मोदी सरकार में जल्द हो सकता है पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार, नए चेहरों और सहयोगी दलों को मिल सकती है जगह
NTN REPORT// प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के तीसरे कार्यकाल में पहली बार मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार के स्तर पर अंदरूनी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और कई मंत्रियों के विभागों में बदलाव के साथ नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी मानसून सत्र से पहले या फिर 11 जुलाई के बाद कैबिनेट में बदलाव कर सकते हैं। प्रधानमंत्री के तीन देशों के दौरे से लौटने के बाद इस दिशा में फैसला होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
केंद्रीय सचिवों के साथ बैठक के बाद तेज हुई हलचल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को केंद्रीय सचिवों के साथ बैठक कर अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की थी। इस दौरान मंत्रालयों के प्रदर्शन, योजनाओं की प्रगति और तय लक्ष्यों की समीक्षा की गई।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस समीक्षा को संभावित कैबिनेट फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है। नए सिरे से जिम्मेदारियों के बंटवारे और मंत्रालयों के कामकाज को गति देने के लिए यह प्रक्रिया अहम मानी जा रही है।
मंत्रिमंडल में खाली हैं कई पद
वर्तमान में मोदी सरकार में प्रधानमंत्री समेत 72 मंत्री हैं। इनमें 30 कैबिनेट मंत्री, 5 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 36 राज्य मंत्री शामिल हैं।
लोकसभा की मौजूदा संख्या के आधार पर केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में करीब 9 पद पहले से खाली हैं। इसके अलावा कुछ मंत्रियों के प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी संभालने और इस्तीफे के बाद रिक्तियां बढ़ने की चर्चा है।
सूत्रों के अनुसार, विस्तार के दौरान खाली पदों को भरने के साथ कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है। वहीं, अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करने वाले कुछ चेहरों को हटाकर नए नेताओं को मौका मिलने की संभावना है।
पुराने सहयोगियों या नए समर्थकों को मिलेगा मौका?
संभावित विस्तार में सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा अपने पुराने सहयोगी दलों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देगी या हाल में सरकार के समर्थन में आए नए सांसदों को मंत्रिमंडल में शामिल करेगी।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एनडीए का समर्थन बढ़ने के बाद नए सहयोगी दलों के नेताओं को सरकार में जगह देकर राजनीतिक संदेश दिया जा सकता है।
आम आदमी पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं के भाजपा के साथ आने और शिवसेना (यूबीटी) से अलग हुए कुछ सांसदों के शिंदे गुट के साथ जाने के बाद गठबंधन का समीकरण बदला है। ऐसे में संभावित दावेदारों की संख्या बढ़ गई है।
सहयोगी दलों की बढ़ सकती है हिस्सेदारी
माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में एनडीए के सहयोगी दलों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
जद (यू), तेलुगु देशम पार्टी और शिवसेना जैसे सहयोगी दल अपने राजनीतिक प्रभाव के अनुसार हिस्सेदारी की उम्मीद कर रहे हैं। खासकर शिवसेना में नए राजनीतिक समीकरण बनने के बाद पार्टी की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
सरकार विस्तार के जरिए सहयोगियों को संतुलित रखने और गठबंधन को मजबूत करने की रणनीति अपना सकती है।
विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर होगा बदलाव
अगले वर्ष कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं।
इन चुनावी राज्यों के राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय संतुलन बनाया जा सकता है। जिन राज्यों में भाजपा को राजनीतिक मजबूती की जरूरत है, वहां से नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश से फिलहाल केंद्र में कई मंत्री हैं, जबकि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में क्षेत्रीय संतुलन पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
सामाजिक समीकरण भी रहेगा अहम मुद्दा
कैबिनेट विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को भी प्राथमिकता मिलने की संभावना है। भाजपा दलित, ओबीसी और अन्य सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम कर सकती है।
हालांकि, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे मंत्रियों का चयन करना होगा जो संगठनात्मक समीकरणों के साथ-साथ मंत्रालयों के कामकाज को भी प्रभावी ढंग से संभाल सकें।
माना जा रहा है कि इस विस्तार में अनुभव, प्रदर्शन और राजनीतिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाकर नई टीम तैयार की जा सकती है।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।