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व्यापार जगत

बेमौसम बारिश से सुस्त पड़ी एसी की मांग, बढ़ती लागत के बीच 5-15% तक महंगे हो सकते हैं एयर कंडीशनर

सीजन शुरू होने से पहले ही बाजार दबाव में, कच्चे माल और ईंधन महंगे होने से कंपनियों की लागत बढ़ी; डिमांड और सप्लाई दोनों तरफ से चुनौती

NTN NEWS REPORT// देश में गर्मी का सीजन शुरू होने से पहले ही एयर कंडीशनर (एसी) बाजार दबाव में आ गया है। आमतौर पर मार्च महीने से कूलिंग प्रोडक्ट्स की मांग तेज हो जाती है, लेकिन इस बार स्थिति अलग नजर आ रही है। उत्तर और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश के कारण तापमान सामान्य से कम है, जिससे शुरुआती एसी बिक्री पर सीधा असर पड़ा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली जैसे शहरों में भी अभी तक तीखी गर्मी महसूस नहीं हो रही है, जिसके चलते उपभोक्ता एसी खरीदने को लेकर जल्दबाजी में नहीं हैं। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर अप्रैल में तापमान तेजी से नहीं बढ़ता, तो पूरे सीजन की मांग प्रभावित हो सकती है।


डिमांड कमजोर, फिर भी कीमतें बढ़ाने की तैयारी

मांग कमजोर रहने के बावजूद कंपनियां एसी की कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। इंडस्ट्री प्रोजेक्शन के मुताबिक इस सीजन में एसी की कीमतों में 5% से 15% तक बढ़ोतरी हो सकती है।

कंपनियों का तर्क है कि कच्चे माल और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने निर्माण लागत (मेकिंग कॉस्ट) बढ़ा दी है। ऐसे में अगर कीमतें नहीं बढ़ाई गईं तो मुनाफे (मार्जिन) पर असर पड़ेगा, और अगर बढ़ाई गईं तो मांग और कमजोर पड़ सकती है। यानी कंपनियां दोहरी चुनौती का सामना कर रही हैं।


कच्चे माल की महंगाई और ग्लोबल तनाव का असर

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी एसी बाजार पर साफ दिख रहा है।

कॉपर, एल्यूमिनियम, स्टील और प्लास्टिक जैसे कच्चे माल महंगे हो गए हैं। तेल महंगा होने से पेट्रोकेमिकल उत्पादों की लागत बढ़ती है, जिनका इस्तेमाल एसी के कई पुर्जों में होता है। इसके अलावा रुपये में कमजोरी और लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी ने भी कंपनियों का खर्च बढ़ाया है।

इंडस्ट्री अनुमान के अनुसार, यदि सप्लाई चेन में व्यवधान जारी रहा तो उत्पादन में 20% तक कटौती करनी पड़ सकती है।


एलपीजी संकट और उत्पादन पर संभावित असर

हाल ही में एलपीजी की कमी के कारण ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार में इलेक्ट्रिक कुकिंग अप्लायंसेज की कीमतें दोगुनी तक हो गईं और कई उत्पाद आउट ऑफ स्टॉक हो गए। इसी तरह की स्थिति एसी बाजार में भी बनने की आशंका जताई जा रही है।

गैस सप्लाई में दबाव का असर उत्पादन पर पड़ सकता है, जिससे बाजार में उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।


नए ऊर्जा मानकों से बढ़ी लागत

इस साल से लागू नए ऊर्जा दक्षता मानकों ने भी एसी कंपनियों की लागत बढ़ाई है। इन नियमों के तहत कंपनियों को अधिक बिजली बचाने वाले मॉडल तैयार करने पड़ रहे हैं।

हालांकि लंबे समय में इससे उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिलेगी, लेकिन फिलहाल निर्माण लागत बढ़ने से उत्पाद महंगे हो रहे हैं।


कंपनियों के सामने रणनीतिक चुनौती

एसी कंपनियां इस समय असमंजस की स्थिति में हैं। एक तरफ संभावित मांग को ध्यान में रखते हुए उत्पादन बढ़ाने का दबाव है, तो दूसरी तरफ लागत और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

अगर अचानक तापमान बढ़ता है तो मांग तेजी से उछल सकती है। लेकिन अगर मौसम सामान्य रहा तो ज्यादा स्टॉक कंपनियों के लिए जोखिम बन सकता है। ऐसे में इस बार प्रोडक्शन और प्राइसिंग रणनीति तय करना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।


उपभोक्ताओं पर सीधा असर

इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है। एसी की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत मिल चुके हैं और आगे भी कीमतें बढ़ सकती हैं।

हालांकि यदि मांग उम्मीद से कम रहती है तो कंपनियां सीमित अवधि के लिए छूट और ऑफर दे सकती हैं। लेकिन कुल मिलाकर संकेत यही हैं कि इस बार एसी खरीदना पिछले वर्षों की तुलना में महंगा साबित हो सकता है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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