
आखिर ओपीडी का क्या दोष ? क्यों नहीं बैठ रहे डॉक्टर ? मरीज हो रहे हलाकान…इन पर कौन करेगा कार्यवाही ?
NTN REPORT// जांजगीर का जिला चिकित्सालय सुर्खियों में ना रहे यह संभव नहीं है। आए दिन यहां ऐसा कुछ घटित होते रहता है जिससे जिला चिकित्सालय सुर्खियों में बना ही रहता है अभी हाल ही में जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन और डॉक्टरों के मध्य हो रही टकराहट/मतभेद की वजह से जिला अस्पताल सुर्खियों में बना हुआ है।
जहां डॉक्टर पक्ष का कहना है कि सिविल सर्जन कड़ा बर्ताव करते हैं और अन्य कई तरह के आरोप सिविल सर्जन पर लगाए गए हैं वहीं सिविल सर्जन का कहना है कि जिला अस्पताल की व्यवस्था सुधारने एवं मरीजों की सुख सुविधाओं का ख्याल रखना समुचित इलाज के लिए कड़ाई करना मेरा कर्तव्य है कोई भी मरीज इलाज के अभाव में दुखी,परेशान ना हो यही मेरा सिविल सर्जन होने के नाते कर्तव्य है। खैर यह तो पिछले कई दिनों से चल रही टकराहट / मतभेद में एक दूसरे पर लगाए गए आरोप प्रत्यारोप हैं जिसकी जांच चल रही जिसके लिए रायपुर से टीम भी भेजी गई है।
हम बात कर रहे हैं आज दिनांक 13/03/2025 के शाम की ओपीडी समय की जिसमें कोई भी डाक्टर उपस्थित दिखाई नहीं दिए जबकि आज होलिका दहन जैसे पावन पर्व में पूरा प्रशासन मुस्तादी से ड्यूटी कर रहा है। जिसे चौक चौराहों में देखा जा सकता है कि कितनी मुस्तैदी से प्रशासन, पुलिस प्रशासन अपने-अपने कर्तव्यों में डटे हुए हैं। वहीं आज के महत्वपूर्ण दिन में जिला अस्पताल के डॉक्टर ओपीडी से नदारत दिखे खैर ओपीडी में नहीं मिलना कोई नई बात नहीं है परंतु विगत कुछ माह से ओपीडी की व्यवस्था दुरुस्त दिखाई पड़ रही थी,केवल एक दो डॉक्टरों को छोड़ अन्य सभी डॉक्टर नियत समय में ओपीडी में बैठ रहे थे। ऐसा शायद सिविल सर्जन की कढ़ाई का असर हो अन्यथा इससे पूर्व ओपीडी के समय का कोई टाइम टेबल नहीं था जिससे सभी अवगत ही है. ऐसा लग रहा था कि ओपीडी के समय में सिविल सर्जन की कड़ाई से मरीजों को जो पहले घंटों- घंटों पहले इंतजार करना पड़ रहा था उससे मुक्ति मिल जाएगी परंतु सिविल सर्जन के नरम पढ़ने से पुनः ओपीडी बदहाली में चली गई ऐसा आज शाम के ओपीडी को देखने से लगता है। इस संबंध में सिविल सर्जन से पूछने पर कहा गया की ओपीडी हेतु सभी की ड्यूटी नियमानुसार लगाई गई है अब डॉक्टर क्यों नहीं बैठे हैं यह समझ से परे हैं वहीं इस संबंध में डॉक्टर इक़बाल हुसैन (सीडा अध्यक्ष) से बात करने पर पूरी बात सुनते हुए आवाज नहीं आ रही है ऐसा कह कर फोन काट दिया गया डॉक्टर हुसैन को पुनः कॉल करने पर उनका मोबाइल बंद मिला।
मशीनों को अब नहीं काट रहे चूहे : वर्तमान सिविल सर्जन के आने से पहले आए दिन लैब जांच की मशीन बिगड़ी पड़ी रहती थी कारण पूछने पर जवाब दिया जाता था कि मशीनों को चूहा काट दिया है इसलिए महंगी महंगी जांच मरीजों को बाहर कराना पड़ता था हर मरीज अस्पताल में मौजूद जांच को बाहर से कराने को मजबूर हो जाता था जिसकी शिकायत लगातार जिम्मेदार अधिकारियों के समक्ष की जाती रही पर मशीन बनने का नाम ही नहीं लेती थी। आए दिन चूहा मशीन का दुश्मन बना रहता था, परंतु अब कुछ माह से चूहे की दुश्मनी एकाएक जांच मशीनों से खत्म हो गई अब मशीन नहीं बिगाड़ रही है कुछ लोग जो चूहे को ढाल बनाकर बड़ा खेल कर रहे थे उनको उन जगहों से बाहर कर दिया गया हैं शायद यही कारण है कि चूहा भी अब शांत हो गया है खैर अब चूहे की आप वापसी हो जाए तो अचरज की बात नहीं है सिविल सर्जन नरम जो पड़ गए हैं।
बहु प्रतीक्षित सोनोग्राफी सुविधा नियमित रूप से हुई प्रारंभ : जिले के सबसे बड़े अस्पताल में जहां सोनोग्राफी की जांच पूर्व में नियमित रूप से नहीं हो पा रही थी वहीं अब आम जनमानस को, गरीब को नियमित रूप से उपलब्ध हो गई है आम जनता को गरीबों को अब बाहर सोनोग्राफी कराने परेशान नहीं होना पड़ रहा है ना ही इसके लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। जो मरीज ₹10 की पर्ची कटा कर सरकार की मंशा में अपने आप को सुरक्षित पा कर कम से कम रुपयों में सुविधा का लाभ रहे थे उन्हें अब समुचित इलाज से वंचित नहीं होना पड़ रहा है। सोनोग्राफी की सुविधा बहाल होने से खासकर गर्भवती महिलाओं को बड़ी राहत पहुंची है।
जिला अस्पताल में ही हो रहा समुचित इलाज : जिला चिकित्सालय जांजगीर में जहां पूर्व में रेफरल सेंटर होने का धब्बा लगा हुआ था ऐसे आरोप आए दिन लगा करते थे वही अब जिला अस्पताल में बिना रेफर किए मरीजों को समुचित इलाज का प्रयास हो रहा है, अन्यत्र जगहों पर रेफर नहीं किया जा रहा है तो आरोप लग रहा है कि जबरन मरीजों को रोक कर इलाज कराया जा रहा है। वह भी केवल कुछ लाभ के लिए अब प्रश्न उठता है कि रेफर केंद्र रहे तो ठीक है या जिले अस्पताल के अंतर्गत ही समुचित इलाज हो संपूर्ण व्यवस्था उपलब्ध हो वह ठीक है खैर इस मुद्दे का सही जवाब सिविल सर्जन और डॉक्टरों के पास ही होगा रही बात आम जनमानस की तो उनकी आवश्यकता सही और समुचित इलाज की है ना कि बड़े बड़े निजी संस्थाओं में भारी भरकम राशि खर्च का स्वयं को ठगे जाने की।
गर्भवती महिलाओं को घंटे खड़े रहकर अपनी बारी का नहीं करना पड़ रहा इंतजार : जहां पूर्व में गर्भवती महिलाओं को इलाज हेतु घंटे खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था वही उनके लिए अस्पताल प्रबंधन के द्वारा समुचित बैठक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है जिससे महिलाओं को घंटे खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार नहीं करना पड़ रहा है।
जिला चिकित्सालय जांजगीर में जो कुछ विगत कई दिनों से चल रहा है उससे केवल आम जनमानस और दूर-दराज से आए गरीब मजबूर लोग ही परेशान हो रहे हैं आमजन मानस केवल एक आशा यह रहती है कि जिले के सबसे बड़े अस्पताल में आने पर उन्हें समय पर ओपीडी में डॉक्टर मिल जाए इलाज हेतु संपूर्ण जांच अस्पताल में ही उपलब्ध हो जाए आवश्यक दवाई मिल जाए। आम जन मानस को अन्य बातों से कोई सरोकार नहीं है। वैसे भी वर्तमान में विष्णु देव सरकार चिकित्सा के क्षेत्र में लगातार अच्छे कार्य कर रही है कई प्रकार की नई-नई व्यवस्थाएं बना रही है जिससे आम लोगों को समुचित चिकित्सा सुविधा आसानी से प्राप्त हो सके उन्हें दर-दर भटकना न पड़े और ना ही इलाज के अभाव में जान गवाना पड़े महंगे महंगे अस्पतालों का चक्कर न काटना पड़े इसलिए संपूर्ण सुविधा शासकीय चिकित्सालय में उपलब्ध करा रही है। जिसका असर जिले ही नहीं संपूर्ण प्रदेश में भी दिख रहा है, लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार के द्वारा तरह-तरह के अनुदान राशि गंभीर मरीजों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है।
रही बात जिला चिकित्सालय जांजगीर की तो केवल कुछ कारणों से आपसी खींचतान से आमजन मानस को वर्तमान में मिल रही जन सुविधाओं से पुनः वंचित न होना पड़ जाए, फिर से जांच मशीनों को चूहा ना काटने लग जाए और आम जन मानस फिर से समुचित इलाज से वंचित न हो जाए।