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भारत

भारत सरकार का मेटा को सख्त संदेश: भारतीय कानूनों के तहत ही चलाना होगा प्लेटफॉर्म, ‘सेफ हार्बर’ पर भी सरकार का कड़ा रुख!

NTN REPORT// 07/08/26। भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा (Meta) समेत अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के संचालन को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म अमेरिकी कानूनों या नीतियों के आधार पर संचालित नहीं किया जा सकता। सरकार का कहना है कि भारत में काम करने वाली सभी टेक कंपनियों को भारतीय कानूनों, संविधान और सामाजिक मूल्यों के अनुरूप जवाबदेही निभानी होगी।

प्रतीकात्मक एआई तस्वीर

तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर हुई विस्तृत चर्चा

सरकारी सूत्रों के अनुसार, हाल ही में मेटा और केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच हुई बैठकों में तकनीकी पहलुओं, डेटा लॉग्स और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने इस विषय को पूरी तरह तकनीकी और संवेदनशील बताते हुए कहा कि इसके सभी पहलुओं को गहराई से समझना आवश्यक है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

सरकार ने बैठक में स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन इसके साथ तर्कसंगत प्रतिबंधों का भी प्रावधान है। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी और कानून का पालन भी सुनिश्चित करना होगा।

डीपफेक और अवैध कंटेंट पर सरकार की चिंता

बैठक के दौरान सरकार ने इंटरनेट पर तेजी से बढ़ रहे डीपफेक कंटेंट की गुणवत्ता और उसके संभावित दुष्प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। सूत्रों के अनुसार, मेटा के अलावा एक्स (X) और टेलीग्राम (Telegram) सहित अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ भी इस विषय पर लगातार संवाद जारी है।

मार्क जुकरबर्ग ने मानी खामियां

रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने कंपनी के प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म रेगुलेशन में हुई कमियों को लेकर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया है। कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि उसके प्लेटफॉर्म पर कुछ अवैध कंटेंट को बढ़ावा मिला तथा कुछ मामलों में विशेष समुदाय तक पहुंच बढ़ाने के लिए भुगतान लेकर कंटेंट को प्रमोट किया गया।

‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा पर सरकार का कड़ा रुख

सरकारी अधिकारियों ने मेटा को यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म केवल मध्यस्थ (Intermediary) की भूमिका तक सीमित न रहकर स्वयं यह तय करता है कि कौन-सा कंटेंट किस उपयोगकर्ता तक पहुंचेगा, तो उसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) जैसी कानूनी सुरक्षा का लाभ नहीं मिल सकता। सरकार का मानना है कि ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही भी बढ़ जाती है।

सरकार का संदेश साफ

केंद्र सरकार का कहना है कि भारत में संचालित होने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानूनों और सामाजिक मानकों का पालन करना होगा। सरकार ने संकेत दिए हैं कि डिजिटल सुरक्षा, डीपफेक, अवैध कंटेंट और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर आगे भी सख्त निगरानी और आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी।

(नोट: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। मामले से जुड़े कानूनी और नीतिगत पहलुओं पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक स्थिति समय-समय पर बदल सकती है।)

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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