जेन अल्फा का बढ़ता आक्रोश: स्कूलों की बदहाली, टूटी सड़कों और अव्यवस्थाओं के खिलाफ चार शहरों में बच्चों का प्रदर्शन
नरसिंहपुर में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे स्कूली बच्चे, उज्जैन में स्कूल शिफ्टिंग का फैसला टला; उन्नाव में शिक्षकों और भोजन की व्यवस्था पर सवाल, महोबा में सड़क जाम के दौरान पुलिस पर बदसलूकी का आरोप
NTN REPORT// देश के अलग-अलग हिस्सों में स्कूली बच्चों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज होता दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बच्चों ने स्कूलों की बदहाल व्यवस्था, शिक्षकों की कमी, खराब सड़कों, जलभराव, आवागमन और भोजन जैसी समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने अपनी आवाज उठाई। बुधवार को नरसिंहपुर, उज्जैन और उन्नाव में बच्चों के प्रदर्शन ने खासा ध्यान खींचा, जबकि महोबा में स्कूली बच्चों के सड़क पर उतरने और पुलिस पर कथित बदसलूकी के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया।

नरसिंहपुर में स्कूल जाने की सड़क के लिए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे बच्चे
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के रम्पुरा गांव के स्कूली बच्चों ने खराब सड़क की समस्या को लेकर अनोखे तरीके से अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाई। रोज की तरह बच्चे स्कूल जाने के लिए तैयार हुए, लेकिन इस बार वे स्कूल जाने के बजाय सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए।
बताया गया कि रम्पुरा गांव के बच्चे करीब तीन किलोमीटर दूर केरपानी गांव स्थित स्कूल में पढ़ने जाते हैं। बारिश के मौसम में रम्पुरा से केरपानी तक का रास्ता बेहद खराब हो जाता है। सड़क पर कीचड़ और जलभराव के कारण बच्चों को स्कूल पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बच्चों ने अधिकारियों को अपनी समस्या बताते हुए सड़क निर्माण की मांग की। बच्चों का कहना था कि रास्ता खराब होने के कारण बारिश के दिनों में उनके जूते और कपड़े खराब हो जाते हैं तथा फिसलने और गिरने का खतरा बना रहता है।
बच्चों ने सड़क की बदहाली से संबंधित वीडियो भी अधिकारियों को दिखाए और मांग की कि रम्पुरा से केरपानी तक सड़क का निर्माण या सुधार कराया जाए, ताकि वे नियमित रूप से स्कूल पहुंच सकें।
उज्जैन में छात्राओं के विरोध के बाद स्कूल शिफ्टिंग का फैसला टला
मध्य प्रदेश के उज्जैन में शासकीय सराफा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को दूसरी जगह स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव का छात्राओं ने जोरदार विरोध किया था। छात्राओं ने स्कूल शिफ्टिंग के खिलाफ कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखी थीं।
छात्राओं का कहना था कि स्कूल को दाऊदखेड़ी स्थित सांदीपनि विद्यालय में स्थानांतरित या विलय करने से उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे आवागमन और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचने के बाद उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जब तक उचित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, तब तक छात्राओं की पढ़ाई वर्तमान सराफा विद्यालय भवन में ही जारी रखी जाए।
इसके बाद उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया, नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव, विधायक अनिल जैन और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह सराफा विद्यालय पहुंचे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं।
कलेक्टर ने छात्राओं को आश्वासन दिया कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक उनकी पढ़ाई वर्तमान भवन में ही जारी रहेगी। प्रशासन ने शिक्षा, सुरक्षा और सुगम आवागमन को प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्नाव में शिक्षकों और भोजन की व्यवस्था को लेकर बच्चों का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के मोहान क्षेत्र में भी स्कूली बच्चों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय न्योतनी में पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चों ने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई।
बच्चों का आरोप है कि विद्यालय में पर्याप्त संख्या में शिक्षक नहीं हैं। इसके अलावा विद्यालय में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। बच्चों का कहना था कि उन्हें ठीक भोजन नहीं मिल रहा, जिसके चलते उन्हें स्कूल परिसर से बाहर निकलकर प्रदर्शन करना पड़ा।
बच्चों के प्रदर्शन के कारण मोहान-अजगैन मुख्य चौराहे पर जाम की स्थिति बन गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे।
मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक समेत अधिकारियों ने बच्चों की समस्याएं सुनीं और उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस दौरान समाजवादी पार्टी की एक स्थानीय नेता भी मौके पर पहुंचीं और स्कूल गेट के बाहर धरने पर बैठ गईं।
महोबा में खराब सड़क और जलभराव के खिलाफ हाईवे पर बैठे बच्चे
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में स्कूली बच्चों का प्रदर्शन सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। रैपुरा कलां गांव के बच्चों ने खराब सड़क, जलभराव और स्कूल आने-जाने में हो रही परेशानी के खिलाफ झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर जाम लगा दिया।
बारिश के बीच बच्चों का यह प्रदर्शन करीब तीन घंटे तक चला। जाम के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
प्रदर्शनकारी बच्चों का कहना था कि रैपुरा कलां गांव को जोड़ने वाला करीब तीन किलोमीटर लंबा रास्ता बेहद खराब है। जगह-जगह गड्ढे, जलभराव और सड़क की खुदाई के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बच्चों का आरोप है कि इस रास्ते पर संचालित कुछ दाल मिलों के भारी वाहनों की आवाजाही और मिलों से निकलने वाले गंदे पानी के कारण सड़क की स्थिति और खराब हो गई है। ग्रामीणों और बच्चों का दावा है कि इस समस्या को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस पर बच्चों को घसीटकर हटाने का आरोप
महोबा में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रदर्शनकारी बच्चों का आरोप है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें समझाने के बजाय सड़क से हटाने के लिए कथित तौर पर बल प्रयोग किया।
प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में है। आरोप लगाया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों ने कुछ बच्चों को सड़क से घसीटकर हटाया। छात्राओं द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताने की बात भी सामने आई है।
हालांकि, पुलिस की कार्रवाई और बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। पूरे मामले में प्रशासनिक जांच या आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
बुनियादी सुविधाओं को लेकर बच्चों की आवाज बनी चर्चा का विषय
नरसिंहपुर से लेकर उज्जैन, उन्नाव और महोबा तक सामने आए इन मामलों में बच्चों की मांगों का स्वरूप अलग-अलग है, लेकिन सभी मामलों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल प्रमुख हैं।
कहीं बच्चे स्कूल तक पहुंचने के लिए खराब सड़क से परेशान हैं, कहीं स्कूल स्थानांतरण को लेकर सुरक्षा और आवागमन की चिंता है, तो कहीं शिक्षकों और भोजन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। महोबा में तो खराब सड़क और जलभराव के विरोध में बच्चों को हाईवे पर उतरना पड़ा।
इन घटनाओं ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि जिन बच्चों को नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर पढ़ाई करनी चाहिए, उन्हें अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए सड़कों पर उतरने की नौबत क्यों आ रही है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है। महोबा में पुलिस कार्रवाई और अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।