
पार्किंग विहीन अवैध निर्माणों का जाल, जांजगीर-चांपा की व्यवस्था पर भारी, नक्शा पास दिखावा, ज़मीनी हकीकत नदारद — जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर सवाल
NTN NEWS REPORT// जांजगीर-चांपा। जिले में अवैध निर्माण और बिना अनुमति किए जा रहे भवन निर्माण कार्यों की बाढ़ सी आ गई है। स्थिति यह है कि शहर से लेकर कस्बों तक कई बड़े व्यावसायिक भवन, बहुमंजिला इमारतें और दुकानें या तो बिना विधि सम्मत नक्शा पास कराए संचालित हो रही हैं या फिर नक्शा पास कराने के बाद नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू यह है कि ऐसे अधिकांश भवनों में पार्किंग की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। कई मामलों में नक्शे में पर्याप्त पार्किंग दर्शाकर अनुमति तो ले ली गई, लेकिन हकीकत में या तो पार्किंग पूरी तरह गायब है या नाममात्र की है। परिणामस्वरूप शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा गई है।
पार्किंग संकट से बिगड़ी यातायात व्यवस्था
पार्किंग की कमी के चलते मुख्य मार्गों पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। सड़क किनारे अवैध पार्किंग से न सिर्फ यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर सबसे अधिक प्रभावित हैं। आमजन को रोजमर्रा के कामों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नियमों का खुला उल्लंघन, कार्रवाई शून्य
शहरी विकास एवं स्थानीय निकायों के नियम स्पष्ट हैं कि व्यावसायिक और बहुमंजिला भवनों में निर्धारित मानकों के अनुसार पार्किंग की व्यवस्था अनिवार्य है। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर धड़ल्ले से व्यापार किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जिम्मेदार विभाग अब तक मूकदर्शक क्यों बने हुए हैं?
चिन्हांकन कर ताबड़तोड़ कार्रवाई की मांग
आवश्यक है कि ऐसे सभी भवन मालिकों को चिन्हांकित किया जाए—
- जिनके पास नक्शा स्वीकृत ही नहीं है,
- जिनका निर्माण स्वीकृत नक्शे के विपरीत किया गया है,
- और जिनकी पार्किंग व्यवस्था कागजों तक सीमित है।
इन पर भारी जुर्माना, व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक, और जरूरत पड़ने पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की जानी चाहिए।
सख्ती से ही बनेगा अनुशासन
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कड़ाई से नियमों का पालन नहीं कराया जाएगा, तब तक अवैध निर्माण पर लगाम लगाना संभव नहीं है। एक-दो उदाहरणात्मक कार्रवाई भी शहर में अनुशासन स्थापित करने के लिए पर्याप्त होगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर कब तक ठोस कदम उठाते हैं, या फिर जांजगीर-चांपा की जनता यूं ही जाम, हादसों और अव्यवस्था का दंश झेलती रहेगी।