
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ बने एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र, संभालेंगे मंदिर प्रशासन से लेकर सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्था तक की जिम्मेदारी
NTN REPORT// अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। भारतीय वायुसेना में लंबे और गौरवपूर्ण कार्यकाल के बाद अब एयर मार्शल मिश्र अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक एवं प्रबंधन संबंधी कार्यों की देखरेख करेंगे।

मंदिर के दैनिक प्रशासन की होगी जिम्मेदारी
सीईओ के रूप में जितेंद्र मिश्र मंदिर के दैनिक प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और कानूनी मामलों से जुड़े कार्यों की निगरानी करेंगे। ट्रस्ट के अधीन कार्य करते हुए उनकी प्रमुख जिम्मेदारी मंदिर की व्यवस्थाओं को प्रभावी, अनुशासित और सुचारु बनाए रखना होगी।
ट्रस्ट के अनुसार श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सीईओ की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। माना जा रहा है कि एयर मार्शल मिश्र का सैन्य अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और व्यापक प्रशासनिक अनुभव मंदिर की व्यवस्थाओं को और मजबूत करने में उपयोगी साबित होगा।
वायुसेना में रहा लंबा और शानदार कार्यकाल
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को फाइटर पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया था। अपने सैन्य करियर में उन्होंने 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव हासिल किया।
वे फाइटर कॉम्बैट लीडर के साथ-साथ प्रयोगात्मक परीक्षण पायलट भी रहे हैं। उनके करियर में लड़ाकू विमानों से संबंधित संचालन, परीक्षण और रणनीतिक जिम्मेदारियों का महत्वपूर्ण अनुभव रहा है।
वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख रह चुके हैं
जितेंद्र मिश्र ने 1 जनवरी 2025 से 30 अप्रैल 2026 तक भारतीय वायुसेना के वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (एओसी-इन-सी) के रूप में जिम्मेदारी संभाली। वेस्टर्न एयर कमांड भारतीय वायुसेना की सबसे महत्वपूर्ण परिचालन कमानों में से एक है।
उनके कार्यकाल के दौरान भारत की पश्चिमी सीमा से जुड़ी महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं परिचालन गतिविधियों की जिम्मेदारी उनके नेतृत्व में रही।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख थे। उन्होंने बाद में इस अभियान के दौरान अपनी भूमिका और भारतीय वायुसेना की कार्रवाई से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की थी।
उनके बारे में सामने आई जानकारी के अनुसार, उन्होंने एस-400 वायु रक्षा प्रणाली के जरिए 314 किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तानी एडब्ल्यूएसीएस को मार गिराने की मंजूरी दिए जाने का भी उल्लेख किया था।
देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने देश और विदेश के कई प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों में प्रशिक्षण एवं शिक्षा प्राप्त की है। वे नेशनल डिफेंस अकादमी, पुणे, एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, बेंगलुरु, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, अमेरिका और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, ब्रिटेन के पूर्व छात्र रहे हैं।
कई महत्वपूर्ण सैन्य पदों पर रहे
अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान जितेंद्र मिश्र ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। इनमें प्रमुख रूप से—
- डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशंस)
- एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट (एएसटीई) के कमांडेंट
- दो फ्रंटलाइन एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग
- फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर
- चीफ टेस्ट पायलट
जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल हैं।
तीन प्रमुख सैन्य सम्मानों से सम्मानित
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की सेवाओं को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित सैन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM), अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) प्रदान किए गए हैं।
देवरिया के भोपतपुरा गांव से है संबंध
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का संबंध उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भाटपार रानी थाना क्षेत्र के भोपतपुरा गांव से बताया जाता है। एक सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर भारतीय वायुसेना के शीर्ष पदों तक पहुंचने के बाद अब उन्हें अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी मिली है।
सैन्य अनुशासन का मंदिर प्रशासन में दिखेगा असर
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के सामने अब एक अलग तरह की चुनौती होगी। सैन्य क्षेत्र में रणनीतिक एवं परिचालन जिम्मेदारियां संभालने के बाद उन्हें अब करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े श्री राम मंदिर की दैनिक व्यवस्थाओं को संभालना होगा।
मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता, सुविधाओं के विस्तार और कानूनी मामलों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर उनकी प्रशासनिक क्षमता की परीक्षा होगी। ट्रस्ट को उम्मीद है कि उनका अनुभव और सैन्य अनुशासन मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।