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खेल

आईपीएल की चमक से इंग्लैंड की चुनौती तक: वैभव सूर्यवंशी की तीन छोटी पारियां, लेकिन सीख बहुत बड़ी

NTN REPORT// नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से गेंदबाजों पर दबदबा बनाने वाले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी इन दिनों इंग्लैंड दौरे पर एक बिल्कुल अलग चुनौती का सामना कर रहे हैं। चौकों-छक्कों की बारिश कर कुछ ही महीनों में भारतीय क्रिकेट का चर्चित चेहरा बने वैभव की इंग्लैंड में 14, 13 और 15 रन की लगातार तीन पारियां भले ही उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं, लेकिन क्रिकेट जानकारों की नजर में यही शुरुआती संघर्ष उनके भविष्य की सबसे अहम सीख साबित हो सकता है।

फाइल फोटो

महज 15 वर्ष की उम्र में भारतीय टीम तक पहुंचने वाले वैभव सूर्यवंशी को लेकर स्वाभाविक रूप से उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। सबसे कम उम्र में भारत के लिए खेलने का रिकॉर्ड बनाने के बाद उनसे हर मैच में बड़ी पारी की अपेक्षा की जाने लगी। हालांकि क्रिकेट का इतिहास बताता है कि किसी खिलाड़ी की वास्तविक परीक्षा शुरुआती सफलता से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में उसके प्रदर्शन और सीखने की क्षमता से होती है।

आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चुनौती अलग

आईपीएल ने वैभव को पहचान, लोकप्रियता और आत्मविश्वास दिया, लेकिन इंग्लैंड का दौरा उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वास्तविक कठिनाइयों से परिचित करा रहा है। इंग्लैंड की परिस्थितियों में नई गेंद लगातार स्विंग करती है, अतिरिक्त उछाल मिलता है और बल्लेबाज की छोटी-सी तकनीकी गलती भी उसके विकेट का कारण बन सकती है। ऐसे हालात में केवल आक्रामक बल्लेबाजी नहीं, बल्कि धैर्य, तकनीक और सही निर्णय लेने की क्षमता सबसे अधिक मायने रखती है।

यही कारण है कि दुनिया के कई दिग्गज बल्लेबाज भी इंग्लैंड में संघर्ष करते रहे हैं। ऐसे में किसी 15 वर्षीय बल्लेबाज से हर मुकाबले में विस्फोटक शतक की उम्मीद करना वास्तविकता से अधिक कल्पना माना जाएगा।

सिर्फ वैभव नहीं, पूरी बल्लेबाजी कर रही है संघर्ष

इंग्लैंड दौरे पर भारतीय बल्लेबाजी इकाई भी पूरी तरह लय में नजर नहीं आई है। अभिषेक शर्मा और कप्तान श्रेयस अय्यर को छोड़ दें तो अधिकांश बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में सफल नहीं हो सके हैं। ऐसे में लगातार तीन छोटी पारियों का पूरा दबाव अकेले वैभव सूर्यवंशी पर डालना उचित नहीं माना जा सकता। यह टीम के सामूहिक प्रदर्शन का भी हिस्सा है।

महान खिलाड़ी असफलताओं से ही बनते हैं

क्रिकेट के इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं, जहां शुरुआती असफलताओं के बाद खिलाड़ियों ने महान उपलब्धियां हासिल कीं। सचिन तेंदुलकर भी अपने पहले दो एकदिवसीय मुकाबलों में खाता खोले बिना पवेलियन लौटे थे, लेकिन बाद में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक लगाने का ऐतिहासिक कीर्तिमान बनाया।

इसी तरह वैभव सूर्यवंशी का मूल्यांकन भी केवल तीन पारियों के आधार पर नहीं किया जा सकता। शुरुआती असफलताएं अक्सर खिलाड़ी को अपनी कमियां पहचानने और उन्हें दूर करने का सबसे बड़ा अवसर देती हैं। जितनी जल्दी कमजोरियां सामने आती हैं, सुधार की प्रक्रिया भी उतनी ही जल्दी शुरू हो जाती है।

तकनीक ही नहीं, सोच में बदलाव भी जरूरी

वैभव की बल्लेबाजी में शॉर्ट-पिच गेंदों के खिलाफ कमजोरी की चर्चा पहले भी होती रही है। आईपीएल के दौरान इस पर सवाल उठे थे और श्रीलंका की त्रिकोणीय श्रृंखला में भी यह पहलू सामने आया था। इंग्लैंड दौरे में तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने भी इसी कमजोरी को निशाना बनाया।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीकी सुधार ही पर्याप्त नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हर गेंद पर आक्रामक शॉट खेलने की जरूरत नहीं होती। कई बार गेंद को छोड़ देना, बाउंसर के नीचे झुक जाना या परिस्थितियों के अनुसार संयम दिखाना ही सफल बल्लेबाजी की पहचान होती है। चेस्टर-ली-स्ट्रीट में विल जैक्स के खिलाफ क्रीज छोड़कर स्टंप होना भी यही संकेत देता है कि वैभव अभी परिस्थितियों के अनुरूप अपनी बल्लेबाजी को ढालने की प्रक्रिया में हैं।

हाइप कम होना भी हो सकता है सकारात्मक संकेत

पिछले कुछ महीनों में वैभव सूर्यवंशी को लेकर जिस तरह का माहौल बना, उससे उन पर अपेक्षाओं का दबाव भी काफी बढ़ गया था। हर पारी में बड़ी सफलता की उम्मीद की जाने लगी और टीम चयन से जुड़े फैसलों पर भी लगातार बहस होती रही।

अब लगातार तीन छोटी पारियों के बाद स्वाभाविक रूप से यह दबाव कुछ कम हो सकता है। इससे टीम प्रबंधन भी अधिक संतुलित निर्णय लेने की स्थिति में होगा और वैभव को भी हर मुकाबले में खुद को साबित करने की मानसिक मजबूरी से राहत मिलेगी। इससे उनके विकास की प्रक्रिया अधिक स्वाभाविक बन सकती है।

भारतीय क्रिकेट के लिए भी बड़ा संदेश

वैभव सूर्यवंशी की यह कहानी केवल एक युवा बल्लेबाज के संघर्ष की नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के मौजूदा दौर की भी तस्वीर पेश करती है। सोशल मीडिया के दौर में किसी खिलाड़ी को बहुत कम समय में भविष्य का सुपरस्टार घोषित कर दिया जाता है, जबकि कुछ खराब पारियों के बाद उसी खिलाड़ी पर सवाल भी उठने लगते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि 15 वर्ष के खिलाड़ी को सबसे अधिक जरूरत समय, मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास की होती है। यदि भारतीय क्रिकेट वास्तव में वैभव सूर्यवंशी को आने वाले वर्षों में टीम इंडिया का मजबूत स्तंभ बनते देखना चाहता है, तो उसके लिए धैर्य सबसे बड़ी आवश्यकता होगी। क्योंकि महान खिलाड़ी तीन सफल पारियों से नहीं बनते और कई बार तीन असफल पारियां ही उन्हें महान बनने की सही दिशा दिखा देती हैं।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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