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राजनीति

तावड़े बने बीजेपी के ‘संकटमोचक’, 2027 यूपी चुनाव की कमान

NTN REPORT// नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक फेरबदल के तहत राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बिहार में संगठन और गठबंधन प्रबंधन का अनुभव रखने वाले तावड़े के सामने अब उत्तर प्रदेश में पार्टी के संगठन को मजबूत करने, सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय बनाने तथा चुनावी रणनीति को धार देने की बड़ी चुनौती होगी।

प्रतीकात्मक एआई तस्वीर

महाराष्ट्र की राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर तय करने वाले विनोद तावड़े को बीजेपी के कुशल संगठनकर्ता और चुनावी प्रबंधन में माहिर नेताओं में गिना जाता है। खास बात यह है कि 2019 के विधानसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन तावड़े ने सार्वजनिक नाराजगी जाहिर करने के बजाय संगठन में सक्रिय भूमिका निभाना जारी रखा। यही धैर्य आगे चलकर उनके राजनीतिक कमबैक की वजह बना।

एबीवीपी से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

विनोद तावड़े का जन्म 20 जुलाई 1963 को मुंबई के गिरगांव इलाके में हुआ। उन्होंने साठे कॉलेज से पढ़ाई की और छात्र जीवन के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से शुरुआती जुड़ाव और एबीवीपी में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में काम करने के दौरान उन्होंने संगठन निर्माण और युवाओं को जोड़ने की बारीकियां सीखीं। प्रमोद महाजन, नितिन गडकरी और गोपीनाथ मुंडे जैसे नेताओं के साथ काम करने का भी उन्हें अनुभव मिला।

1980 के दशक में तावड़े ने एबीवीपी में सक्रिय भूमिका निभाई और 1988 में संगठन के राष्ट्रीय महासचिव बने। छात्र आंदोलनों और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी ने उन्हें महाराष्ट्र भाजपा में आगे बढ़ने का रास्ता दिया।

महाराष्ट्र बीजेपी में तेजी से बढ़ा कद

1990 के दशक में विनोद तावड़े को महाराष्ट्र बीजेपी में संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिलीं। 1995 में उन्हें राज्य महासचिव बनाया गया। इसके बाद 1999 में उन्होंने मुंबई बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली और इस पद पर पहुंचने वाले सबसे कम उम्र के नेताओं में शामिल हुए।

2002 में उन्हें महाराष्ट्र विधान परिषद का सदस्य बनाया गया। 2011 में वे विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बने और विपक्ष की भूमिका निभाई।

2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें बोरीवली विधानसभा सीट से मैदान में उतारा। चुनाव जीतकर वे पहली बार विधानसभा पहुंचे। महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद उन्हें स्कूली शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा और संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली।

2019 में टिकट कटा, खत्म माना जाने लगा राजनीतिक अध्याय

विनोद तावड़े के राजनीतिक सफर में सबसे बड़ा झटका 2019 के विधानसभा चुनाव में लगा, जब पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। उस समय उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गईं और माना जाने लगा कि महाराष्ट्र की सक्रिय राजनीति में उनका प्रभाव कम हो गया है।

हालांकि तावड़े ने सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर करने के बजाय संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी। उन्होंने पार्टी में काम करना जारी रखा और इसी दौरान उनकी संगठनात्मक क्षमता का राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी इस्तेमाल किया।

‘वनवास’ के बाद राष्ट्रीय राजनीति में दमदार वापसी

2019 के बाद विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर महाराष्ट्र से दिल्ली की ओर बढ़ा। उन्हें बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिली और वे तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम का हिस्सा बने।

2021 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। इसके बाद उन्हें हरियाणा का प्रभारी बनाया गया। संगठनात्मक कामकाज और चुनावी प्रबंधन में लगातार बेहतर प्रदर्शन के चलते पार्टी नेतृत्व का उन पर भरोसा बढ़ता गया।

यही वह दौर था जब तावड़े ने यह साबित किया कि विधानसभा का टिकट नहीं मिलने के बावजूद संगठन में लगातार काम करके राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत वापसी की जा सकती है।

चुनावी प्रबंधन में बनाई अलग पहचान

विनोद तावड़े को बीजेपी के चुनावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं में माना जाता है। 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के चुनाव अभियान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। उपराष्ट्रपति चुनाव में भी उन्होंने पार्टी की रणनीति को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।

इसके बाद 2022 में उन्हें बिहार का प्रभारी बनाया गया। बिहार में बीजेपी और सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे, संगठनात्मक तालमेल और चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।

बिहार में उनके कार्यकाल के दौरान गठबंधन की राजनीति को संभालने और पार्टी के संगठन को मजबूत करने के अनुभव ने उनकी राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक हैसियत को और मजबूत किया।

बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी चुनौती

बिहार के बाद अब बीजेपी ने विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है। उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में तावड़े की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना होगी। इसके साथ ही 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी संगठन और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा पैदा करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है।

गैर-यादव ओबीसी और पारंपरिक वोट बैंक पर नजर

उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए गैर-यादव पिछड़ा वर्ग, पारंपरिक समर्थक वर्ग और विभिन्न सामाजिक समीकरण चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में तावड़े को संगठन के विस्तार के साथ सामाजिक समीकरणों को साधने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

उनकी संगठनात्मक पृष्ठभूमि को देखते हुए पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि वे अलग-अलग सामाजिक समूहों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेंगे।

सदस्यता अभियान में भी दिखा संगठनात्मक कौशल

विनोद तावड़े को बीजेपी के संगठन पर्व 2024 के तहत राष्ट्रीय सदस्यता अभियान की जिम्मेदारी भी दी गई थी। पार्टी के सदस्यता विस्तार अभियान में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। उत्तर प्रदेश में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया में भी उन्होंने संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाली।

यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व ने अब उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की कमान सौंपी है।

2027 के लिए तावड़े के सामने क्या होंगी प्रमुख चुनौतियां?

उत्तर प्रदेश प्रभारी के तौर पर विनोद तावड़े के सामने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी—

  • 2027 विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत संगठनात्मक रणनीति तैयार करना।
  • सरकार और पार्टी संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
  • जमीनी स्तर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा पैदा करना।
  • सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को मजबूत करना।
  • गैर-यादव ओबीसी और पारंपरिक समर्थक वर्ग के बीच पार्टी की पकड़ बनाए रखना।
  • विपक्ष की चुनावी रणनीति का प्रभावी तरीके से मुकाबला करना।
  • बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय और मजबूत बनाना।

साइडलाइन से सत्ता के केंद्र तक पहुंचने की कहानी

विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर बीजेपी की संगठनात्मक राजनीति का एक अलग उदाहरण माना जा सकता है। 2019 में विधानसभा टिकट कटने के बाद जहां उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठे, वहीं कुछ वर्षों के भीतर उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव के रूप में अपनी जगह मजबूत कर ली।

महाराष्ट्र की राजनीति से निकलकर हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक और संगठनात्मक कौशल की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश की सत्ता बनाए रखना और संगठन को मजबूत करना बड़ी प्राथमिकता है। ऐसे में विनोद तावड़े को ‘संकटमोचक’ की भूमिका में उतारना पार्टी की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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