
सखी वन स्टॉप सेंटर भवन निर्माण में गंभीर लापरवाही, बिना इंजीनियर और मानक सामग्री के चल रहा कार्य
महिला एवं बाल विकास विभाग जांजगीर का महत्वपूर्ण भवन एक माह से केवल लेबर-मिस्त्री के भरोसे
NTN NEWS REPORT// महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत जांजगीर में निर्माणाधीन सखी वन स्टॉप सेंटर भवन के कार्य में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। निर्माण स्थल पर लगाए गए सूचना बोर्ड के अनुसार कार्य प्रारंभ हुए लगभग एक माह का समय व्यतीत हो चुका है, लेकिन नियमानुसार आज दिनांक तक निर्माण स्थल पर ठेकेदार द्वारा न तो कोई डिग्रीधारी और न ही डिप्लोमाधारी इंजीनियर की नियुक्ति की गई है।
जानकारी के अनुसार यह भवन महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाना है, जहां पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे सुरक्षा, परामर्श एवं सहायता उपलब्ध कराई जानी है। ऐसे महत्वपूर्ण भवन के निर्माण में तकनीकी निगरानी का अभाव गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
मानक सामग्री के उपयोग पर भी सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप सामने आए हैं कि निर्माण कार्य में मानक गुणवत्ता की सामग्रियों का उपयोग नहीं किया जा रहा है। पूरा कार्य केवल लेबर और मिस्त्री के भरोसे संचालित किया जा रहा है, जो कि शासन द्वारा निर्धारित निर्माण नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। नियमों के अनुसार ठेकेदार को निर्माण स्थल पर योग्य तकनीकी स्टाफ की तैनाती अनिवार्य रूप से करनी होती है, ताकि कार्य की गुणवत्ता और संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
साइड इंजीनियर ने लिया संज्ञान, वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा पत्र
मामले की जानकारी जब विभागीय स्तर पर दी गई, तब साइड इंजीनियर हरविलाश बरेठ द्वारा तत्परता दिखाते हुए ठेकेदार की लापरवाही को गंभीरता से लिया गया। साइड इंजीनियर द्वारा ठेकेदार के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही किए जाने संबंधी पत्र वरिष्ठ अधिकारियों को प्रेषित कर दिया गया है तथा कार्य की स्थिति से उन्हें अवगत कराया गया है।
भवन की गुणवत्ता पर मंडराया खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि इंजीनियर की अनुपस्थिति में किए जा रहे निर्माण से भवन की गुणवत्ता, मजबूती और दीर्घकालिक उपयोगिता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ठेकेदार की इस लापरवाही से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि भविष्य में यह भवन अपने उद्देश्य पर कितना खरा उतर पाएगा।
अब विभागीय कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महिला एवं बाल विकास विभाग तथा संबंधित निर्माण एजेंसी इस गंभीर मामले में कितनी शीघ्रता से ठोस कदम उठाती है और नियमों की अनदेखी करने वाले ठेकेदार के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल सखी वन स्टॉप सेंटर जैसे संवेदनशील भवन के निर्माण को लेकर जिले में सवाल और चर्चाएं तेज हो गई हैं।