भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: पीएम मोदी और जापान की पीएम सनाए ताकाइची की मौजूदगी में कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर, रक्षा से लेकर सेमीकंडक्टर तक सहयोग बढ़ाने पर सहमति
NTN REPORT// नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में गुरुवार को भारत और जापान के संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, स्पेस और आर्थिक सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए अनेक सहयोग समझौतों (MoC) पर हस्ताक्षर किए गए।

संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सनाए ताकाइची का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उन्हें अपनी “छोटी बहन” बताया। उन्होंने कहा कि जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में ताकाइची दूरदर्शी नेतृत्व कर रही हैं और उनकी भारत यात्रा दोनों देशों की विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को नई दिशा प्रदान करेगी।
अगस्त 2025 से अब तक 120 समझौते, 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी
अगस्त 2025 से अब तक भारत और जापान के बीच लगभग 120 समझौतों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। जापान भारत में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की तैयारी में है। यह निवेश रक्षा, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, स्टील, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्पेस और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।
इस निवेश से भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी, वहीं जापान को चीन पर अपनी औद्योगिक निर्भरता कम करने में भी सहायता मिलेगी।
रक्षा सहयोग में नया अध्याय
भारत और जापान अब केवल गैर-घातक रक्षा उपकरणों और तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि दोनों देश पूर्ण रक्षा सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
नवंबर 2024 में दोनों देशों ने भारतीय नौसेना के लिए UNICORN Stealth Antenna Mast के संयुक्त विकास का समझौता किया था, जिसका निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा भारत में किया जा रहा है।
अब सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जापान ने अप्रैल 2026 में घातक हथियारों के निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। इसके बाद जापान भारत को युद्धपोत, मिसाइलें और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां उपलब्ध कराने तथा उनके संयुक्त विकास के लिए भी तैयार हो गया है।
भारत में बन सकते हैं मोगामी क्लास युद्धपोत
दोनों देशों के बीच मोगामी क्लास फ्रिगेट, आधुनिक मिसाइल सिस्टम और नौसैनिक उपकरणों के संयुक्त उत्पादन एवं टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी चर्चा हुई है।
भारत के लिए यह सहयोग इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह रक्षा क्षेत्र में रूस पर अपनी निर्भरता कम करते हुए आधुनिक और विश्वसनीय तकनीक अपनाना चाहता है। वहीं जापान भारत को एशिया में एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार और बड़ा बाजार मान रहा है।
दोनों देश QUAD समूह के सदस्य होने के कारण पहले से ही सामरिक सहयोग बढ़ा रहे हैं और अब यह साझेदारी और मजबूत होती दिखाई दे रही है।
प्रमुख रक्षा सहयोग
- UNICORN स्टेल्थ एंटीना मास्ट का संयुक्त विकास एवं उत्पादन।
- युद्धपोतों और मिसाइल प्रणालियों में सहयोग।
- घातक हथियारों के निर्यात एवं संयुक्त विकास पर सहमति।
- आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर साझेदारी।
आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन पर भी सहमति
भारत और जापान ने आर्थिक सुरक्षा संबंधी घोषणा पर भी सहमति जताई। इसमें किसी देश का नाम लिए बिना जबरदस्ती और आर्थिक दबाव के खिलाफ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। माना जा रहा है कि यह कदम चीन द्वारा जापानी कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्रीन एनर्जी में जापान का बड़ा निवेश
भारत को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में जापानी कंपनियां बड़े निवेश कर रही हैं।
- इटोचू और L&T कांडला पोर्ट पर 18,900 करोड़ रुपये की ग्रीन अमोनिया परियोजना विकसित कर रहे हैं।
- IHI और ACME की 29,500 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम जारी है।
- सुमितोमो कॉर्पोरेशन लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में कर रहा है।
इन परियोजनाओं से भारत ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथेनॉल उत्पादन में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
ऑटोमोबाइल और स्टील सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में टोयोटा नई विनिर्माण इकाई स्थापित कर रही है, जहां प्रतिवर्ष लगभग एक लाख वाहनों का उत्पादन होगा और करीब 2,800 रोजगार सृजित होंगे।
सुजुकी भी 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से नया प्लांट स्थापित कर रही है तथा असम में बायोगैस परियोजना विकसित कर रही है।
वहीं JFE स्टील और JSW के बीच 16,000 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट परियोजना पर भी कार्य जारी है।
सेमीकंडक्टर, AI और स्पेस सेक्टर में सहयोग
तकनीकी क्षेत्र में भी भारत-जापान साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।
- फुजीफिल्म गुजरात में सेमीकंडक्टर मटेरियल प्लांट स्थापित कर रहा है।
- तोहो कोकी IIT गुवाहाटी के साथ अनुसंधान कार्य कर रहा है।
- IISc बेंगलुरु और IIT हैदराबाद के साथ AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर सहयोग बढ़ाया जा रहा है।
- स्पेस सेक्टर में iSpace और दिगंतरा के साथ चंद्र मिशन से जुड़े प्रोजेक्ट पर कार्य जारी है।
बैंकिंग, टेलीकॉम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भी निवेश
वित्तीय और डिजिटल क्षेत्र में भी जापानी कंपनियां भारत में बड़े निवेश कर रही हैं।
- MUFG बैंक ने श्रीराम फाइनेंस के साथ लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश की पहल की है।
- SMBC ने यस बैंक के साथ 17 हजार करोड़ रुपये के निवेश पर सहमति जताई है।
- NTT डेटा ने अगली पीढ़ी की टेलीकॉम तकनीक और 3,800 करोड़ रुपये की सबमरीन केबल परियोजना में निवेश किया है।
इन परियोजनाओं से भारत की डिजिटल और वित्तीय अवसंरचना को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
चुनौतियां भी मौजूद
हालांकि दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। इससे पहले US-2 एम्फीबियस एयरक्राफ्ट सौदा लागत और तकनीक हस्तांतरण के मुद्दों पर आगे नहीं बढ़ सका था। इसके अलावा जापान की वृद्ध होती कार्यशक्ति और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां भी मौजूद हैं।
इसके बावजूद दोनों देश इन समस्याओं का समाधान खोजते हुए दीर्घकालिक रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।