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विदेश

ट्रंप की ईरान को फिर हमले की चेतावनी, होर्मुज की समुद्री इंटरनेट केबल काटने की धमकी से बढ़ा वैश्विक संकट!

अमेरिका और इजराइल के संभावित हमले के बीच ईरान की चेतावनी, खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों पर मंडराया खतरा; इंटरनेट, वित्तीय लेनदेन और तकनीकी कारोबार पर पड़ सकता है असर

NTN REPORT// नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है। वहीं, ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजराइल ने फिर से हमला किया, तो ईरान खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बना सकता है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में युद्ध के और व्यापक होने के साथ-साथ वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था, वित्तीय लेनदेन और तकनीकी कारोबार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल दुनिया के विभिन्न देशों के बीच इंटरनेट और डेटा के आदान-प्रदान का प्रमुख माध्यम हैं। ऐसे में इन केबलों को नुकसान पहुंचने से संचार सेवाओं, ऑनलाइन कारोबार और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर असर पड़ सकता है।

ट्रंप ने फिर सैन्य कार्रवाई के दिए संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा में आयोजित एक रैली के दौरान कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान चला सकता है। इस दौरान उन्होंने ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ का उल्लेख किया, जो ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान से जुड़ा नाम है।

हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई कब करेगा और उसका स्वरूप क्या होगा। उनके बयान के बाद क्षेत्र में संघर्ष फिर तेज होने की आशंका बढ़ गई है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास युद्ध को बहुत जल्द समाप्त करने की क्षमता है। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि क्या युद्ध को तुरंत खत्म करना चाहिए या फिर विरोधी पक्ष की ताकत को धीरे-धीरे कमजोर होने देना चाहिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति के इन बयानों से संकेत मिलता है कि ईरान के साथ संघर्ष को लेकर वाशिंगटन में सैन्य विकल्प पर विचार जारी है। हालांकि, आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

ईरान ने समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काटने की दी चेतावनी

अमेरिका और इजराइल की ओर से संभावित नए हमले की आशंका के बीच ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि यदि ईरान पर दोबारा हमला किया गया, तो समुद्र के नीचे मौजूद संचार नेटवर्क भी निशाने पर आ सकते हैं।

एक ईरानी अधिकारी ने दावा किया कि समुद्र के नीचे बिछी केबलों से लेकर सैन्य ठिकानों तक कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं रहेगा। अधिकारी के अनुसार, ईरान को इन केबलों तक पहुंच होने का भरोसा है और वह उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने भी चेतावनी दी कि यदि ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो जवाबी कार्रवाई में होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबलों को निशाना बनाया जा सकता है।

हालांकि, यह अभी एक संभावित कार्रवाई से जुड़ी चेतावनी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन केबलों को वास्तव में नुकसान पहुंचाया गया है।

आखिर समुद्र के नीचे क्यों बिछाई जाती हैं इंटरनेट केबल?

दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच इंटरनेट डेटा पहुंचाने में समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ये केबल महाद्वीपों, देशों और प्रमुख डिजिटल केंद्रों को आपस में जोड़ती हैं।

इनके माध्यम से वीडियो कॉल, वेबसाइटों का संचालन, ऑनलाइन भुगतान, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, डिजिटल सेवाएं और कंपनियों के बीच डेटा का आदान-प्रदान होता है।

वैश्विक इंटरनेट यातायात का अधिकांश हिस्सा इन्हीं समुद्री केबलों के माध्यम से संचालित होता है। उपग्रह आधारित संचार भी मौजूद है, लेकिन अंतरमहाद्वीपीय डेटा के बड़े पैमाने पर आदान-प्रदान के लिए समुद्री केबल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

ऐसे में यदि किसी रणनीतिक क्षेत्र में कई केबल एक साथ क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो संबंधित देशों और क्षेत्रों में इंटरनेट की गति, नेटवर्क की क्षमता और डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की केबलों पर खतरा कितना गंभीर?

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों का परिवहन होता है।

अब इस क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। हालांकि, इस मार्ग से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट क्षमता का हिस्सा वैश्विक स्तर पर एक प्रतिशत से भी कम बताया गया है।

इसके बावजूद इस क्षेत्र में केबलों को नुकसान पहुंचने का प्रभाव केवल इंटरनेट की गति तक सीमित नहीं रह सकता। खाड़ी के देशों में स्थित डेटा केंद्रों, वित्तीय संस्थानों और तकनीकी कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी भी प्रभावित हो सकती है।

इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी केबलें क्षतिग्रस्त होती हैं, वैकल्पिक नेटवर्क में कितनी क्षमता उपलब्ध है और डेटा यातायात को दूसरे मार्गों पर कितनी तेजी से भेजा जा सकता है।

इंटरनेट से लेकर बैंकिंग और ऑनलाइन कारोबार तक पड़ सकता है असर

यदि खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी महत्वपूर्ण संचार केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो इसके कई तरह के प्रभाव सामने आ सकते हैं।

1. इंटरनेट की गति प्रभावित होने की आशंका

केबलों को नुकसान पहुंचने से कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट की गति धीमी हो सकती है। हालांकि, प्रभाव की गंभीरता उपलब्ध वैकल्पिक मार्गों और नेटवर्क की क्षमता पर निर्भर करेगी।

2. वित्तीय लेनदेन में परेशानी

अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और वित्तीय संस्थानों के बीच डेटा का आदान-प्रदान प्रभावित हो सकता है। यदि नेटवर्क पर दबाव बढ़ता है, तो कुछ सेवाओं में देरी या अस्थायी व्यवधान की आशंका हो सकती है।

3. ऑनलाइन कारोबार पर असर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली कंपनियों, इंटरनेट आधारित कारोबार और डिजिटल सेवा प्रदाताओं को कनेक्टिविटी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

4. क्लाउड सेवाओं में व्यवधान

क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाएं विभिन्न देशों में मौजूद डेटा केंद्रों और नेटवर्क के माध्यम से संचालित होती हैं। समुद्री केबलों में खराबी आने से कुछ सेवाओं की उपलब्धता या प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

5. तकनीकी कंपनियों की लागत बढ़ने का खतरा

केबलों की मरम्मत, वैकल्पिक नेटवर्क के इस्तेमाल और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अतिरिक्त खर्च हो सकता है। संघर्ष के दौरान समुद्री क्षेत्र में काम करना भी अधिक जोखिम भरा हो सकता है।

युद्ध के दौरान केबलों की मरम्मत बन सकती है बड़ी चुनौती

समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों में खराबी आने पर विशेष जहाजों और तकनीकी उपकरणों की मदद से मरम्मत की जाती है। यह काम समय लेने वाला होता है और इसके लिए संबंधित समुद्री क्षेत्र तक सुरक्षित पहुंच जरूरी होती है।

यदि किसी क्षेत्र में युद्ध या सैन्य तनाव जारी रहता है, तो मरम्मत दलों को वहां पहुंचने में कठिनाई हो सकती है। इसके अलावा बीमा लागत बढ़ने, समुद्री सुरक्षा संबंधी प्रतिबंधों और अनुमति मिलने में देरी के कारण मरम्मत का काम प्रभावित हो सकता है।

इस स्थिति में नेटवर्क को सामान्य होने में अधिक समय लग सकता है। हालांकि, वास्तविक समय इस बात पर निर्भर करेगा कि खराबी कहां हुई है, कितनी केबलें प्रभावित हुई हैं और वैकल्पिक कनेक्टिविटी कितनी उपलब्ध है।

खाड़ी देशों के तकनीकी निवेश पर भी मंडराया खतरा

खाड़ी के कई देश अपनी अर्थव्यवस्था को तेल और गैस पर निर्भरता से आगे बढ़ाकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

इसके लिए डेटा केंद्रों, संचार नेटवर्क और डिजिटल बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश किए जा रहे हैं। अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के साथ इन देशों का सहयोग भी बढ़ा है।

ऐसे में क्षेत्र में सैन्य संघर्ष बढ़ने से इन निवेशों और तकनीकी परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।

रिपोर्ट में संयुक्त अरब अमीरात में अमेजन वेब सर्विसेज की दो सुविधाओं को मार्च में हुए हमलों के दौरान नुकसान पहुंचने का भी उल्लेख किया गया है। बहरीन में भी उसकी एक सुविधा के पास बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।

यदि क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो कंपनियों को अपनी सुविधाओं की सुरक्षा, डेटा नेटवर्क की विश्वसनीयता और वैकल्पिक कनेक्टिविटी पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।

माइक्रोसॉफ्ट का मध्य पूर्व में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर निवेश

मध्य पूर्व में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तकनीकी कंपनियां नए नेटवर्क और वैकल्पिक कनेक्टिविटी मार्गों पर भी काम कर रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने वर्ष 2030 तक मध्य पूर्व में समुद्र के नीचे और जमीन के रास्ते कनेक्टिविटी पर 40 करोड़ डॉलर से अधिक निवेश करने की योजना बनाई है।

जमीन के रास्ते उपलब्ध नेटवर्क और दूसरे समुद्री मार्ग संकट के समय इंटरनेट यातायात को वैकल्पिक रास्तों से भेजने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन मार्गों की उपलब्धता और क्षमता यह तय करेगी कि किसी बड़े व्यवधान की स्थिति में सेवाओं को किस हद तक सामान्य रखा जा सकता है।

फ्रांस और तुर्की ने सैन्य कार्रवाई से बचने की दी सलाह

ईरान के खिलाफ संभावित नए हमले की आशंका के बीच कई देशों ने तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान निकालने पर जोर दिया है।

शुक्रवार को इस्तांबुल में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और इटली के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा और संघर्ष को बढ़ने से रोकने के उपायों पर चर्चा की गई।

तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने चेतावनी दी कि ईरान पर नया हमला क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि संघर्ष का विस्तार पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। उनके अनुसार, इस संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकालना चाहिए।

फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने भी नई सैन्य कार्रवाई से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से किसी को लाभ नहीं होगा और इसका असर तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, ताकि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोका जा सके।

तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक असर की आशंका

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का असर ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। यहां किसी भी बड़े व्यवधान से तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।

यदि सैन्य संघर्ष और व्यापक होता है, तो तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसका असर परिवहन लागत, औद्योगिक उत्पादन और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने की आशंका रहेगी।

इसके साथ ही डिजिटल बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की स्थिति में तकनीकी कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और ऑनलाइन कारोबार के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

हालांकि, तेल की कीमतों और इंटरनेट सेवाओं पर वास्तविक प्रभाव संघर्ष की तीव्रता, आपूर्ति व्यवस्था, वैकल्पिक नेटवर्क और संबंधित देशों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

क्या दुनिया का इंटरनेट बंद हो सकता है?

खाड़ी क्षेत्र में कुछ समुद्री इंटरनेट केबलों को नुकसान पहुंचने का अर्थ यह नहीं है कि पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाएगा। वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क में कई वैकल्पिक समुद्री और स्थलीय मार्ग मौजूद हैं।

यदि किसी मार्ग पर व्यवधान आता है, तो नेटवर्क संचालक उपलब्ध क्षमता के अनुसार डेटा को दूसरे रास्तों से भेजने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन यदि एक साथ कई महत्वपूर्ण केबल क्षतिग्रस्त हो जाएं और वैकल्पिक मार्गों की क्षमता पर्याप्त न हो, तो कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट की गति कम हो सकती है तथा डिजिटल सेवाओं में रुकावट आ सकती है।

इसलिए मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ी चिंता पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद होने की नहीं, बल्कि खाड़ी क्षेत्र की कनेक्टिविटी, डिजिटल कारोबार और महत्वपूर्ण संचार नेटवर्क पर संभावित दबाव की है।

फिलहाल कूटनीति पर टिकी नजरें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई संबंधी चेतावनी और ईरान की जवाबी धमकी ने पश्चिम एशिया में तनाव को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। एक ओर सैन्य विकल्प की चर्चा हो रही है, तो दूसरी ओर कई देश बातचीत के जरिए संकट का समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं।

यदि संघर्ष दोबारा तेज होता है, तो उसका असर केवल सैन्य ठिकानों और ऊर्जा आपूर्ति तक सीमित नहीं रह सकता। समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों, डेटा केंद्रों और डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन सकती है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई करेगा या नहीं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के रुख और कूटनीतिक प्रयासों से यह तय होगा कि क्षेत्र में तनाव कम होता है या संघर्ष और व्यापक रूप लेता है।

अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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