Advertisment
Advertisment
भारतविदेश

G-7 समिट में पीएम मोदी का संदेश: ‘दाता-दानी’ की सोच से आगे बढ़कर दुनिया को बराबरी वाली साझेदारी की जरूरत

NTN REPORT// एवियन (फ्रांस)। जी-7 समिट के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक साझेदारी को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया को अब ‘दाता-दानी’ (Donor-Recipient) की पुरानी सोच से बाहर निकलकर एकजुटता, समानता और आपसी सम्मान पर आधारित साझेदारी की ओर बढ़ना होगा। पीएम मोदी ने कहा कि सच्ची साझेदारी का मतलब सम्मान है, निर्भरता नहीं।

फाइल फोटो

जी-7 के आउटरीच सेशन में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की दुनिया पहले से कहीं ज्यादा जुड़ी हुई और एक-दूसरे पर निर्भर है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भरोसे की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

दुनिया में संसाधनों की नहीं, भरोसे की कमी

पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि भरोसे की कमी है। उन्होंने कहा कि आपसी विश्वास आज की सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति है और भविष्य की साझेदारियां इसी भरोसे को मजबूत करने पर निर्भर करेंगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बगल में बैठे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देशों के बीच सहयोग तभी सफल हो सकता है जब वह विश्वास और समानता की नींव पर खड़ा हो।

‘ग्लोबल साउथ’ को मदद नहीं, चाहिए बराबरी की साझेदारी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को सिर्फ सहायता की जरूरत नहीं है, बल्कि वे दुनिया के साथ बराबरी के साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि हमें मदद देने और लेने वाली मानसिकता से आगे बढ़कर मिलकर विकास की दिशा में काम करना होगा। हमें केवल साथ-साथ चलना नहीं है, बल्कि साथ मिलकर आगे बढ़ना है।

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि साझेदारी का आधार सम्मान होना चाहिए, निर्भरता नहीं।

भारत का विकास मॉडल: क्षमता निर्माण और आत्मनिर्भरता

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सोच हमेशा से यह रही है कि किसी देश के लिए क्या किया गया, यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि उसे अपने लिए कुछ करने में कितना सक्षम बनाया गया।

उन्होंने कहा कि भारत की विकास साझेदारियां इसी भावना पर आधारित हैं, जिसमें सहयोगी देशों में क्षमता निर्माण, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जाता है।

‘मानवता सबसे पहले’ के सिद्धांत पर भारत का जोर

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा ‘मानवता सबसे पहले’ के दृष्टिकोण को अपनाया है। उन्होंने भारत की कई वैश्विक पहलों का जिक्र किया, जिनमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, मिशन LiFE और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नजरिया सदियों पुरानी भारतीय सोच ‘वसुधैव कुटुंबकम’ पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है।

G-7 नेताओं के साथ पीएम मोदी की मुलाकात

जी-7 समिट की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान लंबे समय बाद पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी मुलाकात हुई।

दोनों नेताओं के बीच करीब 50 सेकेंड तक बातचीत हुई। इसके बाद पीएम मोदी और ट्रंप आगे के सत्र में साथ बैठे नजर आए।

G-7 क्या है?

ग्रुप ऑफ सेवन यानी G-7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। यूरोपीय संघ भी इस समूह का हिस्सा है।

G-7 का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक, वित्तीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करना और उनके समाधान के लिए साझा रणनीति तैयार करना है।

वैश्विक विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत सतत और समावेशी वैश्विक विकास को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भविष्य की दुनिया भरोसे, सहयोग और समान भागीदारी से ही आगे बढ़ सकती है।

डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
Back to top button
error: Content is protected !!