
CGMSC घोटाला प्रकरण में बड़ी कार्रवाई: 550 करोड़ के नुकसान के मामले में तीन कारोबारी गिरफ्तार
NTN NEWS REPORT// रायपुर, 19 जनवरी 2026।
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित घोटाला प्रकरण में एंटी करप्शन ब्यूरो/आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई ब्यूरो में पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 05/2025 के तहत की गई है।
मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 13(1)(क), 13(2), 7(सी) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। जांच के बाद 18 जनवरी 2026 को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपी
- अभिषेक कौशल – डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि., पंचकूला
- राकेश जैन – प्रोप्राइटर, शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर
- प्रिंस जैन (शशांक चोपड़ा का जीजा) – लाइजनर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि.
निविदा प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का खुलासा
राज्य की आम जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला अस्पतालों, एफआरयू, सीएचसी, प्राथमिक एवं उप-स्वास्थ्य केंद्रों में “हमर लैब” योजना के तहत मेडिकल उपकरण एवं रिएजेंट्स की खरीदी के लिए CGMSC द्वारा ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी।
जांच में सामने आया कि रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि. तथा शारदा इंडस्ट्रीज ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निविदा प्रक्रिया में भाग लेकर मोहित कॉर्पोरेशन को टेंडर प्राप्त करने में सहयोग किया।
कार्टेलाइजेशन और मिलीभगत से प्रभावित हुई प्रतिस्पर्धा
विवेचना में यह भी तथ्य उजागर हुआ कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के उद्देश्य से कुछ फर्मों के बीच आपसी समन्वय और कार्टेलाइजेशन किया गया। टेंडर में यही तीन फर्में शॉर्टलिस्ट हुई थीं, जिनके वित्तीय दर खोले गए।
तीनों फर्मों द्वारा प्रस्तुत टेंडर दस्तावेजों में उत्पाद, पैक साइज, रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स का विवरण एक समान पैटर्न में भरा गया। जिन उत्पादों के नाम निविदा दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से अंकित नहीं थे, उन्हें भी समान रूप से दर्शाया गया। दरों का कोटेशन भी एक ही पैटर्न में किया गया, जिसमें सबसे कम दर मोहित कॉर्पोरेशन द्वारा तथा उसके बाद आरएमएस और शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा कोट की गई।
एमआरपी से तीन गुना अधिक कीमत पर आपूर्ति
इस मिलीभगत के परिणामस्वरूप मोहित कॉर्पोरेशन द्वारा CGMSC को एमआरपी से तीन गुना तक अधिक दरों पर रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति कर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया। इससे शासन को लगभग 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंची है।
आरोपियों को न्यायालय में पेश, पुलिस रिमांड
गिरफ्तार आरोपियों को 19 जनवरी 2026 को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें 27 जनवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
जांच जारी, आगे और कार्रवाई संभव
“हमर लैब” योजना से जुड़े शासकीय धन के दुरुपयोग के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय कर आगे भी संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।