राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद बड़ा बदलाव: ड्यूटी बढ़ी, वेतन घटा, करीब दो दर्जन कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा!
NTN REPORT// अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच के बाद मंदिर की कार्यप्रणाली में किए गए बदलावों का असर अब कर्मचारियों पर भी दिखाई देने लगा है। चढ़ावे की गिनती करने वाले करीब दो दर्जन कर्मचारियों ने ड्यूटी की नई व्यवस्था, वेतन में कटौती और अवकाश कम किए जाने का आरोप लगाते हुए सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि नई व्यवस्था के कारण उन पर काम का बोझ काफी बढ़ गया है, जबकि सुविधाओं में कोई सुधार नहीं किया गया।

दो शिफ्ट की जगह एक शिफ्ट, छह घंटे से बढ़कर नौ घंटे हुई ड्यूटी
इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों के अनुसार पहले चढ़ावे की गिनती का कार्य दो शिफ्टों में कराया जाता था, जिससे काम का संतुलित बंटवारा रहता था और प्रत्येक कर्मचारी की ड्यूटी लगभग छह घंटे की होती थी। लेकिन हाल ही में व्यवस्था बदलकर पूरा काम एक ही शिफ्ट में कराया जाने लगा। कर्मचारियों का आरोप है कि इससे उनकी ड्यूटी करीब नौ घंटे तक पहुंच गई, जबकि कर्मचारियों की संख्या भी पहले जैसी नहीं रही। ऐसे में काम का दबाव लगातार बढ़ता गया।
वेतन में कटौती और समान कार्य के लिए अलग-अलग भुगतान का आरोप
कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि नई व्यवस्था लागू होने के साथ उनकी मासिक सैलरी भी पहले की तुलना में कम कर दी गई। इसके अलावा समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन दिए जाने से भी असंतोष बढ़ा है। हालांकि इस संबंध में संबंधित एजेंसी या बैंक की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
अवकाश कम होने से बढ़ी कर्मचारियों की नाराजगी
इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों का कहना है कि पहले उन्हें नियमित मासिक अवकाश मिलता था, लेकिन नई व्यवस्था में छुट्टियों की संख्या कम कर दी गई है। लगातार लंबे समय तक काम करने की मजबूरी के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता गया। उनका दावा है कि उन्होंने कई बार अपनी समस्याएं संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखीं, लेकिन समाधान नहीं निकला।
मांगपत्र सौंपने के बाद दिया सामूहिक इस्तीफा
सूत्रों के अनुसार, ड्यूटी समाप्त होने के बाद कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से विरोध दर्ज कराया। इसके बाद उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक की तुलसी उद्यान शाखा तथा संबंधित सुरक्षा एजेंसी को अपना मांगपत्र और इस्तीफा सौंप दिया। कर्मचारियों का कहना है कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें नौकरी छोड़ने का निर्णय लेना पड़ा।
अगले ही दिन व्यवस्था पर पड़ा असर
सामूहिक इस्तीफे का असर अगले ही दिन देखने को मिला। जानकारी के अनुसार चढ़ावे की गिनती के लिए केवल करीब एक दर्जन कर्मचारी ही ड्यूटी पर पहुंचे। इससे व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बनने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि मंदिर में चढ़ावे की गिनती का कार्य निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी रखा गया।
नए कर्मचारियों की भर्ती होगी, लेकिन होगी कड़ी जांच
बैंक सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों की जगह नए लोगों की भर्ती की जाएगी। हालांकि इस बार भर्ती प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सख्त होगी। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद नए कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन, दस्तावेजों की जांच तथा पृष्ठभूमि का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। इसी कारण नई नियुक्तियों में सामान्य से अधिक समय लग सकता है।
चढ़ावा चोरी के बाद बदली गई पूरी व्यवस्था
सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन, बैंक और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरी व्यवस्था की समीक्षा शुरू की थी। इसके बाद निगरानी बढ़ाने, जवाबदेही तय करने और चढ़ावे की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से कई प्रशासनिक बदलाव किए गए। कर्मचारियों का कहना है कि इन बदलावों का सबसे अधिक असर उन पर पड़ा है।
22 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 22 जुलाई को प्रस्तावित बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में चढ़ावा प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार और नई कार्यप्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। कर्मचारियों के सामूहिक इस्तीफे का मुद्दा भी अप्रत्यक्ष रूप से चर्चा का विषय बन सकता है।
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में चढ़ावे की गिनती, उसका रिकॉर्ड तैयार करने और सुरक्षित जमा कराने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी एक साथ नौकरी छोड़ते हैं तो नई नियुक्तियां होने तक मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ सकता है। दूसरी ओर, जांच के बाद प्रशासन किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचना चाहता है, इसलिए नई भर्ती में विस्तृत सत्यापन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है।
अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है। संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर समाचार को अद्यतन किया जा सकता है।