
आखिर पांच माह की बच्ची का क्या दोष ? शिक्षिका मां को पालन अवकाश का नहीं अधिकार ,पांच माह की बच्ची के संतान पालन अवकाश के लिए प्रभारी प्राचार्य के द्वारा किया जा रहा प्रताड़ित,शिक्षिका के द्वारा की गई शिकायत
जांजगीर चाम्पा 22 दिसम्बर 2024 // जांजगीर चाम्पा जिले का शिक्षा विभाग आए दिन किसी ना किसी मामले को लेकर सुर्खियों में रहता है। इस बार ऐसा मामला सामने आया है जिसे जानकर आप का भी दिल पसीज जायेगा।
यहां बात हो रही है शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तागा विकासखंड अकलतरा में पदस्थ व्याख्याता एलबी श्रीमती प्रीति पाण्डेय की जिनकी बच्ची पांच माह की है जिसके पालन हेतु शिक्षिका संतान पालन अवकाश लेना चाह रही है जिसके लिए नियमानुसार आवेदन की परंतु तागा स्कूल के प्रभारी प्राचार्य वीपी कश्यप ने संतान पालन के आवेदन को लेने से इनकार करते हुए तरह तरह की बात करते हुए प्रताड़ित करना चालू कर दिया।
व्याख्याता शिक्षिका श्रीमती प्रीति पाण्डेय के द्वारा बार-बार आग्रह करने पर प्रभारी कश्यप के द्वारा क्लर्क को आवेदन देने को कहा लेकिन क्लर्क के द्वारा पावती नहीं दी गई। प्रभारी प्राचार्य के दुर्व्यवहार से परेशान होकर व्याख्याता श्रीमती पाण्डेय के द्वारा इसकी शिकायत डीईओ से की गई जिस पर डीईओ द्वारा प्राचार्य को मामले में नियमानुसार कार्यवाही करने कहा गया ,लेकिन प्रभारी प्राचार्य ने अवकाश स्वीकृत नहीं किया।

सवाल उठता है कि क्या एक शिक्षिका मां को अपने पांच माह की बच्ची के पालन के लिए संतान पालन अवकाश नहीं मिल सकता? आखिर एक शिक्षिका मां इस स्थिति में क्या करे? आखिर प्रभारी प्राचार्य के इस तरह से मानसिक रूप से प्रताड़ित होने पर शिक्षिका मां क्या करे ? प्रभारी प्राचार्य अपने हिसाब से मुड़ नहीं होने से एक शिक्षिका मां को उसके संतान पालन अवकाश के अधिकार से आखिर कैसे वंचित कर सकता है? आखिर ऐसी स्थिति में उस मासूम बच्ची का क्या दोष जिसको एक प्रभारी प्राचार्य की मनमानी की वजह से मां के लालन पालन से वंचित होना पड़ रहा है। क्या शिक्षिका मां का दोष है कि वह एक मासूम पांच माह की बच्ची की मां है उसका अधिकार पालन अवकाश का नहीं है।
स्कूल में चल रहा निर्माण बैठने की समुचित जगह नहीं : शिक्षिका प्रीति पाण्डेय ने संतान पालन के लिए आवेदन स्वीकृत नहीं करने की स्थिति में स्कूल में होने वाली समस्याओं के संबंध में बताया कि वर्तमान में वहां निर्माण कार्य चल रहा है जिससे स्कूल में बैठने तक की पर्याप्त जगह नहीं है , बच्ची अभी केवल पांच महीने की है जिसे लेकर वह स्कूल में कहा बैठे निर्माण कार्य की वजह से धूल उड़ने इत्यादि की वजह से बच्ची के बीमार होने की संभावना बनी रहेगी।
इस गंभीर विषय पर जिम्मेदार अधिकारियों को संज्ञान लेकर उचित और वैधानिक कार्यवाही करनी चाहिए जिससे कोई भी शिक्षिका मां संतान पालन अवकाश के अभाव में बच्चे के लालन पालन से वंचित ना हो सके।
“मेटरनिटी लिव से आज आई है अपने यह का रिजल्ट जीरो है आरोप कोई भी लगा सकता है। अवकाश स्वीकृत करना नहीं करना डीईओ मेरे ऊपर डाल दिए है आपको देना है तो दीजिए शिक्षिका को किसी भी प्रकार का संताल पालन अवकाश का अधिकार नहीं है।” (वी. पी. कश्यप प्रभारी प्राचार्य शाउमावि तागा)
वही जिला शिक्षा अधिकारी अश्वनी भारद्वाज से इस विषय में उनके नंबर पर कार्यालयीन समय में काल करके पूछा गया तो उन्होंने कहा अभी एक प्रोग्राम में हु बाद में बताता हु परन्तु उनका कोई जवाब नहीं आया। ऐसे संवेदनशील मुद्दे में भी कोई जवाबदेही नहीं दिखाई गई।