
लाल किले से PM मोदी का बड़ा रोडमैप: ‘सप्तधारा’ के जरिए विकसित भारत का संकल्प, AI से परमाणु ऊर्जा तक कई बड़े लक्ष्य
NTN REPORT// नई दिल्ली। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का व्यापक रोडमैप सामने रखा। करीब 75 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने विनिर्माण, कृषि, प्रौद्योगिकी, आधारभूत ढांचे, रक्षा, हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था तथा भारत की सांस्कृतिक शक्ति को विकास की सात प्रमुख धाराओं के रूप में रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को केवल दुनिया का बाजार बनने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि उत्पादन, तकनीक, नवाचार और वैश्विक प्रभाव के क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभानी है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत से लेकर युवाओं के कौशल विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, परमाणु ऊर्जा, महिला प्रतिनिधित्व और वैश्विक स्तर पर भारतीय कंपनियों की मजबूत मौजूदगी तक कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य सामने रखे।
‘सप्तधारा’ बनेगी विकसित भारत की विकास-नींव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के लिए ‘सप्तधारा’ यानी सात विकास धाराओं का विजन रखा। इसका उद्देश्य भारत की आर्थिक, तकनीकी, सामरिक और सांस्कृतिक ताकत को एक साथ आगे बढ़ाना है।
1. विनिर्माण शक्ति—डिजाइन से तैयार उत्पाद तक भारत की पूरी श्रृंखला
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को विनिर्माण क्षेत्र में केवल अंतिम उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देश में छोटे से छोटे कलपुर्जे से लेकर बड़े उत्पाद तक पूरी मूल्य श्रृंखला विकसित करनी होगी।
उन्होंने डिजाइन से लेकर उत्पादन तक पूरी व्यवस्था को भारत में विकसित करने पर जोर दिया। उनका लक्ष्य भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का भरोसेमंद केंद्र बनाना है। प्रधानमंत्री ने गुणवत्ता को भारतीय उत्पादों की पहचान बनाने का आह्वान करते हुए ‘शून्य दोष’ और उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण पर जोर दिया।
2. कृषि और खाद्य उत्पादन—खेत से वैश्विक बाजार तक किसानों की पहुंच
सप्तधारा की दूसरी धारा कृषि और खाद्य उत्पादन है। प्रधानमंत्री ने कृषि को खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात से जोड़ने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार भारतीय किसानों के लिए बड़ा अवसर है। किसानों को खेत से लेकर प्रसंस्करण और फिर निर्यात बाजार तक पूरी श्रृंखला से जोड़ना होगा। प्रधानमंत्री ने रासायनिक मुक्त खेती और वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कृषि उत्पाद तैयार करने की आवश्यकता भी बताई।
3. प्रौद्योगिकी और नवाचार—भारत बने वैश्विक नवाचार केंद्र
सप्तधारा की तीसरी धारा प्रौद्योगिकी और नवाचार है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का युग कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और डेटा केंद्रों का है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को दुनिया के लिए केवल बाजार नहीं बनना है, बल्कि वैश्विक नवाचार केंद्र बनना है। भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और यूपीआई जैसी उपलब्धियों को दुनिया तक पहुंचाने तथा स्वदेशी अगली पीढ़ी की संचार तकनीक और भारत में विकसित 6जी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
सेमीकंडक्टर निर्माण में तेजी, 3 संयंत्र शुरू
प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर को आधुनिक अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण जरूरत बताते हुए कहा कि भारत ने इस दिशा में आत्मनिर्भरता की ओर महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
उन्होंने बताया कि तीन सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू हो चुके हैं और आने वाले वर्षों में पांच से आठ और संयंत्र स्थापित किए जाने की दिशा में काम चल रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की यात्रा के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया।
4. गति शक्ति—तेज और बहुआयामी संपर्क व्यवस्था
सप्तधारा की चौथी धारा ‘गति शक्ति’ है। इसके तहत देश में तेज, निर्बाध और बहुआयामी संपर्क व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री ने शहरों को उच्च गति वाली रेल से जोड़ने, आधुनिक राजमार्गों, अंतर्देशीय जलमार्गों, हवाई अड्डों और बहुआयामी माल परिवहन व्यवस्था के विस्तार की आवश्यकता बताई। उनका जोर ऐसी आधारभूत संरचना पर रहा जिससे देश में आर्थिक गतिविधियों की गति और क्षमता दोनों बढ़ें।
5. रक्षा शक्ति—आत्मनिर्भर भारत से वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता तक
सप्तधारा की पांचवीं धारा रक्षा शक्ति है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है।
उन्होंने अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीक विकसित करने, ड्रोन और ड्रोन रोधी प्रणालियों, हाइपरसोनिक रक्षा तकनीक तथा साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
प्रधानमंत्री के अनुसार भारत के रक्षा निर्यात में करीब 50 गुना वृद्धि हुई है और भारतीय हथियार एवं रक्षा उपकरण करीब 100 देशों तक पहुंच रहे हैं।
6. हरित और नीली अर्थव्यवस्था—ग्रीन रोजगार और वैश्विक नेतृत्व
सप्तधारा की छठी धारा हरित और नीली अर्थव्यवस्था है। प्रधानमंत्री ने हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, हरित गतिशीलता और हरित विनिर्माण में वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य रखा।
उन्होंने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में हरित रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। साथ ही समुद्री संसाधनों, मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और समुद्री तकनीक के जरिए नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
परमाणु ऊर्जा पर बड़ा लक्ष्य—2047 तक 100 गीगावाट
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को विकसित भारत की महत्वपूर्ण जरूरत बताते हुए परमाणु ऊर्जा को इसका प्रमुख आधार बताया।
उन्होंने कहा कि भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है। साथ ही इस दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर चालू करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक में भारत की उपलब्धि को भी महत्वपूर्ण बताया और इसे परमाणु ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया।
7. सॉफ्ट पावर—दुनिया में भारत की सांस्कृतिक ताकत का विस्तार
सप्तधारा की सातवीं धारा भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ है। प्रधानमंत्री ने योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति, हस्तशिल्प, फिल्म, रचनात्मक उद्योग, एनीमेशन, गेमिंग और डिजिटल सामग्री को भारत के वैश्विक प्रभाव का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
उन्होंने भारत को विश्व के पर्यटन, खेल और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। योग और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रभाव को भारत की ताकत के रूप में रेखांकित किया गया।
फॉर्च्यून 500 में 50 भारतीय कंपनियां बनाने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने वैश्विक कॉरपोरेट जगत में भारत की मौजूदगी बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि आने वाले एक दशक में फॉर्च्यून 500 की सूची में 50 भारतीय कंपनियां होनी चाहिए।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में कम से कम एक भारतीय बैंक और दुनिया की शीर्ष पांच दवा कंपनियों में भारतीय कंपनी की मौजूदगी का लक्ष्य भी सामने रखा।
युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का ऐलान
प्रधानमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क तैयार करने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि महंगी कोचिंग का खर्च गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बनता है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, शिक्षकों और प्रतिभा को एक साथ जोड़कर युवाओं को विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की योजना पर जोर दिया गया।
एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण
प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक के तौर पर अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI कौशल में प्रशिक्षित करने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में AI रोजगार, अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्र की दिशा बदलने वाला है। ऐसे में भारत के युवाओं को इस क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए तैयार करना आवश्यक है।
एक लाख करोड़ रुपये का नवाचार कोष
प्रधानमंत्री ने अनुसंधान और नवाचार के लिए एक लाख करोड़ रुपये के नवाचार कोष का उल्लेख करते हुए युवाओं को नए प्रयोगों और अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने बताया कि देश में 2.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं और निजी क्षेत्र के युवा स्टार्टअप अंतरिक्ष एवं रॉकेट तकनीक में भी नई उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।
महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में जल्द कदम उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि देश की माताओं और बहनों को नीति-निर्माण में अधिक भागीदारी मिलनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण को जल्द लागू करने का आग्रह करते हुए इसे महिलाओं के अधिकार और सम्मान से जोड़कर प्रस्तुत किया।
‘दिमागी नक्सल’ पर प्रधानमंत्री की चेतावनी
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में नक्सलवाद और माओवादी हिंसा के मुद्दे पर भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सली कमजोर पड़ चुके हैं, लेकिन नक्सली मानसिकता अभी भी मौजूद है और ऐसे तत्व अवसर तलाश रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने ऐसी मानसिकता को पहचानने और उसे अलग-थलग करने की बात कही। संबोधन के दौरान ‘दिमागी नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल भी चर्चा में रहा। समाचार रिपोर्टों के अनुसार प्रधानमंत्री ने हथियारबंद नक्सलियों और वैचारिक स्तर पर नक्सली मानसिकता को आगे बढ़ाने वालों के बीच अंतर करते हुए यह टिप्पणी की।
महत्वपूर्ण: ‘दिमागी नक्सल’ कोई अलग कानूनी श्रेणी या आधिकारिक कानूनी शब्द नहीं है। इसे राजनीतिक संदर्भ में इस्तेमाल किया गया अभिव्यक्ति के रूप में समझना उचित होगा।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने अपने पूरे संबोधन को वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जब भारत अपनी स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनाए, तब देश को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प पूरा करना है।
उन्होंने आत्मनिर्भरता, विनिर्माण, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा, कृषि, नवाचार, युवा शक्ति और महिला भागीदारी को इस यात्रा के प्रमुख आधारों के रूप में प्रस्तुत किया।
12 वर्षों की उपलब्धियों का भी किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा उत्पादन करीब चार गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण करीब सात गुना और मोबाइल फोन उत्पादन करीब 35 गुना बढ़ा है।
उन्होंने आधुनिक रेलवे डिब्बों के उत्पादन में करीब 21 गुना और डिजिटल लेनदेन में 100 गुना वृद्धि का भी उल्लेख किया।
2026 का संबोधन 75 मिनट का रहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2026 का स्वतंत्रता दिवस संबोधन करीब 75 मिनट चला। यह पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत छोटा संबोधन रहा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 2025 में उनका संबोधन 103 मिनट, 2024 में 98 मिनट और 2023 में 90 मिनट का था।
भाषण में युवाओं और भविष्य पर विशेष जोर
प्रधानमंत्री के संबोधन में युवाओं को विकसित भारत की यात्रा का प्रमुख भागीदार बनाने पर विशेष जोर रहा। AI प्रशिक्षण, मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग, नवाचार कोष, स्टार्टअप, खेल प्रतिभा खोज और तकनीकी शिक्षा जैसे विषयों के जरिए युवा शक्ति को भविष्य की अर्थव्यवस्था से जोड़ने का संदेश दिया गया।
कुल मिलाकर 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन आत्मनिर्भरता, तकनीकी नेतृत्व, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा क्षमता, युवा शक्ति और सांस्कृतिक प्रभाव को केंद्र में रखकर वर्ष 2047 के विकसित भारत की दिशा तय करने वाला संबोधन रहा।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।