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खेल

आईपीएल का ‘भारी मेकअप’ विदेशी दौरों पर उतर जाता है! इंग्लैंड में शर्मनाक हार के बाद संजय मांजरेकर ने चयन प्रक्रिया पर उठाए बड़े सवाल

NTN REPORT// नई दिल्ली। आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीतने के बाद भारतीय टीम से जिस दमदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी, वह विदेशी दौरों पर पूरी तरह टूटती नजर आई। पहले आयरलैंड के खिलाफ 0-2 और फिर इंग्लैंड के हाथों 0-4 से टी20 श्रृंखला गंवाने के बाद श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम इंडिया की रणनीति, चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बीच पूर्व भारतीय बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने हार के लिए सिर्फ खिलाड़ियों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय आईपीएल के मौजूदा स्वरूप और चयन नीति को कटघरे में खड़ा किया है।

प्रतीकात्मक एआई तस्वीर

मांजरेकर का मानना है कि आईपीएल की बल्लेबाजी के अनुकूल परिस्थितियां भारतीय बल्लेबाजों की वास्तविक तकनीकी क्षमता को छिपा देती हैं। सपाट पिचों, छोटी बाउंड्री और बड़े स्कोर वाले मुकाबलों में चमकने वाले बल्लेबाज जब विदेशों में स्विंग, सीम और अतिरिक्त उछाल वाली परिस्थितियों का सामना करते हैं तो उनकी तकनीकी कमजोरियां उजागर हो जाती हैं।

श्रेयस अय्यर की कप्तानी और मुख्य कोच गौतम गंभीर के नेतृत्व में भारतीय टीम का यह पहला बड़ा विदेशी दौरा था, लेकिन इंग्लैंड में मिली करारी हार ने टीम प्रबंधन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि संजय मांजरेकर का मानना है कि केवल खिलाड़ियों की आलोचना करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मांजरेकर ने लिखा कि विदेशी धरती पर मिली इस हार के लिए खिलाड़ियों को दोष देना सबसे आसान रास्ता है, लेकिन वास्तविक जिम्मेदारी उन लोगों की है जिन्होंने आईपीएल को इस तरह तैयार किया है कि वह भारतीय बल्लेबाजों की वास्तविक क्षमता पर “भारी मेकअप” चढ़ा देता है।

उन्होंने चयनकर्ताओं को भी महत्वपूर्ण सलाह देते हुए कहा कि अब केवल आईपीएल में बनाए गए रन या स्ट्राइक रेट के आधार पर खिलाड़ियों का चयन करने का दौर बदलना चाहिए। चयन प्रक्रिया में घरेलू क्रिकेट में निरंतर प्रदर्शन, मजबूत तकनीक और विदेशी परिस्थितियों में सफल होने की क्षमता को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि आने वाले समय में भारत को अधिक टी20 मुकाबले विदेशों में खेलने हैं, इसलिए केवल घरेलू परिस्थितियों के प्रदर्शन के आधार पर टीम तैयार करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।

‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम भी निशाने पर

आईपीएल का ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम भी एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गया है। आलोचकों का मानना है कि इस नियम ने वास्तविक ऑलराउंडरों के विकास की प्रक्रिया को प्रभावित किया है। अब टीमें आवश्यकता के अनुसार बल्लेबाज या गेंदबाज को बदल सकती हैं, जिससे ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत कम हो गई है जो बल्ले और गेंद दोनों से योगदान दे सकें।

पूर्व भारतीय विकेटकीपर पार्थिव पटेल भी इस नियम पर सवाल उठा चुके हैं। उनका मानना है कि ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम के कारण भारतीय क्रिकेट में गुणवत्तापूर्ण ऑलराउंडरों की संख्या घट रही है, क्योंकि फ्रेंचाइजी टीमों को ऐसे खिलाड़ियों को विकसित करने की आवश्यकता महसूस नहीं होती।

चयनकर्ताओं के सामने बड़ी चुनौती

इंग्लैंड दौरे की निराशाजनक हार के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती चयनकर्ताओं के सामने है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भारतीय टीम के चयन में केवल आईपीएल प्रदर्शन के बजाय घरेलू क्रिकेट में निरंतर सफलता, तकनीकी मजबूती और विदेशी परिस्थितियों में खुद को ढालने की क्षमता को प्राथमिकता देनी होगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो विदेशी दौरों पर भारतीय टीम को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

अब आगे का कार्यक्रम

इंग्लैंड के खिलाफ टी20 श्रृंखला में मिली हार के बाद भारतीय टीम अब वनडे श्रृंखला खेलेगी। इसके बाद 23 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 श्रृंखला के लिए जिम्बाब्वे का दौरा करेगी। इसी वर्ष भारत को न्यूजीलैंड में पांच टी20, पांच वनडे और दो टेस्ट मैचों की चुनौती का भी सामना करना है, जहां टीम की वास्तविक परीक्षा विदेशी परिस्थितियों में होगी।

अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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