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दिशा सालियान मौत मामले में बड़ा फैसला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI जांच के दिए आदेश, मुंबई पुलिस को लगाई कड़ी फटकार

NTN REPORT// मुंबई। दिशा सालियान मौत मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को बड़ा आदेश देते हुए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने करीब छह साल तक प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने और जांच को केवल आकस्मिक मौत के मामले तक सीमित रखने को लेकर मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

दिशा सालियान मौत मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश। (प्रतीकात्मक एआई तस्वीर)

न्यायमूर्ति सारंग कोटवाल और न्यायमूर्ति रंजीतसिंहा राजा भोंसले की खंडपीठ ने अपने 44 पन्नों के फैसले में कहा कि किसी जांच को असामान्य रूप से लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता। अदालत के अनुसार, करीब छह साल तक चली पुलिस जांच ने कई सवालों के जवाब देने के बजाय नए सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने मामले की उचित और ठोस जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच को आवश्यक माना।

छह साल तक FIR नहीं होने पर पुलिस की भूमिका पर सवाल

अदालत ने कहा कि मुंबई पुलिस के पास कथित अपराध की जांच करने के लिए पर्याप्त अवसर था, लेकिन उसने प्राथमिकी दर्ज नहीं की और संज्ञेय अपराध की जांच भी नहीं की। अदालत ने पुलिस की जांच में गंभीर विसंगतियों का उल्लेख करते हुए मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और केस पेपर तत्काल CBI को सौंपने का निर्देश दिया।

CBI को मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करने तथा दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज करने का भी निर्देश दिया गया है।

12वीं मंजिल से गिरने की घटना और चोटों को लेकर उठे सवाल

हाईकोर्ट ने पुलिस जांच के दौरान सामने आई कई परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए। अदालत के अनुसार, जिस स्थान पर दिशा का शव मिला था, वहां का स्पॉट पंचनामा कथित तौर पर देरी से किया गया।

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि 12वीं मंजिल से गिरने की बात सामने आने के बावजूद घटनास्थल पर खून नहीं मिला और सिर पर भी खून बहने वाली चोट नहीं थी। फैसले में इस बात पर भी सवाल उठाया गया कि यदि कोई व्यक्ति इतनी ऊंचाई से चेहरे के बल गिरता है, तो शरीर पर केवल ठोड़ी की चोट होना और चेहरे की किसी हड्डी का न टूटना स्वीकार करना कठिन है।

हालांकि, अदालत ने इन परिस्थितियों को किसी व्यक्ति की संलिप्तता का निष्कर्ष नहीं माना, बल्कि इन्हें आगे की जांच के लिए महत्वपूर्ण सवालों के रूप में देखा।

दिशा सालियान की मौत के बाद सामने आया था सुशांत सिंह राजपूत का मामला

दिशा सालियान ने कुछ समय तक अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के मैनेजर के रूप में काम किया था। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने उस समय इसे आकस्मिक मौत का मामला माना था।

इसके करीब एक सप्ताह बाद 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत अपने मुंबई स्थित अपार्टमेंट में मृत पाए गए। दोनों घटनाओं के बीच कथित संबंध को लेकर बाद में कई तरह के सवाल और अटकलें सामने आईं।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच बाद में CBI को सौंप दी गई थी। CBI की क्लोजर रिपोर्ट में उनकी मौत को आत्महत्या बताया गया था, हालांकि संबंधित अदालत द्वारा उस रिपोर्ट पर अभी अंतिम सुनवाई नहीं हुई है।

आदित्य ठाकरे के खिलाफ हाईकोर्ट ने नहीं की कोई टिप्पणी

दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आदित्य ठाकरे के खिलाफ कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच करना CBI का काम है और जांच के दौरान सामने आने वाली सामग्री के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी। अदालत ने यह भी कहा कि जब तक जांच अधिकारी को किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त आधार और उचित संदेह नहीं मिलता, तब तक उसे आरोपी नहीं माना जा सकता।

आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियान मामले से जुड़े आरोपों से इनकार किया है।

CBI को वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने CBI को मामले की जांच के लिए वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि जांच के दौरान कोई अपराध सामने आता है तो CBI को सक्षम अदालत के समक्ष उचित रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

वहीं, यदि जांच में कोई अपराध साबित नहीं होता या मामला नहीं बनता है, तो CBI संबंधित अदालत के समक्ष उचित समरी रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। अदालत ने सतीश सालियान को ऐसी रिपोर्ट को चुनौती देने की स्वतंत्रता भी दी है।

पिता ने लगाया था दुष्कर्म और हत्या का आरोप

सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर वर्ष 2020 में ही संदेह जताया था। बाद में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की गई तथा प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए मामले को कथित तौर पर दबाया गया।

उनके वकील निलेश ओझा ने भी पुलिस की जांच पर सवाल उठाए थे। हालांकि, ये आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और इनकी पुष्टि अदालत के इस आदेश से नहीं हुई है।

आदित्य ठाकरे ने याचिका को बताया था झूठा और निराधार

इससे पहले आदित्य ठाकरे ने हाईकोर्ट में आवेदन दाखिल कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने आग्रह किया था कि किसी भी आदेश से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर दिया जाए।

अपने आवेदन में ठाकरे ने सतीश सालियान की याचिका को झूठा, निराधार और दुर्भावनापूर्ण मंशा से प्रेरित बताया था और आरोपों से इनकार किया था।

अब CBI जांच से क्या होगा?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब दिशा सालियान की मौत से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज और केस पेपर CBI को सौंपे जाएंगे। केंद्रीय एजेंसी प्राथमिकी दर्ज कर मामले की नए सिरे से जांच करेगी और उपलब्ध साक्ष्यों, बयानों तथा घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच करेगी।

महत्वपूर्ण: हाईकोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को दोषी या आरोपी ठहरा दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाली पर्याप्त सामग्री के आधार पर ही की जाएगी

अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच या सक्षम न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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