NTN NEWS REPORT// वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने तय कार्यक्रम के अनुसार गर्भगृह में करीब 30 मिनट तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान पंच पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरे अनुष्ठान को संपन्न कराया।

वैदिक मंत्रों के बीच भव्य स्वागत
प्रधानमंत्री के मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही पूरा वातावरण वेदमंत्रों से गूंज उठा। मुख्य द्वार पर 108 बटुकों ने शंखनाद कर उनका स्वागत किया, जबकि पुजारियों ने पंक्तिबद्ध होकर डमरू वादन किया। शुद्धिकरण मंत्रों के साथ पीएम को पूजा के लिए तैयार कराया गया।
षोडशोपचार विधि से किया पूजन
गर्भगृह में पहुंचकर पीएम मोदी ने बाबा विश्वनाथ के ज्योतिर्लिंग के समक्ष बैठकर षोडशोपचार पद्धति से पूजा की। इस दौरान उन्होंने:
- गंगाजल, दूध, हल्दी जल और अक्षत से अभिषेक किया
- मंदार माला अर्पित की
- पंचदीप से आरती की
- प्रदक्षिणा कर विधिवत पूजा पूर्ण की
पूजन के दौरान पुजारियों ने उनके मस्तक पर चंदन लेपन और त्रिपुंड लगाया तथा मंत्रोच्चार के बीच माला पहनाई।
त्रिशूल-डमरू भेंट, हवा में लहराया त्रिशूल
पूजा के बाद मंदिर परिसर में भाजपा नेताओं और पुजारियों ने प्रधानमंत्री को त्रिशूल, डमरू और मंदिर की प्रतिकृति भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने त्रिशूल उठाकर हवा में लहराया, जिसे राजनीतिक हलकों में अलग-अलग संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।
14 किलोमीटर लंबा रोड शो, जगह-जगह स्वागत
मंदिर पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री ने वाराणसी में करीब 14 किलोमीटर लंबा रोड शो किया। इस दौरान:
- भाजपा कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों पर झूमते नजर आए
- जगह-जगह फूलों की वर्षा की गई
- पीएम ने हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया
हालांकि, वह कहीं रुके बिना सीधे मंदिर पहुंचे।
बच्चों से मुलाकात, संवाद भी किया
पूजा-अर्चना के बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर में मौजूद बच्चों से मुलाकात की और उनसे बातचीत भी की।
चुनावी समय में दौरे के मायने
गौरतलब है कि पीएम मोदी का यह दौरा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान के बीच हुआ है। ऐसे में काशी में उनकी धार्मिक उपस्थिति और त्रिशूल लहराने की तस्वीरों को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।