
NTN REPORT// लखनऊ/हरदोई, 30 अप्रैल 2026।
उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे को नई रफ्तार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई में देश की सबसे बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेस वे उद्घाटन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

करीब 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से मेरठ से प्रयागराज की दूरी अब महज 6 घंटे में तय की जा सकेगी, जिससे पूर्व और पश्चिम उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आएगा।
विकास की नई धुरी बना गंगा एक्सप्रेसवे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे “प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़” बताते हुए कहा कि 2021 में शुरू हुई यह परियोजना अब जमीन पर उतर चुकी है और उत्तर प्रदेश को तेज आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब करीब 4 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क तैयार हो चुका है, जो गांव से लेकर शहर तक विकास की नई कहानी लिख रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इसे “उत्तर प्रदेश की नई लाइफलाइन” बताते हुए कहा कि यह एक्सप्रेसवे सिर्फ दूरी ही नहीं घटाएगा, बल्कि समय, लागत और अवसरों के बीच की खाई भी कम करेगा।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
गंगा एक्सप्रेसवे का एक बड़ा प्रभाव धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन पर भी पड़ेगा। यह मार्ग कई प्रमुख तीर्थ स्थलों को आसान पहुंच से जोड़ता है, जैसे—
- त्रिवेणी संगम
- काशी विश्वनाथ मंदिर
- गढ़मुक्तेश्वर (गढ़गंगा)
- कल्कि धाम (संभल)
- बेल्हा देवी धाम (प्रतापगढ़)
- चंद्रिका देवी शक्तिपीठ
अब दिल्ली और पश्चिम यूपी से आने वाले श्रद्धालु इन स्थानों तक कम समय में आसानी से पहुंच सकेंगे।
पांच प्रमुख आध्यात्मिक कॉरिडोर को जोड़ेगा
यह एक्सप्रेसवे प्रदेश में विकसित हो रहे कई बड़े स्पिरिचुअल कॉरिडोर को मजबूती देगा—
- प्रयागराज–विंध्याचल–काशी कॉरिडोर
- प्रयागराज–अयोध्या–गोरखपुर कॉरिडोर
- प्रयागराज–लखनऊ–नैमिषारण्य कॉरिडोर
- प्रयागराज–चित्रकूट कॉरिडोर
इन मार्गों से रामायण, शिव और शक्ति परंपरा से जुड़े तीर्थों तक पहुंच और आसान होगी।
जैन और बौद्ध तीर्थों को भी लाभ
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ हिंदू धार्मिक स्थलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य आस्थाओं को भी जोड़ता है—
- हस्तिनापुर– जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ
- सारनाथ– जहां भगवान बुद्ध ने पहली शिक्षा दी
इससे जैन और बौद्ध पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के समग्र विकास का इंजन बनकर उभरा है।
यह परियोजना जहां यात्रा समय कम करेगी, वहीं आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों को नई दिशा देगी।
सरकार के मुताबिक, आने वाले समय में यह एक्सप्रेसवे प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक कनेक्टिविटी के नए स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।