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धर्म

अधिक मास पूर्णिमा 2026: 31 मई को बन रहा दुर्लभ महासंयोग, इन उपायों से धन-संपत्ति और सुख-समृद्धि की मान्यता!

अधिक मास पूर्णिमा पर विशेष संयोग, श्रद्धालुओं के लिए रहेगा खास दिन

NTN REPORT// 31 मई 2026 को पड़ने वाली अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की पूर्णिमा को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जा रहा है। इस दिन रवि योग सहित कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जिन्हें पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष फलदायी बताया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत आराधना करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

अधिक मास पूर्णिमा का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार अधिक मास लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस माह में किए गए जप, तप, दान और पूजा का महत्व सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक माना जाता है। अधिक मास की पूर्णिमा इस पूरे महीने का सबसे महत्वपूर्ण दिन मानी जाती है, जब श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

रवि योग समेत कई शुभ योगों का निर्माण

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 31 मई 2026 को पूर्णिमा तिथि पर रवि योग का निर्माण हो रहा है। धार्मिक मान्यता है कि रवि योग में किए गए शुभ कार्यों से बाधाएं कम होती हैं और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। इसके अलावा चंद्रमा और गुरु की अनुकूल स्थिति भी दिन को विशेष महत्व प्रदान कर रही है। मान्यता है कि ऐसे शुभ संयोगों में की गई आराधना से मान-सम्मान, सुख और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

मुख्य द्वार पर हल्दी और गंगाजल का छिड़काव

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा की सुबह स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, गंगाजल और हल्दी मिलाकर घर के मुख्य द्वार पर छिड़काव करना शुभ माना जाता है। इसके बाद द्वार पर हल्दी से स्वास्तिक चिन्ह बनाया जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और नकारात्मकता दूर रहती है।

पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व

पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। श्रद्धालु जल में दूध और गुड़ या चीनी मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करते हैं। वहीं शाम के समय घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह उपाय आर्थिक उन्नति और पारिवारिक सुख-शांति से जुड़ा माना जाता है।

माता लक्ष्मी को अर्पित करें कौड़ियां और मखाने

शाम के समय माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का भी विधान बताया गया है। पूजा के दौरान पीली कौड़ियां और मखाने अर्पित किए जाते हैं। पूजा के बाद कौड़ियों को लाल वस्त्र में बांधकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखा जाता है। धार्मिक विश्वास है कि यह उपाय धन संबंधी सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

चंद्र देव को अर्घ्य देने की परंपरा

पूर्णिमा का सीधा संबंध चंद्रमा से माना जाता है। ऐसे में रात के समय चंद्रमा को जल, दूध, अक्षत और सफेद पुष्प मिश्रित अर्घ्य देने की परंपरा है। श्रद्धालु इस दौरान “ॐ सों सोमाय नमः” मंत्र का जाप भी करते हैं। मान्यता है कि इससे मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और सकारात्मक विचारों की वृद्धि होती है।

श्रद्धा और सेवा का भी है विशेष महत्व

धार्मिक जानकारों के अनुसार अधिक मास पूर्णिमा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि दान, सेवा, जरूरतमंदों की सहायता और सत्कर्मों का भी विशेष महत्व है। इस दिन किए गए पुण्य कार्यों को आध्यात्मिक उन्नति और आत्मिक संतोष से जोड़कर देखा जाता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है। किसी भी उपाय या दावे को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जाना चाहिए। श्रद्धालु अपनी आस्था और विवेक के अनुसार इनका पालन करें।

यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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