वंदे मातरम विवाद पर कांग्रेस का रुख साफ, 1937 के पहले दो पैरा ही कार्यक्रमों में गाएगी पार्टी!
CWC बैठक में चार बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन, परिसीमन में लोकसभा की 543 सीटें बरकरार रखने की मांग; हल्द्वानी घटना पर पीएम मोदी से माफी की मांग
NTN REPORT// नई दिल्ली। वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और सत्ता पक्ष के बीच जारी राजनीतिक विवाद के बीच बुधवार को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में कांग्रेस ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी 28 अक्टूबर 1937 को तय किए गए वंदे मातरम के स्वरूप के पहले दो पैरों को ही अपने आधिकारिक कार्यक्रमों में गाएगी।

बैठक के बाद पत्रकार वार्ता में कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा कि वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस का रुख पहले दिन से स्पष्ट रहा है। उन्होंने बताया कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वंदे मातरम को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया गया था। उस समय महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, गोविंद वल्लभ पंत और आचार्य नरेंद्र देव समेत कई प्रमुख नेता मौजूद थे।
जयराम रमेश के मुताबिक, रबींद्रनाथ टैगोर की सलाह के आधार पर उस समय यह प्रस्ताव पारित किया गया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में इस प्रस्ताव को अनावश्यक रूप से विवाद का विषय बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए स्थिति स्पष्ट है। 28 अक्टूबर 1937 को तय किए गए वंदे मातरम के स्वरूप को पार्टी अपने कार्यक्रमों में अपनाएगी। साथ ही उन्होंने 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने जन-गण-मन को राष्ट्रीय गान और वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में दोहराया था।
परिसीमन पर कांग्रेस का बड़ा रुख
आगामी परिसीमन प्रक्रिया को लेकर भी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी की रणनीति स्पष्ट की गई। कांग्रेस ने लोकसभा की मौजूदा कुल 543 सीटों को ही बरकरार रखने की मांग की है।
पार्टी का कहना है कि परिसीमन के दौरान लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है और कुल सीटों की संख्या 543 पर ही स्थिर रखी जानी चाहिए।
CWC में चार प्रमुख मुद्दों पर बनी रणनीति
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राष्ट्रीय स्तर के चार प्रमुख मुद्दों पर आगे की रणनीति और राजनीतिक रोडमैप पर चर्चा हुई।
1. परीक्षा में गड़बड़ी और छात्रों के आंदोलन का मुद्दा
नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की। पार्टी ने छात्रों के आंदोलनों को लेकर सरकार के रवैये की आलोचना की।
कांग्रेस अब इस मुद्दे को देशभर में ले जाने की तैयारी में है। पार्टी की ओर से 800 से अधिक शहरों में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान चलाने की बात कही गई है।
2. ‘चंदा चोरी’ का मुद्दा
आर्थिक अनियमितताओं और राजनीतिक चंदा जुटाने की प्रक्रिया को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधने की रणनीति बनाई है। पार्टी इस मुद्दे को बूथ और जमीनी स्तर तक ले जाने की तैयारी में है।
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, इस अभियान के जरिए आम जनता के बीच आर्थिक पारदर्शिता और राजनीतिक चंदे से जुड़े सवाल उठाए जाएंगे।
3. अरुणाचल प्रदेश में चीन की गतिविधियां
अरुणाचल प्रदेश में चीन की गतिविधियों और कथित अतिक्रमण के मुद्दे को कांग्रेस ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर गंभीर विषय बताया। कार्यसमिति में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई और सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में स्पष्ट जवाब देने की मांग करने की रणनीति पर विचार किया गया।
4. शिक्षा नीति में सुधार
शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी कांग्रेस ने अपने शासित राज्यों को लेकर रणनीति तैयार की। पार्टी ने कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा है।
हल्द्वानी घटना पर पीएम मोदी से माफी की मांग
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में हल्द्वानी की घटना को लेकर भी भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद उनके साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, वह स्वीकार्य नहीं है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लंबे समय तक सदन के सदस्य रहे पार्टी अध्यक्ष के साथ इस तरह का व्यवहार गंभीर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे माफी मांगने की मांग की है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे संघ की कथित ‘उच्च जातीय मानसिकता’ दिखाई देती है। पार्टी ने कहा कि वह इस मुद्दे को भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर उठाएगी।
कांग्रेस ने साफ किया अपना राजनीतिक रोडमैप
कुल मिलाकर कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वंदे मातरम विवाद से लेकर परिसीमन, परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, राजनीतिक चंदे, चीन की गतिविधियों, शिक्षा व्यवस्था और हल्द्वानी घटना जैसे मुद्दों पर पार्टी का रुख सामने आया। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इन मुद्दों को संसद के साथ-साथ देशभर में जनअभियान के जरिए उठाया जाएगा।
अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।