सरकार की योजनाएं दमदार, फिर जांजगीर-चांपा में क्रियान्वयन लचर क्यों? विभागों पर प्रशासनिक अंकुश और जवाबदेही तय करने की जरूरत!
जांजगीर-चांपा में विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति पर गंभीर मंथन जरूरी, योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन को दिखानी होगी सख्ती
NTN REPORT// कभी-कभी धरातल पर दिखाई देने वाली परिस्थितियां मन में कई गंभीर सवाल खड़े कर देती हैं। छत्तीसगढ़ शासन की विकास संबंधी योजनाओं, बजट प्रावधानों और जनकल्याणकारी प्रयासों को देखें तो ऐसा कोई प्रमुख क्षेत्र नहीं है, जहां सरकार द्वारा काम करने के प्रयास न किए जा रहे हों। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, अधोसंरचना, पेयजल, निर्माण कार्य, रोजगार और जनसुविधाओं के विस्तार जैसे प्रत्येक क्षेत्र में सरकार अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास कर रही है।

यदि सरकार की मंशा, योजनाओं और विकास के लिए उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों को आधार मानकर मूल्यांकन किया जाए तो सरकार के प्रयासों को सराहना मिलनी चाहिए। लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल यहां खड़ा होता है कि जब सरकार योजनाएं बना रही है, बजट उपलब्ध करा रही है और संसाधन मुहैया करा रही है, तो फिर उन योजनाओं का अपेक्षित परिणाम धरातल पर दिखाई क्यों नहीं दे रहा है?
सरकार की मंशा अच्छी, लेकिन विभागीय क्रियान्वयन पर सवाल
सरकार हर स्थान पर स्वयं उपस्थित होकर प्रत्येक कार्य की निगरानी नहीं कर सकती। शासन की योजनाओं को वास्तविक स्वरूप देने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों, विभाग प्रमुखों और जिला प्रशासन की होती है। यही वह व्यवस्था है, जिसके माध्यम से सरकार की नीतियां आम नागरिक तक पहुंचती हैं।
लेकिन जिला मुख्यालय जांजगीर-चांपा की परिस्थितियों को देखकर ऐसा महसूस होता है कि कई विभागों में कार्यप्रणाली, निगरानी और जवाबदेही को लेकर गंभीर सुधार की आवश्यकता है। विकास कार्यों की गुणवत्ता, निर्माण कार्यों की समय-सीमा, निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन, शासकीय धन का सदुपयोग और जनसुविधाओं की उपलब्धता जैसे विषयों पर लगातार निगरानी होनी चाहिए।
विभिन्न विभागों के कामकाज को लेकर सामने आने वाली शिकायतें, नागरिकों की प्रतिक्रियाएं और धरातल पर दिखाई देने वाली स्थितियां यह सवाल उठाने के लिए पर्याप्त हैं कि आखिर विभागीय स्तर पर जवाबदेही किस तरह सुनिश्चित की जा रही है?
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है जांजगीर-चांपा
जांजगीर-चांपा जिला राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले को मिलाकर छह विधानसभा क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह क्षेत्र शासन के लिए विशेष महत्व रखता है।
ऐसे में यहां विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि सरकार की कार्यशैली और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का भी महत्वपूर्ण पैमाना है।
यदि शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए बजट और संसाधनों का निर्धारित मापदंडों के अनुरूप उपयोग नहीं हो पाता, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा का पालन नहीं होता तथा विभागीय स्तर पर शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं किया जाता, तो इसका सीधा असर सरकार की छवि और आम जनता के विश्वास पर पड़ता है।
क्या विभागीय नियंत्रण कमजोर पड़ रहा है?
यहां सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां हैं जिनके कारण विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर बार-बार सवाल उठते हैं? क्या विभागीय प्रमुखों द्वारा अपने दायित्वों का अपेक्षित निर्वहन नहीं किया जा रहा है? क्या योजनाओं की नियमित समीक्षा नहीं हो रही है? क्या निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया का प्रभावी परीक्षण किया जा रहा है?
ये सभी ऐसे प्रश्न हैं, जिनकी निष्पक्ष समीक्षा और जांच आवश्यक है।
यह सही है कि जिले के मुखिया यानी कलेक्टर के पास अनेक विभागों, योजनाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का व्यापक दायित्व होता है। प्रत्येक छोटे-बड़े कार्य को स्वयं देख पाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं हो सकता कि विभागीय स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही, मनमानी या अनियमितता की शिकायतों को नजरअंदाज किया जाए।
प्रत्येक विभाग प्रमुख का यह मूल दायित्व है कि शासन द्वारा सौंपे गए कार्यों का ईमानदारी, पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुरूप निर्वहन करे। यदि कोई विभाग प्रमुख अपने दायित्वों के प्रति उदासीन रहता है, तो उसकी जवाबदेही भी निर्धारित होनी चाहिए।
अब जरूरत केवल समीक्षा की नहीं, ठोस कार्रवाई की है
जिला प्रशासन को अब कुछ ऐसे ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, जिनसे प्रत्येक विभाग में प्रशासनिक कसावट दिखाई दे।
- नियमित विभागीय समीक्षा: प्रत्येक विभाग के कार्यों, लंबित प्रकरणों और विकास योजनाओं की समयबद्ध समीक्षा हो तथा समीक्षा के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।
- निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच: सड़क, नाली, भवन, पेयजल और अन्य निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण कराया जाए। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों की जवाबदेही तय हो।
- समय-सीमा का सख्ती से पालन: शासन द्वारा स्वीकृत कार्य निर्धारित समय में पूरे हों। अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित अधिकारी से लिखित जवाब मांगा जाए।
- शिकायतों का प्रभावी निराकरण: आम नागरिकों से प्राप्त शिकायतों को केवल औपचारिकता के रूप में न लिया जाए। प्रत्येक शिकायत की जांच, कार्रवाई और निराकरण की निगरानी हो।
- शासकीय धन के उपयोग की जांच: योजनाओं में खर्च की गई राशि, कार्य की वास्तविक प्रगति, भुगतान और भौतिक सत्यापन के बीच पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
- लापरवाह अधिकारियों पर जवाबदेही: जिन मामलों में जांच के दौरान लापरवाही, नियमों का उल्लंघन या वित्तीय अनियमितता प्रमाणित हो, उनमें नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए।
जिले की प्रशासनिक छवि सुधारने की जिम्मेदारी सामूहिक है
यह बात भी समझनी होगी कि किसी जिले का विकास केवल बजट स्वीकृत होने या योजनाओं की घोषणा से नहीं होता। विकास तब दिखाई देता है, जब सड़कें निर्धारित गुणवत्ता के साथ बनती हैं, नालियां सही ढंग से बिछाई जाती हैं, अस्पतालों में सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, शिक्षा व्यवस्था बेहतर होती है और आम नागरिक को सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।
सरकार की योजनाओं को धरातल पर सफल बनाना विभागीय अधिकारियों और प्रशासनिक नेतृत्व की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जिले के मुखिया के रूप में कलेक्टर की भूमिका यहां अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रशासनिक नेतृत्व ऐसा होना चाहिए कि प्रत्येक विभाग प्रमुख अपने दायित्वों को लेकर गंभीर रहे। किसी भी कार्य में लापरवाही करने, निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी करने अथवा नियमों से हटकर काम करने से पहले संबंधित जिम्मेदार अधिकारी को जवाबदेही का एहसास हो।
अंतिम सवाल: सरकार के प्रयासों का वास्तविक परिणाम जनता को कब दिखाई देगा?
जांजगीर-चांपा जिले को ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता है, जहां नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक विभाग की कार्यप्रणाली में दिखाई दे। जहां निरीक्षण केवल औपचारिकता न हो, बल्कि उसका परिणाम भी सामने आए। जहां शिकायतों को दबाने के बजाय उनकी निष्पक्ष जांच हो और जहां जवाबदेही केवल निचले स्तर तक सीमित न रहकर विभाग प्रमुखों तक भी पहुंचे।
यह किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध आरोप लगाने का विषय नहीं, बल्कि जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने की आवश्यकता है।
जिला कलेक्टर से अपेक्षा है कि वे इस विषय को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए सभी विभागों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करें, जहां आवश्यकता हो वहां विशेष जांच कराएं और प्रशासनिक स्तर पर ऐसी कसावट सुनिश्चित करें कि शासन की किसी भी योजना में लापरवाही, मनमानी या अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
आखिरकार सरकार की उपलब्धियां तभी जनता तक पहुंचेंगी, जब उन उपलब्धियों को धरातल पर उतारने वाले विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा और जवाबदेही के साथ निभाएंगे। सरकार की मंशा और जनता की अपेक्षाओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी जिला प्रशासन ही है। इस कड़ी को मजबूत करना आज जांजगीर-चांपा की सबसे बड़ी जरूरत है।