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राजनीति

वंदे मातरम् पर कांग्रेस मुख्यालय में विवाद, भाजपा का सोनिया गांधी पर गंभीर आरोप; कांग्रेस ने कहा—गीत रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई!

NTN REPORT// नई दिल्ली। देश ने 15 अगस्त 2026 को आजादी की 80वीं वर्षगांठ मनाई। इस अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में भी ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें वंदे मातरम् का गायन हुआ। इसी दौरान राष्ट्रीय गीत के पूर्ण संस्करण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

प्रतीकात्मक एआई तस्वीर

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और पार्टी के अन्य नेताओं ने वंदे मातरम् के शुरुआती अंतरों के बाद इसे रोकने का संकेत दिया। वहीं कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि गीत के गायन में कोई व्यवधान नहीं डाला गया और पूरा संस्करण गाया गया।

छह अंतरों वाले पूर्ण संस्करण को लेकर नया प्रोटोकॉल

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय की 28 जनवरी 2026 की गाइडलाइन के बाद वंदे मातरम् के आधिकारिक पूर्ण संस्करण को लेकर प्रोटोकॉल में बदलाव हुआ है। आधिकारिक संस्करण में छह अंतरे हैं और इसकी अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकंड है। पहले सार्वजनिक और प्रसारण परंपरा में आम तौर पर इसके शुरुआती दो अंतरों का ही इस्तेमाल होता रहा है।

नई व्यवस्था के अनुसार औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का पूर्ण छह-अंतरा संस्करण प्रस्तुत किया जाना है। जब वंदे मातरम् और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाएं, तो वंदे मातरम् पहले और राष्ट्रगान बाद में प्रस्तुत किया जाना है।

कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम में क्या हुआ?

15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् का गायन किया गया। कार्यक्रम से सामने आए वीडियो को लेकर भाजपा नेताओं ने दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व के कुछ सदस्य गीत के आगे जारी रहने को लेकर संकेत देते दिखाई दिए।

भाजपा प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने इस मुद्दे पर कांग्रेस और सोनिया गांधी पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वंदे मातरम् का गायन जारी रहने पर सोनिया गांधी ने कथित तौर पर इसे रोकने के लिए कार्यकर्ताओं को संकेत दिया।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने भी वीडियो के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। उनके आरोपों में राहुल गांधी द्वारा भी गीत रोकने का संकेत देने की बात कही गई।

हालांकि, इन आरोपों का आधार मुख्य रूप से कार्यक्रम के वीडियो में दिखाई देने वाले हाव-भाव और उनकी राजनीतिक व्याख्या है। कांग्रेस ने इस व्याख्या को पूरी तरह खारिज किया है।

जयराम रमेश ने दी कांग्रेस की सफाई

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने विवाद पर स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् के गायन में कोई व्यवधान नहीं हुआ और कांग्रेस में इसे लेकर कोई विवाद नहीं है।

उन्होंने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि अक्टूबर 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेता मौजूद थे। उन्होंने बताया कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर कांग्रेस अधिवेशनों में वंदे मातरम् की शुरुआती पंक्तियों के इस्तेमाल का निर्णय लिया गया था।

जयराम रमेश के मुताबिक कांग्रेस के कार्यक्रमों में तब से वंदे मातरम् गाया जाता रहा है और इसे लेकर कोई विवाद नहीं है। कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि 15 अगस्त के कार्यक्रम में पूरा वंदे मातरम् गाया गया था

सोनिया गांधी के इशारे पर कांग्रेस ने क्या कहा?

कांग्रेस की ओर से दी गई सफाई के मुताबिक सोनिया गांधी का इशारा वंदे मातरम् रोकने के लिए नहीं था। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि कार्यक्रम के दौरान पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कुछ देर से खड़े थे और सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी की व्यवस्था कराने का संकेत दे रही थीं।

यही वजह है कि कांग्रेस ने भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।

पवन खेड़ा और अशोक गहलोत ने भी किया विवाद से इनकार

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी कहा कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के दौरान किसी तरह का व्यवधान नहीं हुआ।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस मामले में कांग्रेस का पक्ष रखते हुए कहा कि वंदे मातरम् को लेकर कोई विवाद नहीं है।

कांग्रेस का कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाले हाव-भाव को गीत रोकने के प्रयास के तौर पर पेश करना गलत है।

भाजपा बनाम कांग्रेस: राष्ट्रीय गीत पर फिर सियासी टकराव

वंदे मातरम् को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब केंद्र सरकार ने 2026 में राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक गायन और प्रस्तुति के लिए नया प्रोटोकॉल जारी किया है। इससे पहले स्वतंत्रता दिवस के औपचारिक कार्यक्रमों में इसके शुरुआती दो अंतरों के गायन की परंपरा अधिक प्रचलित रही थी।

भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सोच से जोड़कर सवाल उठा रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि भाजपा वीडियो के हाव-भाव को गलत अर्थ देकर राजनीतिक विवाद पैदा कर रही है।

क्या है विवाद का सार?

  • कांग्रेस मुख्यालय में 15 अगस्त को वंदे मातरम् का गायन हुआ।
  • 2026 में गृह मंत्रालय के नए प्रोटोकॉल के तहत आधिकारिक अवसरों पर छह अंतरों वाले पूर्ण संस्करण को महत्व दिया गया है।
  • भाजपा ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने गायन रोकने का संकेत दिया।
  • भाजपा नेता अमित मालवीय और आर.पी. सिंह ने वीडियो के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए।
  • कांग्रेस ने आरोपों से इनकार किया।
  • जयराम रमेश ने कहा कि वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस में कोई विवाद नहीं है।
  • कांग्रेस के अनुसार सोनिया गांधी का संकेत गीत रोकने के लिए नहीं, बल्कि मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था कराने से संबंधित था।
  • उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् का पूर्ण संस्करण गाया गया।

वंदे मातरम् के गायन को लेकर कांग्रेस मुख्यालय में सामने आए वीडियो ने भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज कर दी है। भाजपा जहां इसे राष्ट्रीय गीत के प्रति कांग्रेस नेतृत्व के कथित रवैये से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि गीत रोकने का कोई प्रयास नहीं हुआ और भाजपा नेताओं ने वीडियो के दृश्यों की गलत व्याख्या की है।

अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है। इसमें उल्लिखित आरोप संबंधित राजनीतिक दलों एवं नेताओं के दावों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित वीडियो के हाव-भाव की व्याख्या को पाठकों को इसी संदर्भ में देखना चाहिए।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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