8वां वेतन आयोग: 55 रुपये से 18,000 रुपये तक ऐसे बढ़ी केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी, 3.83 फिटमेंट फैक्टर हुआ तो 69 हजार के पार पहुंच सकती है न्यूनतम बेसिक पे!
8वां वेतन आयोग: 55 रुपये से 18,000 रुपये तक ऐसे बढ़ी केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी, 3.83 फिटमेंट फैक्टर हुआ तो 69 हजार के पार पहुंच सकती है न्यूनतम बेसिक पे!
NTN REPORT// केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी का सफर: देश में पहला केंद्रीय वेतन आयोग 1946-47 में सामने आया था। तब न्यूनतम वेतन महज 55 रुपये और अधिकतम 2,000 रुपये था। सातवें वेतन आयोग तक पहुंचते-पहुंचते न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर 18,000 रुपये हो गया। अब 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों में उम्मीदें बढ़ी हुई हैं। कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, यह मांग अभी सरकार या आयोग द्वारा मंजूर नहीं की गई है।

8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को क्या उम्मीद?
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पेंशन तथा भत्तों की समीक्षा के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में आयोग के कार्यक्षेत्र और कामकाज की शर्तों को मंजूरी दी थी। आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय दिया गया है।
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी शामिल है। कई कर्मचारी संगठन इसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग कर रहे हैं। ध्यान रखना जरूरी है कि 3.83 अभी कर्मचारियों की मांग है, यह 8वें वेतन आयोग का आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर नहीं है।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिसका इस्तेमाल पुराने मूल वेतन को संशोधित वेतन संरचना में बदलने के लिए किया जाता है। सरल शब्दों में कहा जाए तो फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, संशोधित मूल वेतन उतना ही अधिक हो सकता है।
7वें केंद्रीय वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। सरकार ने 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते समय न्यूनतम वेतन को 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह किया था।
3.83 फिटमेंट फैक्टर हुआ तो कितनी होगी बेसिक सैलरी?
अगर भविष्य में 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की मांग के मुताबिक 3.83 फिटमेंट फैक्टर स्वीकार किया जाता है और गणना को केवल 18,000 रुपये की मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे पर लागू किया जाए, तो गणित इस प्रकार होगा—
18,000 × 3.83 = 68,940 रुपये
यानी इस अनुमान के आधार पर न्यूनतम मूल वेतन 68,940 रुपये प्रति माह तक पहुंच सकता है।
हालांकि, यह केवल अनुमानित गणना है। वास्तविक वेतन कितना बढ़ेगा, यह 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों, सरकार के निर्णय और लागू किए जाने वाले वेतन ढांचे पर निर्भर करेगा।
पहले से सातवें वेतन आयोग तक कितना बढ़ा न्यूनतम वेतन?
केंद्र सरकार के 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट में पिछले वेतन आयोगों के वेतन ढांचे का विस्तृत ऐतिहासिक विवरण दिया गया है। उसके अनुसार न्यूनतम और अधिकतम वेतन में इस तरह बदलाव हुआ—
| वेतन आयोग | प्रभावी अवधि | न्यूनतम मूल वेतन | अधिकतम मूल वेतन |
|---|---|---|---|
| पहला वेतन आयोग | 1946-47 | ₹55 | ₹2,000 |
| दूसरा वेतन आयोग | 1957-59 | ₹80 | ₹3,000 |
| तीसरा वेतन आयोग | 1972-73 | ₹196 | ₹3,500 |
| चौथा वेतन आयोग | 1983-86 | ₹750 | ₹8,000 |
| पांचवां वेतन आयोग | 1994-97 | ₹2,550 | ₹26,000 |
| छठा वेतन आयोग | 2006-08 | ₹7,000 | ₹80,000 |
| सातवां वेतन आयोग | 2016 से | ₹18,000 | ₹2.5 लाख |
पहला वेतन आयोग कब आया था?
भारत में पहला केंद्रीय वेतन आयोग 1946-47 में गठित/प्रभावी हुआ था। उस समय सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन 55 रुपये प्रति माह और अधिकतम वेतन 2,000 रुपये प्रति माह निर्धारित किया गया था। यह आंकड़ा केंद्र सरकार के 7वें वेतन आयोग की आधिकारिक रिपोर्ट में दर्ज है।
इसके बाद प्रत्येक वेतन आयोग के साथ वेतन संरचना में बदलाव होता गया और न्यूनतम मूल वेतन में भी लगातार बढ़ोतरी हुई।
दूसरे वेतन आयोग में 80 रुपये हुआ न्यूनतम वेतन
दूसरे वेतन आयोग के बाद न्यूनतम वेतन 55 रुपये से बढ़कर 80 रुपये प्रति माह हो गया। अधिकतम वेतन भी 2,000 रुपये से बढ़कर 3,000 रुपये हुआ।
तीसरे वेतन आयोग में 196 रुपये पहुंची बेसिक पे
तीसरे वेतन आयोग के प्रभाव के बाद न्यूनतम मूल वेतन 196 रुपये और अधिकतम मूल वेतन 3,500 रुपये निर्धारित किया गया।
चौथे वेतन आयोग में बड़ा उछाल
चौथे वेतन आयोग के दौरान न्यूनतम मूल वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। यह 750 रुपये प्रति माह हो गया, जबकि अधिकतम मूल वेतन बढ़कर 8,000 रुपये पहुंच गया।
पांचवें वेतन आयोग में 2,550 रुपये हुआ न्यूनतम वेतन
पांचवें वेतन आयोग के बाद न्यूनतम मूल वेतन 2,550 रुपये और अधिकतम मूल वेतन 26,000 रुपये निर्धारित किया गया। इस चरण में वेतन संरचना में फिटमेंट व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण इस्तेमाल हुआ।
छठे वेतन आयोग में 7,000 रुपये पहुंची बेसिक पे
2006 में लागू छठे वेतन आयोग के बाद न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये कर दिया गया। अधिकतम मूल वेतन बढ़कर 80,000 रुपये हो गया।
सातवें वेतन आयोग में 18,000 रुपये हुई न्यूनतम बेसिक सैलरी
सातवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव किया। इसमें 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया और न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये तय हुआ। अधिकतम मूल वेतन 2.5 लाख रुपये निर्धारित किया गया।
8वें वेतन आयोग में क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वें वेतन आयोग में न्यूनतम मूल वेतन कितना तय किया जाएगा। कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर 3.83 करने की मांग की जा रही है। अगर यह मांग स्वीकार होती है और 18,000 रुपये की मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे पर सीधे 3.83 का गुणांक लगाया जाता है, तो अनुमानित बेसिक पे 68,940 रुपये बनती है।
लेकिन इसे अभी अंतिम वेतन या सरकारी घोषणा नहीं माना जा सकता। 8वें वेतन आयोग को वेतन, भत्तों, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े विषयों पर सिफारिशें देनी हैं। अंतिम बदलाव सरकार द्वारा आयोग की सिफारिशों पर निर्णय लेने के बाद ही स्पष्ट होगा।
55 रुपये से 68,940 रुपये तक का सफर!
अगर 1946-47 के पहले वेतन आयोग के 55 रुपये के न्यूनतम वेतन से तुलना करें तो सातवें वेतन आयोग तक न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये हो चुका है। वहीं 8वें वेतन आयोग में 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग स्वीकार होने पर ऊपर बताए गए अनुमान के अनुसार यह आंकड़ा 68,940 रुपये तक पहुंच सकता है।
हालांकि, कर्मचारियों को वास्तविक राहत केवल मूल वेतन से नहीं, बल्कि महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, परिवहन भत्ता, पेंशन और अन्य संशोधित लाभों से भी मिलेगी। इसलिए 8वें वेतन आयोग के बाद वास्तविक कुल वेतन का आकलन आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार के निर्णय के बाद ही किया जा सकेगा।
8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, लेकिन फिलहाल 3.83 फिटमेंट फैक्टर और 68,940 रुपये न्यूनतम बेसिक पे को संभावित आंकड़ा ही माना जाना चाहिए। इसे अभी आधिकारिक वेतनमान नहीं कहा जा सकता।
स्रोत: भारत सरकार, वित्त मंत्रालय/व्यय विभाग एवं 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की रिपोर्ट।
अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।