
NTN REPORT// रायपुर, 06 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को महानदी भवन, नवा रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान विकसित भारत–रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी के अंतर्गत राज्यव्यापी ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक चलने वाले इस विशेष अभियान के दौरान प्रदेश के प्रत्येक गांव में मुक्तिधाम एवं प्रतीक्षालय का निर्माण कराया जाएगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों के सभी शासकीय विद्यालयों में बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय बनाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान बेटियों के सम्मान, ग्रामीण स्वच्छता, सामाजिक गरिमा और आधारभूत सुविधाओं को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार का महत्वपूर्ण कदम है।
6,671 बालिका शौचालय और 6,524 मुक्तिधाम होंगे तैयार
अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 286.85 करोड़ रुपये की लागत से 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। प्रत्येक शौचालय की लागत 4.30 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
इसके अलावा प्रदेश के 6,524 गांवों में 391.44 करोड़ रुपये की लागत से प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम बनाए जाएंगे, जिनकी प्रति इकाई लागत 6 लाख रुपये होगी। वहीं 549 अतिरिक्त मुक्तिधामों का निर्माण 18.22 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा, जिनकी प्रति इकाई लागत 3.32 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
10,027 बंद बोरवेल बनेंगे जल संरक्षण का माध्यम
जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए राज्य के 10,027 डिफंक्ट बोरवेलों में 52.14 करोड़ रुपये की लागत से सैंड फिल्टर एवं रिचार्ज संरचनाएं विकसित की जाएंगी। प्रति इकाई लगभग 52 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, वर्षा जल का संरक्षण बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट कम करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी कार्यों की शीघ्र स्वीकृति देकर तत्काल शुरू कराया जाए।
ग्रामीण विकास और रोजगार का सबसे बड़ा अभियान
मुख्यमंत्री ने बताया कि वीबी-जी राम जी योजना पूरे देश में 1 जुलाई 2026 से लागू हुई है। योजना के अंतर्गत सभी विकास कार्यों का चयन ग्राम सभा की स्वीकृति से किया जाएगा तथा मजदूरी बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा और वीबी-जी राम जी के माध्यम से राज्य को लगभग 6,855 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे, जो ग्रामीण रोजगार और विकास कार्यों के लिए अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय निवेश है। योजना की पहली किस्त के रूप में भारत सरकार से 1,538 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय स्वीकृति भी मिल चुकी है।
खेती और रोजगार दोनों का रखा गया संतुलन
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों और श्रमिकों दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए कृषि कार्यों के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में 60 दिनों तक योजना के कार्य बंद रखने का प्रावधान किया गया है, जिससे खेती और रोजगार दोनों प्रभावित न हों।
318 प्रकार के विकास कार्यों से बदलेगी गांवों की तस्वीर
योजना के तहत 318 प्रकार के विकास कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में शामिल किया गया है—
- 107 प्रकार के जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्य।
- 90 प्रकार के ग्रामीण अधोसंरचना विकास कार्य।
- 86 प्रकार के आजीविका संवर्धन कार्य।
- 35 प्रकार के जलवायु अनुकूलन एवं आपदा प्रबंधन संबंधी कार्य।
इनके अंतर्गत तालाब, चेकडैम, रिचार्ज संरचनाएं, सिंचाई विस्तार, सड़क, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, अतिरिक्त स्कूल कक्ष, ग्रामीण पुस्तकालय, प्रयोगशाला, किचन शेड, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, मुक्तिधाम तथा पशु चिकित्सालय जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
योजना के माध्यम से ग्रामीण हाट-बाजार, कृषि उपज भंडारण केंद्र, कोल्ड स्टोरेज, डेयरी, मत्स्य पालन तथा पशुपालन से जुड़ी अधोसंरचना भी विकसित की जाएगी। वहीं बाढ़, चक्रवात, ड्रेनेज, तटबंध, जंगलों में आग की रोकथाम और प्राकृतिक आपदाओं के बाद पुनर्निर्माण कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का उत्कृष्ट प्रदर्शन
मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के क्रियान्वयन की तैयारियों में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। श्रमिकों की 98 प्रतिशत ई-केवाईसी पूरी कर राज्य देश में प्रथम स्थान पर है, जबकि परिसंपत्तियों की 99 प्रतिशत जियो टैगिंग के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से जीआईएस आधारित ग्राम पंचायत कार्ययोजना तैयार करने में भी राज्य अव्वल रहा है।
‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान को मिलेगा बल
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार के ‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान को भी इस योजना के माध्यम से नई गति मिलेगी। प्रत्येक विकासखंड में जल उपलब्धता के अनुसार जल संरक्षण कार्यों पर न्यूनतम निर्धारित व्यय सुनिश्चित किया जाएगा।
5,591 करोड़ रुपये का बजट, पहली तिमाही में 1,264 करोड़ खर्च
वर्ष 2026-27 में वीबी-जी राम जी योजना के लिए 5,591.42 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट रखा गया है। वहीं अप्रैल से जून 2026 की पहली तिमाही में ही 1,264 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिससे ग्रामीण विकास कार्यों में तेजी आई है।
ग्राम सभा की मंजूरी से होंगे सभी कार्य
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जल संरक्षण, स्वच्छता, शिक्षा, सामाजिक अधोसंरचना और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाते हुए आत्मनिर्भर एवं विकसित गांवों का निर्माण करना है। प्रत्येक कार्य ग्राम सभा की स्वीकृति से किया जाएगा तथा डिजिटल मॉनिटरिंग, समय पर मजदूरी भुगतान, गुणवत्ता नियंत्रण और सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।
पत्रकार वार्ता में उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, वीबी-जी राम जी के आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा सहित वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।