभीर रूप से जले मरीजों के लिए अलग उपचार व्यवस्था, प्रशिक्षित चिकित्सकीय एवं नर्सिंग स्टाफ, संक्रमण नियंत्रण, आवश्यक उपकरण और लगातार निगरानी जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण होती हैं।
ऐसे में जांजगीर-चांपा जिले में एक सर्वसुविधायुक्त बर्न यूनिट की स्थापना की मांग स्थानीय स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य सुविधा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन सकती है।
प्रशासन से उठ सकते हैं कई अहम सवाल
इस पहल के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि जिले में वर्तमान में झुलसे हुए मरीजों के लिए किस स्तर की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है, गंभीर मरीजों को किन परिस्थितियों में दूसरे अस्पतालों के लिए भेजा जाता है और जिला अस्पताल में पूर्ण सुविधायुक्त बर्न यूनिट स्थापित करने की दिशा में अब तक क्या प्रयास किए गए हैं।
कृष्ण टंडन की यह पहल इस बात को लेकर भी जनचर्चा पैदा कर रही है कि इलाज के अभाव या पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण किसी अन्य परिवार को अपने बच्चे या परिजन को न खोना पड़े।
नोट: रियांशी की मृत्यु और इलाज के अभाव से संबंधित तथ्य मौके पर लगाए गए बैनर में किए गए दावे पर आधारित हैं; इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि संबंधित स्वास्थ्य विभाग/अस्पताल के अभिलेखों से की जानी चाहिए।