
मनरेगा बचाओ संघर्ष को लेकर जांजगीर में प्रेस वार्ता, केंद्र सरकार के प्रस्तावित बदलावों पर जताई आपत्ति
NTN NEWS REPORT// जांजगीर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर चल रहे “मनरेगा बचाओ संघर्ष” अभियान के तहत शनिवार को जांजगीर में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने मनरेगा में केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रस्तावित बदलावों को ग्रामीण मजदूरों और पंचायत व्यवस्था के लिए घातक बताया।
प्रेस वार्ता में कहा गया कि मजदूरी भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण मनरेगा का बड़ा हिस्सा पुराने बकाया चुकाने में खर्च हो रहा है। एनएमएमएस ऐप और आधार आधारित भुगतान प्रणाली को अनिवार्य किए जाने से करोड़ों मजदूरों का काम और मजदूरी प्रभावित हुई है। वक्ताओं का आरोप था कि केंद्र सरकार ने काम के कानूनी अधिकार को कमजोर कर दिया है, जो मजदूरों के लिए अंतिम सुरक्षा कवच था।
बताया गया कि मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों से बेरोजगारी बढ़ेगी, न्यूनतम मजदूरी के बिना श्रम कराने की स्थिति बनेगी, ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन तेज होगा और पंचायतों की शक्तियां समाप्त हो जाएंगी। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों से अधिकार छीनकर ठेकेदारों और एजेंसियों को लाभ पहुंचाने की आशंका जताई गई।
प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि पहले मनरेगा के तहत मजदूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, लेकिन अब राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जिससे काम उपलब्ध कराने में कठिनाई आएगी।
वक्ताओं ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान मनरेगा ने करोड़ों परिवारों को रोजगार दिया और यह योजना बीते 20 वर्षों में ग्रामीण भारत की जीवनरेखा रही है। बावजूद इसके, मजदूरी दरों में वृद्धि नहीं की गई और बीते वर्षों से बजट में भी पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई है।
अभियान के तहत चार प्रमुख मांगें रखी गईं—काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी, जवाबदेही की गारंटी, मनरेगा में किए गए बदलावों की वापसी, काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली और न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन तय करना।
प्रेस वार्ता में 12 से 29 जनवरी 2026 के बीच गांव-गांव कार्यक्रम, ग्राम सभाएं, प्रभात फेरियां, नारे लेखन, हस्ताक्षर अभियान और राष्ट्रपति को पोस्टकार्ड भेजने जैसे आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की जानकारी भी दी गई।