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4000 करोड़ रुपये का महादांव! आज सिनेमाघरों में रिलीज होगी ‘रामायण’, रिकॉर्ड एडवांस बुकिंग के बीच विवादों और उम्मीदों की अग्निपरीक्षा

रणबीर कपूर बनेंगे मर्यादा पुरुषोत्तम राम, साई पल्लवी सीता की भूमिका में आएंगी नजर; 110 करोड़ रुपये से अधिक की एडवांस बुकिंग का दावा, वीएफएक्स और संगीत को लेकर उठे सवाल

NTN REPORT// नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल भव्य फिल्म ‘रामायण’ 5 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। हजारों करोड़ रुपये के अनुमानित बजट, बड़े सितारों की मौजूदगी, अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी टीम और भारतीय संस्कृति की सबसे लोकप्रिय धार्मिक कथाओं में से एक पर आधारित इस फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्सुकता है। फिल्म की रिलीज से पहले ही इसकी एडवांस बुकिंग को लेकर बड़े आंकड़े सामने आए हैं। वहीं दूसरी ओर संगीत, दृश्य प्रभावों (वीएफएक्स), कलाकारों के चयन और धार्मिक पात्रों के चित्रण को लेकर बहस भी लगातार जारी रही है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

करीब चार दशक पहले जब रामानंद सागर की ‘रामायण’ दूरदर्शन पर प्रसारित होती थी, तब इसे देखने के लिए लोग अपने जरूरी काम तक रोक देते थे। कई स्थानों पर टेलीविजन के सामने पूजा-अर्चना होती थी और प्रसारण के दौरान सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था। अब उसी कालजयी कथा को आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सिनेमाई स्तर पर बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है। ऐसे में फिल्म के सामने केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करने की चुनौती नहीं, बल्कि करोड़ों दर्शकों की भावनाओं और अपेक्षाओं पर खरा उतरने की भी बड़ी जिम्मेदारी है।

4000 करोड़ रुपये का दांव, भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल

‘रामायण’ को सामान्य पौराणिक फिल्म के बजाय एक विशाल सिनेमाई परियोजना के रूप में तैयार किया गया है। फिल्म की भव्यता, कलाकारों की लंबी सूची, विशाल सेट, युद्ध के दृश्य और अत्याधुनिक तकनीक इसे बड़े स्तर का प्रोजेक्ट बनाते हैं। इसके निर्माण से जुड़ी लागत को लेकर लगभग 4000 करोड़ रुपये तक के आंकड़े चर्चा में हैं।

फिल्म में अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया गया है। दृश्य प्रभावों के लिए प्रतिष्ठित कंपनी डीएनईजी को जोड़ा गया है। इसके अलावा फिल्म को आईमैक्स सहित प्रीमियम सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की तैयारी की गई है।

निर्माताओं की मंशा केवल भारतीय दर्शकों तक सीमित रहने की नहीं है, बल्कि रामायण की कथा को वैश्विक दर्शकों के सामने भारतीय संस्कृति और सिनेमा की एक भव्य प्रस्तुति के रूप में पहुंचाने की है।

रणबीर कपूर राम के रूप में, साई पल्लवी निभाएंगी सीता की भूमिका

फिल्म की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसका कलाकार चयन भी शामिल है। रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे, जबकि साई पल्लवी सीता की भूमिका निभा रही हैं। यश को रावण के किरदार से जोड़ा गया है। फिल्म में अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाओं के लिए भी चर्चित कलाकार शामिल हैं।

रणबीर कपूर के लिए भगवान राम का किरदार उनके अभिनय जीवन की एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इससे पहले वह विभिन्न भावनात्मक, प्रेम और संघर्ष से जुड़े किरदार निभा चुके हैं। ऐसे में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के संयम, आदर्श, त्याग और आंतरिक शक्ति को पर्दे पर प्रस्तुत करना उनके लिए एक बिल्कुल अलग अनुभव होगा।

वहीं साई पल्लवी के सीता के रूप में चयन को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चाएं हुईं। उनके रंग-रूप, मेकअप, केश-सज्जा और हिंदी उच्चारण को लेकर कुछ लोगों ने टिप्पणियां कीं। कुछ प्रतिक्रियाओं में उनकी क्षेत्रीय पहचान को भी चर्चा का विषय बनाया गया। हालांकि कलाकारों का मूल्यांकन उनके अभिनय, प्रतिभा और पात्र के प्रति उनकी समझ के आधार पर किया जाना चाहिए।

लारा दत्ता के कैकेयी वाले रूप को लेकर भी दर्शकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके परिधान और केश-सज्जा को लेकर सवाल उठाए।

संगीत पर विवाद, एआर रहमान और हैंस जिमर से थीं बड़ी उम्मीदें

फिल्म के संगीत को लेकर भी रिलीज से पहले काफी चर्चा हुई। संगीत की जिम्मेदारी एआर रहमान और हैंस जिमर जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित संगीतकारों से जुड़े होने के कारण दर्शकों की अपेक्षाएं काफी बढ़ गई थीं।

लेकिन फिल्म का गीत ‘मंगल रंग’ सामने आने के बाद संगीत की शैली को लेकर बहस शुरू हो गई। कुछ दर्शकों ने इसमें सूफी और कव्वाली शैली का प्रभाव महसूस किया। सवाल उठाए गए कि भगवान राम के अयोध्या आगमन जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग के लिए इस तरह का संगीत कितना उपयुक्त है।

कुछ लोगों ने इसकी धुनों की तुलना एआर रहमान के पुराने संगीत से भी की। हालांकि संगीत को लेकर पसंद और नापसंद व्यक्तिगत हो सकती है, लेकिन रामायण जैसी भावनात्मक और धार्मिक महत्व वाली कथा में संगीत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

वीएफएक्स को लेकर उठे सवाल, ‘आदिपुरुष’ से होने लगी तुलना

फिल्म के दृश्य प्रभाव यानी वीएफएक्स भी लगातार चर्चा का विषय बने रहे। फिल्म की पहली झलक और प्रचार सामग्री सामने आने के बाद जहां कुछ दर्शकों ने इसकी भव्यता की सराहना की, वहीं कुछ लोगों ने जंगल, आसमान और अन्य डिजिटल दृश्यों को जरूरत से ज्यादा कृत्रिम बताया।

सोशल मीडिया पर फिल्म की तुलना ‘आदिपुरुष’ से भी की जाने लगी। गौरतलब है कि ‘आदिपुरुष’ को भी बड़े बजट और आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया था, लेकिन उसके दृश्य प्रभावों और पात्रों की प्रस्तुति को लेकर व्यापक आलोचना हुई थी।

यही वजह है कि ‘रामायण’ के सामने चुनौती केवल बड़े और आकर्षक दृश्य तैयार करने की नहीं है, बल्कि ऐसे दृश्य प्रस्तुत करने की है जो कहानी की पृष्ठभूमि के अनुरूप स्वाभाविक, विश्वसनीय और प्रभावशाली दिखाई दें।

छह भाषाओं में रिलीज की तैयारी, अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी नजर

निर्माताओं ने फिल्म को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने के लिए बहुभाषीय रिलीज की रणनीति अपनाई है। फिल्म हिंदी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम और अंग्रेजी में प्रदर्शित की जा रही है।

27 अक्टूबर को अमेरिका के लॉस एंजेलिस में फिल्म का भव्य प्रीमियर आयोजित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी, जिसमें फिल्म से जुड़े कलाकार और अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल हुई थीं।

यह आयोजन इस बात का संकेत है कि निर्माता रामायण को केवल भारतीय बाजार की फिल्म नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली बड़ी सिनेमाई परियोजना के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

क्या रामायण बनेगी भारतीय सिनेमा की नई वैश्विक पहचान?

फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा की योजना इसे केवल दो फिल्मों तक सीमित रखने की नहीं बताई जा रही है। इस परियोजना को एक विस्तृत सिनेमाई संसार के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षा है, जिसमें भविष्य में अलग-अलग कहानियों और पात्रों के माध्यम से रामायण की दुनिया का विस्तार किया जा सकता है।

जिस प्रकार हॉलीवुड में बड़ी फिल्म फ्रेंचाइजी के माध्यम से किसी कहानी और उसके पात्रों को लंबे समय तक दर्शकों के बीच स्थापित किया जाता है, उसी तरह भारतीय पौराणिक कथाओं को भी वैश्विक स्तर पर एक नई सिनेमाई पहचान दिलाने का प्रयास इस परियोजना के पीछे दिखाई देता है।

110 करोड़ रुपये से अधिक की एडवांस बुकिंग का दावा, टिकटों की कीमत भी चर्चा में

फिल्म की रिलीज से पहले इसकी एडवांस बुकिंग ने भी दर्शकों और फिल्म जगत का ध्यान खींचा है। उपलब्ध कराए गए समाचार विवरण में सैकनिल्क के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि भारत और विदेशों में फिल्म की कुल ग्रॉस एडवांस बुकिंग लगभग 110.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसमें करीब 29.57 लाख टिकटों की बुकिंग का उल्लेख किया गया है।

मुंबई के कुछ प्रीमियम सिनेमाघरों में आईमैक्स और लग्जरी सीटों के टिकटों की कीमत 2000 रुपये से अधिक बताई गई। कुछ रिपोर्टों में टिकटों की कीमत 2700 रुपये से भी ऊपर पहुंचने का जिक्र है।

ये आंकड़े फिल्म को लेकर दर्शकों के उत्साह और बड़े सिनेमाई अनुभव के प्रति उनकी दिलचस्पी को दर्शाते हैं। हालांकि वास्तविक सफलता का आकलन फिल्म की रिलीज के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया और बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन से ही हो सकेगा।

रामानंद सागर की रामायण से होगी तुलना, क्या कायम रख पाएगी पुरानी विरासत?

‘रामायण’ की चर्चा हो और रामानंद सागर की ऐतिहासिक दूरदर्शन धारावाहिक का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है। वर्ष 1987 में प्रसारित हुई रामानंद सागर की रामायण ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में अमिट स्थान बनाया था।

अरुण गोविल ने भगवान राम और दीपिका चिखलिया ने माता सीता की भूमिका निभाकर दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बनाया। उस दौर में लोग रामायण को केवल एक धारावाहिक के रूप में नहीं देखते थे, बल्कि उससे धार्मिक और भावनात्मक जुड़ाव रखते थे।

सीमित तकनीकी संसाधनों के बावजूद उस धारावाहिक की सबसे बड़ी ताकत उसकी कहानी, संवाद, संगीत और पात्रों की प्रस्तुति थी। आज की फिल्म के पास अत्याधुनिक तकनीक, विशाल बजट और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार हैं, लेकिन इसकी तुलना पुरानी रामायण से होना स्वाभाविक है।

दोनों प्रस्तुतियों का समय और माध्यम अलग-अलग हैं। इसके बावजूद नई फिल्म के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह आधुनिक तकनीक और भव्यता के साथ रामायण की मूल भावना, पात्रों की गरिमा और कथा के भावनात्मक पक्ष को कितनी ईमानदारी से प्रस्तुत कर पाती है।

बॉक्स ऑफिस से बड़ी होगी दर्शकों की भावनात्मक कसौटी

‘रामायण’ के सामने एक तरफ रिकॉर्ड एडवांस बुकिंग, बड़े सितारे, अंतरराष्ट्रीय तकनीकी टीम और विशाल बजट जैसी मजबूत संभावनाएं हैं, तो दूसरी तरफ दर्शकों की असाधारण अपेक्षाएं, संगीत और वीएफएक्स को लेकर उठे सवाल तथा रामानंद सागर की रामायण से तुलना जैसी चुनौतियां भी हैं।

फिल्म के लिए केवल पहले दिन की कमाई या शुरुआती दर्शक संख्या ही सफलता का अंतिम पैमाना नहीं होगी। असली परीक्षा यह होगी कि फिल्म दर्शकों के मन में कितनी जगह बना पाती है और रामायण की मूल भावना को कितनी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

रामायण की लोकप्रियता केवल युद्ध, भव्यता और चमत्कारों में नहीं, बल्कि मर्यादा, त्याग, सत्य, कर्तव्य, प्रेम और आदर्श जीवन मूल्यों में निहित है। ऐसे में आधुनिक तकनीक और हजारों करोड़ रुपये के निवेश के बीच इन मूल्यों को जीवंत बनाए रखना ही फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 5 नवंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही ‘रामायण’ भारतीय सिनेमा में केवल एक बड़ी व्यावसायिक सफलता बनकर रह जाएगी या वास्तव में वैश्विक स्तर पर भारतीय पौराणिक सिनेमा का नया अध्याय लिखेगी।

यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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