
हर्बल गुलाल से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम, पलाश, चुकंदर और पालक से तैयार हो रहा रसायनमुक्त रंग
एनआरएलएम के तहत समूह की महिलाएं बन रहीं आर्थिक रूप से सशक्त
NTN REPORT// जांजगीर-चांपा, 26 फरवरी 2026। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत जनपद पंचायत बलौदा की ग्राम पंचायत नवापारा (ख) लेवई में संचालित नैना महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं हर्बल गुलाल निर्माण कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से तैयार यह गुलाल न केवल सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल है, बल्कि महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

प्राकृतिक संसाधनों से तैयार हो रहा सुरक्षित गुलाल
समूह की महिलाएं पलाश (टेसू) के फूलों से केसरिया रंग, पालक भाजी से हरा रंग तथा लाल भाजी और चुकंदर से लाल रंग तैयार कर रही हैं। इसके अलावा गुलाब, गेंदा और पलाश की पंखुड़ियों के साथ गुलाब जल और इत्र मिलाकर पूरी तरह रसायनमुक्त गुलाल बनाया जाता है।
यह गुलाल त्वचा, आंख और बालों के लिए सुरक्षित है। बाजार में उपलब्ध सिंथेटिक रंगों में हानिकारक रसायनों का मिश्रण होता है, जिससे त्वचा में जलन, एलर्जी और आंखों को नुकसान की आशंका रहती है। इसके विपरीत, समूह द्वारा तैयार किया जा रहा हर्बल गुलाल पूर्णतः इको-फ्रेंडली और चर्म-रोग मुक्त है।
गुणवत्ता और निरंतर प्रयास से मिल रहा आर्थिक लाभ
समूह की एफएलसीआरपी श्रीमती खिलेश्वरी नागरची ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से हर्बल गुलाल निर्माण का कार्य कर रही हैं। यह गुलाल त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और गुणवत्ता के कारण बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि तैयार उत्पाद को आसपास के बाजारों में विक्रय किया जा रहा है, जिससे समूह की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।
समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता भारद्वाज के नेतृत्व में लक्ष्मीन, सीता, विद्या कुर्रे, कुंती देवी, बबली मरावी, बीमा भाई, प्रतिभा, रवीना और कमला खुटे उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन का कार्य सामूहिक रूप से कर रही हैं।
आय बढ़ने से सुदृढ़ हुई आर्थिक स्थिति
हर्बल गुलाल निर्माण से प्राप्त आय से समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। महिलाएं अब अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यक खर्चों में सहयोग कर रही हैं।
नैना महिला स्व-सहायता समूह की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनकर उभर रही है। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा हर्बल गुलाल निर्माण का कार्य किया जा रहा है और स्थानीय बाजारों में इसके विक्रय की तैयारी की जा रही है।
इस प्रकार, एनआरएलएम के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं न केवल पारंपरिक त्योहारों को सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बना रही हैं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ा रही हैं।