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भारतव्यापार जगत

चीनी पर सरकार का बड़ा फैसला: 10 लाख टन कच्ची चीनी ड्यूटी फ्री आयात, जानिए उत्पादन से खपत तक पूरा गणित

NTN REPORT// नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और आगामी त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह आयात टैरिफ रेट कोटा यानी टीआरक्यू के तहत किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर नियंत्रण रखना है।

प्रतीकात्मक एआई तस्वीर

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक होने के साथ-साथ दुनिया के सबसे बड़े चीनी उपभोक्ताओं में शामिल है। घरेलू उत्पादन का बड़ा हिस्सा देश के भीतर ही खप जाता है। ऐसे में उत्पादन, घरेलू खपत, इथेनॉल के लिए गन्ने या चीनी का उपयोग और शुरुआती भंडार—इन सभी का संतुलन चीनी की कीमतों पर सीधा असर डालता है।

पहली बार नहीं, लेकिन करीब एक दशक बाद चीनी आयात

भारत आमतौर पर चीनी का बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश रहा है। चीनी के आयात पर सामान्य तौर पर 100 प्रतिशत शुल्क लागू रहा है। इसी वजह से सामान्य परिस्थितियों में भारत में आयात बेहद सीमित रहता है।

सरकार के मौजूदा फैसले को करीब एक दशक बाद चीनी के आयात की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले 2016-17 में सूखे और कम गन्ना उत्पादन के कारण भारत को चीनी आयात करनी पड़ी थी।

इस बार सरकार ने सफेद या परिष्कृत चीनी पर सामान्य आयात शुल्क हटाने के बजाय 10 लाख टन कच्ची चीनी के लिए सीमित शुल्क-मुक्त कोटा दिया है।

आखिर भारत में कितनी चीनी पैदा होती है?

भारत में सामान्य तौर पर हर साल लगभग 30 से 35 मिलियन टन यानी 300 से 350 लाख टन के आसपास चीनी का सकल उत्पादन होता है। उत्पादन में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक सबसे महत्वपूर्ण राज्य हैं।

2025-26 चीनी सीजन के लिए भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ के शुरुआती अनुमान में सकल उत्पादन को करीब 32.4 मिलियन टन आंका गया था। इसमें से लगभग 3.1 मिलियन टन चीनी के बराबर मात्रा इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट होने का अनुमान था। इससे शुद्ध चीनी उपलब्धता करीब 29.3 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया गया था।

बाद में अप्रैल 2026 में उद्योग के अनुमान में सकल उत्पादन को करीब 32 मिलियन टन और इथेनॉल के लिए डायवर्जन को लगभग 3.4 मिलियन टन तक माना गया, जिससे शुद्ध उपलब्धता लगभग 28.5 मिलियन टन रहने का अनुमान सामने आया।

क्या इथेनॉल की वजह से चीनी की कमी हुई?

चीनी की कीमतों में तेजी के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या गन्ने या चीनी को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने से घरेलू बाजार में चीनी की कमी हुई है।

आंकड़ों के अनुसार, इथेनॉल के लिए चीनी का उपयोग जरूर बढ़ा है, लेकिन मौजूदा संकट को केवल इथेनॉल के कारण हुई कमी बताना पूरी तस्वीर नहीं है। सरकार और उद्योग के आंकड़ों में उत्पादन, गन्ने की पैदावार, चीनी की शुरुआती उपलब्धता और मौसम जैसे कई कारक शामिल हैं।

ताजा सरकारी आकलन में भी कहा गया है कि मौजूदा सीजन में उत्पादन शुरुआती अनुमान से कम रहने की प्रमुख वजह कम पैदावार और प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में उत्पादन से जुड़ी समस्याएं हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा कमी को केवल इथेनॉल के लिए चीनी डायवर्ट किए जाने से जोड़ना सही नहीं होगा।

भारत में हर साल कितनी चीनी खपत होती है?

भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उपभोक्ता देशों में शामिल है। घरेलू बाजार में हर साल लगभग 28 से 28.5 मिलियन टन चीनी की खपत होती है।

2025-26 के लिए उद्योग के एक अनुमान में घरेलू खपत करीब 28.3 मिलियन टन मानी गई थी।

यही वजह है कि भारत में उत्पादन थोड़ा भी कम होने पर बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर दबाव तेजी से बढ़ सकता है।

गन्ने की खेती कितने क्षेत्र में होती है?

भारत में चीनी उद्योग की पूरी अर्थव्यवस्था गन्ने पर निर्भर है। मौजूदा सीजन में देश में लगभग 5.7 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होने का अनुमान है।

गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक प्रमुख राज्य हैं। यही राज्य देश के चीनी उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान देते हैं।

2025-26 के उद्योग अनुमान में महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन करीब 10.6 मिलियन टन, उत्तर प्रदेश का करीब 9.3 मिलियन टन और कर्नाटक का करीब 4.8 मिलियन टन आंका गया था।

भारत चीनी का आयात कितना करता है?

सामान्य परिस्थितियों में भारत बहुत कम चीनी आयात करता है। इसकी बड़ी वजह आयात पर लगने वाला ऊंचा शुल्क और देश में पर्याप्त घरेलू उत्पादन है।

करीब एक दशक तक भारत को नियमित रूप से चीनी आयात करने की जरूरत नहीं पड़ी। अब सरकार ने कीमतों और घरेलू उपलब्धता को देखते हुए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है।

सरकार के अनुसार यह व्यवस्था 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी।

भारत कितनी चीनी का निर्यात करता है?

भारत चीनी का बड़ा निर्यातक भी रहा है, लेकिन घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के कारण निर्यात की मात्रा हर सीजन में अलग-अलग रहती है।

2025-26 सीजन के लिए उद्योग के फरवरी अनुमान में करीब 7 लाख टन निर्यात का अनुमान लगाया गया था।

मौजूदा समय में सरकार का मुख्य फोकस घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने पर है।

चीनी की कीमतों में क्यों आई तेजी?

चीनी की कीमतों में हाल के महीनों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। सरकार के शुल्क-मुक्त आयात के फैसले के पीछे भी घरेलू कीमतों में हुई इस तेजी को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

20 अगस्त के आसपास उपलब्ध मंडी आंकड़ों में:

  • असम के फैंसी बाजार: अधिकतम करीब ₹5,600 प्रति क्विंटल
  • महाराष्ट्र के मुंबई बाजार: करीब ₹4,100 से ₹4,850 प्रति क्विंटल
  • जयपुर अनाज मंडी: करीब ₹4,475 प्रति क्विंटल

का भाव दर्ज किया गया।

वहीं ताजा सरकारी/उद्योग आधारित रिपोर्टों के मुताबिक देश में चीनी के औसत एक्स-मिल भाव में पिछले साल की तुलना में बड़ी बढ़ोतरी हुई है और त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की आशंका ने कीमतों पर दबाव और बढ़ाया है।

त्योहारों से पहले सरकार क्यों हुई सक्रिय?

अगस्त से नवंबर के बीच देश में गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहार आते हैं। इस दौरान मिठाइयों, खाद्य पदार्थों और अन्य उत्पादों में चीनी की मांग बढ़ जाती है।

सरकार को आशंका है कि यदि इस दौरान घरेलू बाजार में उपलब्धता कम रही तो कीमतों पर और दबाव आ सकता है। इसी वजह से सरकार ने आयात के साथ-साथ बड़े थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा जैसे कदम भी उठाए हैं।

चीनी का पूरा गणित एक नजर में

आंकड़ा स्थिति
भारत की वैश्विक स्थिति दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक
सामान्य वार्षिक उत्पादन करीब 300-350 लाख टन
2025-26 सकल उत्पादन का अनुमान करीब 320-324 लाख टन
इथेनॉल के लिए डायवर्जन करीब 31-34 लाख टन
अनुमानित शुद्ध उपलब्धता करीब 285-293 लाख टन
घरेलू वार्षिक खपत करीब 283-285 लाख टन
मौजूदा शुल्क-मुक्त आयात 10 लाख टन कच्ची चीनी
आयात की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026
सामान्य चीनी आयात शुल्क 100 प्रतिशत
प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक

असली सवाल: क्या आयात से चीनी सस्ती होगी?

सरकार के इस फैसले का सीधा उद्देश्य बाजार में अतिरिक्त चीनी उपलब्ध कराकर कीमतों पर दबाव कम करना है। करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी का आयात घरेलू आपूर्ति को बढ़ाएगा और त्योहारों से पहले बाजार में उपलब्धता बेहतर करने में मदद कर सकता है।

हालांकि आयात का पूरा असर तत्काल दिखाई देना जरूरी नहीं है। विदेश से आने वाली चीनी को भारत पहुंचने, रिफाइन करने और बाजार में उतारने में समय लगेगा। इसलिए आने वाले हफ्तों में कीमतों की दिशा घरेलू उत्पादन, स्टॉक, त्योहारों की मांग और आयात की वास्तविक गति पर निर्भर करेगी।

भारत चीनी उत्पादन में दुनिया की बड़ी ताकत है, लेकिन उत्पादन जितना बड़ा है, घरेलू खपत भी उतनी ही बड़ी है। यही वजह है कि उत्पादन में मामूली कमी या शुरुआती स्टॉक में गिरावट होने पर बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

मौजूदा परिस्थितियों में सरकार का 10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात कराने का फैसला इसी आपूर्ति अंतर को पाटने और त्योहारों से पहले कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश है। करीब एक दशक बाद लिए गए इस फैसले ने चीनी उत्पादन, इथेनॉल नीति, किसानों, चीनी मिलों और उपभोक्ताओं के बीच संतुलन को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

नोट: चीनी उत्पादन के आंकड़े चीनी सीजन और अनुमान जारी होने की तारीख के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए सकल उत्पादन, इथेनॉल के लिए डायवर्जन और शुद्ध उपलब्धता के आंकड़ों को संबंधित अनुमान के संदर्भ में पढ़ना चाहिए।

यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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