
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के शासकीय गाड़ी में पीली बत्ती का उपयोग, नियमों के विपरीत मामला आया सामने
NTN NEWS REPORT// जांजगीर-चांपा। जिले में शासकीय वाहनों में नियमों के विपरीत बत्ती लगाने का मामला एक बार फिर सामने आया है। इस बार मामला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के शासकीय वाहन से जुड़ा हुआ है, जिसमें कथित रूप से पीली बत्ती लगाकर वाहन का उपयोग किया जा रहा है। जबकि शासन के स्पष्ट नियमों के अनुसार सामान्य प्रशासनिक अधिकारियों के वाहनों में किसी भी प्रकार की बत्ती लगाने की अनुमति नहीं है।
जानकारी के अनुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के शासकीय वाहन में लंबे समय से पीली बत्ती लगाकर परिवहन किया जा रहा है। यह व्यवस्था शासन के निर्धारित नियमों के विरुद्ध बताई जा रही है। शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को ही विशेष बत्ती के उपयोग की अनुमति दी गई है।
नियमों के अनुसार केवल इन वाहनों को अनुमति
नियमों के मुताबिक लाल-नीली बत्ती का उपयोग केवल एम्बुलेंस, अग्निशमन सेवा और पुलिस के पेट्रोलिंग वाहनों तक ही सीमित है। इसके अतिरिक्त किसी भी शासकीय या निजी वाहन में बत्ती लगाने की पात्रता नहीं है। बावजूद इसके कई स्थानों पर अधिकारी और अन्य लोग नियमों की अनदेखी करते हुए वाहनों में बत्ती का उपयोग करते देखे जाते हैं।
जिले में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
जांजगीर-चांपा जिले में इससे पहले भी कई शासकीय और निजी वाहनों में अवैध रूप से बत्ती लगाए जाने के मामले सामने आ चुके हैं। पूर्व में इस विषय को लेकर NTN रिपोर्ट द्वारा प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी। खबर के बाद प्रशासन हरकत में आया था और जिले में कई वाहनों से अवैध रूप से लगी बत्तियों को हटाया गया था।
सीएमएचओ ने दी यह सफाई
इस संबंध में जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से पूछताछ की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय में जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने पदभार संभाला है, तब से वाहन में बत्ती लगी हुई है।
सीएमएचओ ने कहा,
“मुझे इस संबंध में जानकारी नहीं है। जब से मैं आई हूं, तब से गाड़ी में बत्ती लगी हुई है। हो सकता है गाड़ी शासन से ही बत्ती लगी हुई आई हो। इस मामले को मैं देखती हूं। मुझे यह भी जानकारी नहीं है कि मुझे बत्ती लगाने की पात्रता है या नहीं।”
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि शासन के स्पष्ट नियम होने के बावजूद अधिकारियों के वाहनों में इस तरह बत्ती का उपयोग हो रहा है, तो यह नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और संबंधित वाहन से पीली बत्ती हटाई जाती है या नहीं।