बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग की बढ़ी जरूरत, पाकिस्तान बॉर्डर मॉडल से मिले सकारात्मक संकेत
नदियों, जंगलों और अवैध घुसपैठ की चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
NTN REPORT// भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था में फेंसिंग (बाड़बंदी) एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में उभरी है। विशेष रूप से पाकिस्तान सीमा पर वर्षों से की गई फेंसिंग और आधुनिक निगरानी प्रणालियों के कारण घुसपैठ, आतंकवादी गतिविधियों और तस्करी के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। अब विशेषज्ञों का मानना है कि इसी तरह की उन्नत तकनीक आधारित स्मार्ट फेंसिंग को भारत-बांग्लादेश सीमा पर भी तेजी से लागू करने की आवश्यकता है, जहां भौगोलिक परिस्थितियां पारंपरिक बाड़बंदी को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।

पाकिस्तान सीमा पर फेंसिंग से मजबूत हुई सुरक्षा
भारत और पाकिस्तान के बीच लगभग 3,323 किलोमीटर लंबी सीमा है। अतीत में इस सीमा के कई हिस्से घुसपैठियों, आतंकियों और तस्करों के लिए आसान रास्ता माने जाते थे। विशेषकर जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान सेक्टर में घुसपैठ के जरिए आतंकी गतिविधियों की घटनाएं सामने आती थीं।
इसके बाद केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सहयोग से व्यापक स्तर पर फेंसिंग का कार्य शुरू किया। वर्तमान में सीमा के अधिकांश हिस्सों में मजबूत तारबाड़, हाई-मास्ट लाइटिंग, निगरानी कैमरे और नियमित पेट्रोलिंग की व्यवस्था है। इसका परिणाम यह रहा कि घुसपैठ के प्रयासों में उल्लेखनीय कमी आई और सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी में अधिक सफलता मिली।
बांग्लादेश सीमा पर अलग तरह की चुनौतियां
भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों से होकर गुजरती है। यह दुनिया की सबसे लंबी स्थलीय सीमाओं में शामिल है।
इस सीमा की सबसे बड़ी चुनौती इसकी भौगोलिक संरचना है। यहां बड़े हिस्से नदी, दलदल, घने जंगल और दुर्गम क्षेत्रों से घिरे हुए हैं, जिससे पारंपरिक फेंसिंग लगाना कठिन और खर्चीला हो जाता है। कई क्षेत्रों में अब भी पूरी तरह से बाड़बंदी नहीं हो पाई है।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने अवैध घुसपैठ, मवेशी तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की आवाजाही और अन्य सीमा पार अपराध बड़ी चुनौती बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध भी सीमा पार आवाजाही को संवेदनशील बनाते हैं।
क्या है स्मार्ट फेंसिंग?
स्मार्ट फेंसिंग पारंपरिक तारबाड़ से कहीं अधिक उन्नत सुरक्षा प्रणाली है। इसमें आधुनिक तकनीकों को एकीकृत कर सीमा पर हर गतिविधि की वास्तविक समय (Real-Time) निगरानी की जाती है।
इस प्रणाली के माध्यम से किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता लगाकर नियंत्रण कक्ष को अलर्ट भेजा जाता है, जिससे सुरक्षा बल तत्काल कार्रवाई कर सकते हैं।
स्मार्ट फेंसिंग के प्रमुख घटक
1. मजबूत भौतिक फेंस
- 8 से 10 फीट ऊंची स्टील फेंसिंग
- बार्ब्ड वायर या विशेष सुरक्षा तार
- संवेदनशील क्षेत्रों में डबल लेयर फेंसिंग
2. अत्याधुनिक सेंसर सिस्टम
- मोशन सेंसर: किसी व्यक्ति या वस्तु की गतिविधि का पता लगाते हैं।
- इंफ्रारेड सेंसर: रात में भी मानव गतिविधि की पहचान करते हैं।
- फाइबर ऑप्टिक सेंसर: फेंस काटने या चढ़ने की कोशिश पर अलर्ट देते हैं।
- वाइब्रेशन सेंसर: बाड़ में किसी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर संकेत भेजते हैं।
3. हाईटेक कैमरा नेटवर्क
- 360 डिग्री घूमने वाले PTZ कैमरे
- थर्मल इमेजिंग कैमरे
- AI आधारित स्मार्ट कैमरे जो इंसान, वाहन और जानवर में अंतर कर सकते हैं
4. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी
- फर्जी अलर्ट को कम करना
- संदिग्ध गतिविधियों का स्वतः विश्लेषण
- मशीन लर्निंग के माध्यम से लगातार बेहतर प्रदर्शन
- कंट्रोल रूम को तत्काल सूचना
5. कमांड एंड कंट्रोल सेंटर
सभी कैमरे और सेंसर एक केंद्रीकृत नियंत्रण कक्ष से जुड़े रहते हैं। यहां BSF के जवान 24 घंटे निगरानी करते हैं और किसी भी अलर्ट पर त्वरित प्रतिक्रिया टीम को भेजा जाता है।
6. अतिरिक्त आधुनिक तकनीक
- ड्रोन आधारित निगरानी
- सोलर पावर बैकअप
- GPS ट्रैकिंग सिस्टम
- मोबाइल अलर्ट प्लेटफॉर्म
भारत में स्मार्ट फेंसिंग की वर्तमान स्थिति
केंद्र सरकार ने कॉम्प्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (CIBMS) के तहत स्मार्ट फेंसिंग परियोजनाओं को बढ़ावा दिया है। पाकिस्तान सीमा के कई हिस्सों में आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी पहले से लागू है, जबकि बांग्लादेश सीमा पर विभिन्न स्थानों पर पायलट प्रोजेक्ट संचालित किए जा रहे हैं।
सरकार का लक्ष्य भविष्य में इस तकनीक का विस्तार कर पूर्वी सीमा को भी पूरी तरह आधुनिक सुरक्षा प्रणाली से लैस करना है।
स्मार्ट फेंसिंग के प्रमुख फायदे
24 घंटे निगरानी
दिन और रात दोनों समय प्रभावी निगरानी संभव होती है।
कम मानव संसाधन में अधिक सुरक्षा
कम संख्या में जवानों के माध्यम से बड़े क्षेत्र की निगरानी की जा सकती है।
त्वरित कार्रवाई
अलर्ट मिलते ही सुरक्षा बल मौके पर पहुंच सकते हैं।
घुसपैठ और तस्करी में कमी
अवैध गतिविधियों को रोकने में सहायता मिलती है।
डेटा आधारित सुरक्षा रणनीति
लंबी अवधि के आंकड़ों का विश्लेषण कर बेहतर सुरक्षा योजना बनाई जा सकती है।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि स्मार्ट फेंसिंग अत्याधुनिक समाधान है, लेकिन इसके सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं।
- परियोजना की लागत काफी अधिक है।
- नदी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रखरखाव मुश्किल होता है।
- जवानों को नई तकनीक का विशेष प्रशिक्षण देना पड़ता है।
- दूरदराज क्षेत्रों में बिजली और इंटरनेट कनेक्टिविटी बड़ी चुनौती है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा में बड़ा अंतर
पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा का मुख्य फोकस आतंकवाद और सैन्य घुसपैठ को रोकना रहा है। वहीं बांग्लादेश सीमा पर अवैध प्रवासन, तस्करी और संगठित अपराध प्रमुख चुनौतियां हैं।
इसके अलावा बांग्लादेश सीमा की भौगोलिक परिस्थितियां पारंपरिक फेंसिंग को सीमित कर देती हैं। ऐसे में स्मार्ट फेंसिंग वहां अधिक प्रभावी विकल्प मानी जा रही है।
पाकिस्तान सीमा पर फेंसिंग और आधुनिक निगरानी तकनीकों की सफलता ने यह साबित किया है कि मजबूत सीमा प्रबंधन देश की आंतरिक सुरक्षा को काफी हद तक सुदृढ़ बना सकता है। अब बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग को तेजी से लागू करना समय की आवश्यकता माना जा रहा है। यदि यह परियोजना व्यापक स्तर पर सफल होती है, तो पूर्वी सीमा पर घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा तथा देश की समग्र सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।