
करोड़ों की लागत से बन रहे जिला अस्पताल भवन में मानकों की अनदेखी मापदंडों पर खरा नहीं उतर रहा निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर ब्लॉक, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
NTN NEWS REPORT// जांजगीर-चांपा। मनमानी, जिले के जिला अस्पताल परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर ब्लॉक (भवन) में निर्माण गुणवत्ता और तय मापदंडों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि भवन निर्माण में स्वीकृत एस्टीमेट और तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे भविष्य में इसकी मजबूती और उपयोगिता पर संकट मंडरा सकता है।
23 करोड़ की लागत, लेकिन गुणवत्ता पर सवाल

जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल के सामने बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण किया जा रहा है। यह भवन गंभीर मरीजों के इलाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन निर्माण की वर्तमान स्थिति को देखकर इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि भवन निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री मानक स्तर की नहीं है और बेस निर्माण में भी लापरवाही बरती जा रही है।
तय मापदंडों की अनदेखी का आरोप
निर्माण कार्य में लगे इंजीनियरों और संबंधित विभाग पर आरोप है कि:
- भवन के बेस में वही मिट्टी भरी जा रही है, जो खुदाई से निकली है
- मुरम/सोलिंग जैसी आवश्यक प्रक्रियाओं का समुचित पालन नहीं हो रहा
- कंक्रीट और फाउंडेशन की मजबूती पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा
विशेषज्ञों के अनुसार यदि बेस मजबूत नहीं होगा, तो ऊपर बनने वाला ढांचा लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रह पाएगा।
निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल
सूत्रों का कहना है कि सीजीएमएससी (CGMSC) के अधिकारी निर्माण स्थल का नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद मौके पर पहुंचकर जांच नहीं की गई, जिससे ठेकेदार को मनमानी करने का अवसर मिल रहा है।इस लापरवाही के चलते सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है।
जिम्मेदार अधिकारियों का दावा – गुणवत्ता से समझौता नहीं
वहीं इस पूरे मामले पर संबंधित विभाग के इंजीनियरों का कहना है कि भवन निर्माण में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है और लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य स्वीकृत डिजाइन और तकनीकी मानकों के अनुसार ही किया जा रहा है।
बड़ा सवाल – जब अभी यह हाल है, तो आगे क्या?
जानकारों का कहना है कि जब निर्माण के शुरुआती चरण में ही मापदंडों की अनदेखी हो रही है, तो भविष्य में भवन की सुरक्षा और मरीजों की जान पर खतरा हो सकता है। निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए और यदि अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए साथ ही निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच की जाए , गुणवत्ता से समझौता करने वालों पर कार्रवाई की जाए, समय-समय पर सार्वजनिक निरीक्षण रिपोर्ट जारी की जाए।