फ्रांस के 100 से अधिक स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में बच्चों के यौन शोषण की जांच, इंग्लैंड में 15 वर्षीय किशोर पर 22 गंभीर आरोप!
NTN REPORT// पेरिस/लंदन। यूरोप के दो देशों फ्रांस और इंग्लैंड में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों ने अभिभावकों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर फ्रांस में 100 से अधिक नर्सरी, प्राइमरी स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में छोटे बच्चों के कथित यौन शोषण की जांच चल रही है, वहीं इंग्लैंड में एक 15 वर्षीय किशोर पर 22 गंभीर यौन अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।

फ्रांस में स्कूल सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
फ्रांस में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वहां की पुलिस और न्यायिक एजेंसियां 100 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों की जांच कर रही हैं। सरकारी वकील लॉरे बेकुआ के अनुसार जांच के दायरे में 84 प्री-स्कूल (नर्सरी), लगभग 20 प्राइमरी स्कूल और 10 डे-केयर सेंटर शामिल हैं।
आरोप हैं कि दोपहर के भोजन के समय, बच्चों के आराम या सोने के दौरान तथा स्कूल की छुट्टी के बाद 3 से 4 वर्ष के मासूम बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार और गंभीर मामलों में यौन शोषण जैसी घटनाएं हुईं।
स्कूल मॉनिटर्स पर लगे आरोप
जिन लोगों पर आरोप लगे हैं वे स्कूलों में नियुक्त मॉनिटर्स हैं। फ्रांस में ये मॉनिटर्स बच्चों की देखरेख, लंच ब्रेक, खेलकूद गतिविधियों और विश्राम अवधि के दौरान निगरानी का काम करते हैं।
विशेष बात यह है कि इन मॉनिटर्स की नियुक्ति सीधे स्कूल या शिक्षा विभाग नहीं करता, बल्कि स्थानीय प्रशासन द्वारा की जाती है। इस पद के लिए किसी विशेष शैक्षणिक डिग्री या पेशेवर प्रशिक्षण की अनिवार्यता नहीं होने के कारण अब भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
फ्रांस में तीन वर्ष की आयु से स्कूल जाना अनिवार्य है, जिसके चलते 3 से 11 वर्ष तक के लाखों बच्चे प्रतिदिन इन कर्मचारियों की निगरानी में रहते हैं।
अभिभावकों और संगठनों ने बताया बड़ा घोटाला
पीड़ित परिवारों के वकीलों और अभिभावक संगठनों का कहना है कि यह केवल कुछ घटनाओं का मामला नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाने वाला बड़ा घोटाला है।
उनका आरोप है कि सरकारी स्कूल, जिन्हें कभी देश की शैक्षणिक व्यवस्था की पहचान माना जाता था, अब बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह गए हैं।
बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के कई आरोप
शिकायतों के अनुसार कुछ मॉनिटर्स बच्चों पर चिल्लाते थे, उन्हें जबरदस्ती खाना खिलाते थे जिससे कई बच्चे उल्टी तक कर देते थे। वहीं कुछ मामलों में शारीरिक और यौन शोषण के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
फरवरी 2025 में एक वकील ने दो बच्चों की ओर से शिकायत दर्ज कराई थी। पश्चिमी पेरिस के एक स्कूल में कार्यरत एक मॉनिटर पर तीन वर्षीय बच्ची और तीन वर्षीय बच्चे के साथ गलत हरकत करने का आरोप लगाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ पहले मारपीट की शिकायत दर्ज हो चुकी थी। इसके बावजूद उसे निलंबित करने के बजाय दूसरे स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया था।
परिजनों के अनुसार एक तीन वर्षीय बच्चा स्कूल के प्रवेश द्वार पर पहुंचते ही इतना भयभीत हो जाता था कि वह लगभग बेहोश हो गया था।
अदालतों ने अपनाया सख्त रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए फ्रांस की अदालतों ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है।
पेरिस में एक मॉनिटर के खिलाफ मुकदमा शुरू होने जा रहा है, जिस पर 3 से 5 वर्ष की आयु के पांच बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोप हैं।
इसके अलावा 47 वर्षीय एक अन्य मॉनिटर के खिलाफ भी अदालत जल्द फैसला सुना सकती है। उस पर 9 से 10 वर्ष की लड़कियों के साथ यौन शोषण करने का आरोप है।
इंग्लैंड में 15 वर्षीय किशोर पर 22 आरोप
इसी बीच इंग्लैंड के नॉर्थहैम्पटनशायर क्षेत्र में पुलिस ने एक 15 वर्षीय किशोर पर यौन अपराधों से जुड़े 22 गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपी की उम्र कम होने के कारण उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
पुलिस के अनुसार ये घटनाएं वर्ष 2022 से 2025 के बीच हुईं। किशोर पर 10 लड़कियों और 12 महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और अन्य यौन अपराध करने के आरोप हैं।
मामले में 13 वर्ष से कम उम्र की बच्ची तथा 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों के साथ दुष्कर्म, अनुचित स्पर्श, बच्चों की आपत्तिजनक तस्वीरें बनाने और उन्हें अपने पास रखने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
आरोपी को 23 जून को वेलिंगबोरो यूथ कोर्ट में पेश किया जाएगा।
अभिभावकों में बढ़ी चिंता, सख्त कार्रवाई की मांग
फ्रांस और इंग्लैंड के इन मामलों ने बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों देशों में अभिभावक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने दोषियों के खिलाफ त्वरित न्याय, कड़ी सजा और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों और डे-केयर संस्थानों में नियुक्त कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच, प्रशिक्षण और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।