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विदेश

14 दिन के युद्धविराम के बाद भी होर्मुज में जाम, 3,000 से ज्यादा जहाज फंसे; एशिया की रिफाइनरियों ने बढ़ाई टैंकरों की मांग

NTN NEWS REPORT// अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिन के अस्थायी युद्धविराम की घोषणा के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी है, लेकिन जमीनी हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। खाड़ी में जहाजों की भारी भीड़ और सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता के कारण शिपिंग कंपनियां फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

खाड़ी में जहाजों की भारी भीड़

लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) के शिपिंग डेटा के अनुसार, अधिकांश फंसे हुए तेल और गैस टैंकर अभी भी खाड़ी के भीतर मौजूद हैं। शिप ट्रैकिंग कंपनी केप्लर के मुताबिक, मंगलवार तक होर्मुज स्ट्रेट में करीब 187 भरे हुए टैंकर खड़े थे, जिनमें लगभग 17.2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और रिफाइंड उत्पाद लदा हुआ है।

फाइल फोटो

चीन में ईरान के राजदूत अब्दुलरेजा रहमानी फजली के हवाले से बताया गया है कि खाड़ी क्षेत्र में 3,000 से ज्यादा जहाज समुद्र में फंसे हुए हैं और स्ट्रेट से गुजरने का इंतजार कर रहे हैं।

14 दिन में ट्रैफिक सामान्य होना मुश्किल

Fertmax FZCO के ग्लोबल हेड ऑफ रिसर्च डेजिन ली के अनुसार, खाड़ी में 1,000 से ज्यादा समुद्री जहाज अटके हुए हैं और सामान्य परिस्थितियों में भी इस ट्रैफिक को साफ होने में दो हफ्तों से ज्यादा समय लग सकता है। उनका कहना है कि 14 दिन का युद्धविराम बाजार का भरोसा पूरी तरह बहाल करने के लिए पर्याप्त नहीं है, खासकर अरब खाड़ी के लोडिंग रूट्स पर।

उन्होंने यह भी कहा कि कई बड़ी शिपिंग कंपनियां ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपना रही हैं और युद्धविराम की स्थिरता पर भरोसा होने के बाद ही अपने जहाज खाड़ी में भेजेंगी।

अमेरिका-ईरान के निर्देशों का इंतजार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा करते हुए कहा है कि अमेरिका जहाजों की भीड़ कम कराने में मदद करेगा। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि यदि ईरान पर हमले बंद होते हैं तो वह भी जवाबी कार्रवाई रोकेगा और सशस्त्र बलों के साथ मिलकर जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा।

शिपिंग एसोसिएशन BIMCO के सुरक्षा प्रमुख जैकब लार्सन ने रॉयटर्स से कहा कि इंडस्ट्री अमेरिका और ईरान से स्पष्ट तकनीकी दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रही है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के समन्वय के बिना खाड़ी से निकलना जोखिम भरा हो सकता है।

वैश्विक सप्लाई पर असर, कीमतों में उतार-चढ़ाव

28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक तेल और एलएनजी सप्लाई का करीब 20% प्रभावित हुआ। इसके चलते ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया था। हालांकि युद्धविराम की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में कुछ नरमी देखी गई है।

भारत और चीन ने बढ़ाए टैंकर ऑर्डर

स्थिति सामान्य होने की उम्मीद में एशियाई रिफाइनरियां सक्रिय हो गई हैं। भारत की प्रमुख कंपनियां रिलायंस इंडस्ट्रीज और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की लोडिंग के लिए बड़े टैंकरों की मांग बढ़ा दी है।

चीन की सरकारी तेल कंपनी चाइना नेशनल ऑफशोर ऑयल कॉर्पोरेशन (CNOOC) ने भी अतिरिक्त टैंकरों की डिमांड बढ़ाई है। हालांकि, होर्मुज में लगे जाम को देखते हुए यह साफ नहीं है कि एशियाई देशों तक तेल की सप्लाई सामान्य होने में कितना समय लगेगा।

अनिश्चितता बरकरार

फिलहाल जहाज मालिक और चार्टर कंपनियां स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रही हैं। जब तक अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के ठोस नतीजे सामने नहीं आते और सुरक्षा प्रोटोकॉल स्पष्ट नहीं होते, तब तक होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य ट्रैफिक बहाल होना मुश्किल माना जा रहा है।

ऊर्जा बाजार की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या 14 दिन का युद्धविराम स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम साबित होगा या फिर खाड़ी क्षेत्र में अनिश्चितता बनी रहेगी।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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