अल नीनो का असर: जुलाई में कमजोर पड़ सकता है मानसून, खरीफ फसलों और अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट!
NTN REPORT// नई दिल्ली। देश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई महीने के लिए अपना पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति मजबूत होने के कारण जुलाई में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मानसून की यह सुस्ती खरीफ फसलों की बुआई और देश की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है।

IMD के मुताबिक जुलाई में बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के 94 फीसदी से कम रह सकती है। साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के अनुसार जुलाई में देश में औसतन करीब 280.4 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार इसके मुकाबले कम बारिश का अनुमान लगाया गया है।
100 साल में सबसे सूखे जून के बाद जुलाई पर भी संकट
इससे पहले जून महीने में भी देश में मानसून कमजोर रहा। जून में सामान्य से करीब 39 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई, जिससे यह साल 1901 के बाद अब तक का पांचवां सबसे सूखा जून बन गया।
मानसून की शुरुआत कमजोर रहने से देश के कई हिस्सों में खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई है, जिसका सीधा असर बुआई पर पड़ रहा है।
इन इलाकों में कम बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार मध्य भारत, पश्चिमी भारत और उत्तरी भारत के कई हिस्सों में जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
हालांकि कुछ क्षेत्रों में स्थिति बेहतर रह सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय इलाकों के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से ज्यादा बारिश होने का अनुमान है। वहीं पूर्वोत्तर भारत में अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक नमी और बारिश देखने को मिल सकती है।
खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित
कम बारिश का सबसे बड़ा असर खेती पर दिखाई दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस साल खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 23 फीसदी तक कम हुई है।
मिट्टी में नमी की कमी के कारण धान, दालें, सोयाबीन और कपास जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई है। किसानों को पर्याप्त बारिश का इंतजार है ताकि खेतों में नमी बनने के बाद बुआई की रफ्तार बढ़ सके।
बंगाल की खाड़ी से मिल सकती है राहत
मौसम वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनने से मानसून में कुछ सुधार हो सकता है। इसके अलावा अगस्त-सितंबर में पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल (IOD) बनने की संभावना भी जताई गई है, जिससे मानसून को मजबूती मिल सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अल नीनो लगातार मजबूत होता रहा तो मानसून की यह राहत ज्यादा लंबे समय तक नहीं टिक पाएगी।
महंगाई पर भी पड़ सकता है असर
जुलाई मानसून का सबसे अहम महीना माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान सीजन की बड़ी मात्रा में बारिश होती है। ऐसे में अगर बारिश कम रही तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसका असर खाद्य पदार्थों की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।