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भारतव्यापार जगत

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत का प्लान-बी सफल, रूसी तेल खरीद में 21% का उछाल; दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना भारत

NTN REPORT// नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया भर में तेल और गैस आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। ऐसे समय में भारत सरकार की वैकल्पिक ऊर्जा रणनीति यानी प्लान-बी ने मजबूती दिखाई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद लगातार बढ़ाई है और मई महीने में भी वह रूसी तेल का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा।

प्रतीकात्मक एआई तस्वीर

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में भारत ने रूस से करीब 5.8 अरब यूरो (लगभग 6.7 अरब डॉलर) मूल्य के हाइड्रोकार्बन का आयात किया। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का रहा, जिसकी हिस्सेदारी करीब 83 फीसदी रही और इसका मूल्य लगभग 4.8 अरब यूरो बताया गया है।

रूसी कच्चे तेल के आयात में 21% बढ़ोतरी

CREA रिपोर्ट के अनुसार, मई महीने में भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में 21 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसके चलते भारत के कुल कच्चे तेल आयात में महीने-दर-महीने करीब 8 फीसदी का इजाफा हुआ।

भारतीय रिफाइनरियों में रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति भी तेज हुई है। गुजरात स्थित वडीनार रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल की आवक अप्रैल की तुलना में 36 फीसदी बढ़ी, जबकि जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में इसकी सप्लाई में 14 फीसदी की तेजी आई।

सरकारी रिफाइनरियों ने भी बढ़ाई खरीद

रूस से तेल खरीद बढ़ाने में सरकारी रिफाइनरियों की भूमिका भी अहम रही है। न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल का आयात दोबारा शुरू करने के बाद खरीद में तेजी दिखाई है।

मई महीने में:

  • न्यू मैंगलोर रिफाइनरी की रूसी तेल आपूर्ति में 13 फीसदी वृद्धि हुई।
  • विशाखापत्तनम रिफाइनरी में रूसी तेल की खरीद 42 फीसदी बढ़ी
  • ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी ने भी पिछले दो वर्षों में सबसे ज्यादा रूसी तेल खरीदा।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ी भारत की भूमिका

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच भारत रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार बनकर उभरा। भारतीय रिफाइनरियों ने सस्ते रूसी तेल का इस्तेमाल कर घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की।

रूसी तेल से बने उत्पादों का निर्यात भी जारी

CREA की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत, तुर्की, ब्रुनेई और जॉर्जिया की कुछ रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल को प्रोसेस कर प्रतिबंध लगाने वाले देशों को करीब 641 मिलियन यूरो मूल्य के तेल उत्पादों का निर्यात किया।

अमेरिका को होने वाले निर्यात में रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी समेत कुछ विदेशी रिफाइनरियों की भूमिका बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बीते तीन महीनों में जामनगर रिफाइनरी के फीडस्टॉक का करीब 15 फीसदी हिस्सा रूसी तेल से आया।

वैश्विक संकट के बीच भारत की ऊर्जा रणनीति मजबूत

मिडिल ईस्ट में तनाव, सप्लाई जोखिम और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाई है। रूसी तेल की बढ़ती खरीद को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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